महाभारत से जुड़ा पांडुपोल, जहां भीम को मिला हनुमान का संदेश

सरिस्का टाइगर रिजर्व में स्थित पांडुपोल हनुमान मंदिर महाभारत काल से जुड़ा आस्था का केंद्र है, जहां लेटी हुई मुद्रा में हनुमान जी के दर्शन होते हैं।

महाभारत से जुड़ा पांडुपोल, जहां भीम को मिला हनुमान का संदेश
  • सरिस्का टाइगर रिजर्व के बीच स्थित है पांडुपोल हनुमान मंदिर
  • महाभारत काल से जुड़ा स्थल, लेटी हुई मुद्रा में विराजमान हैं हनुमान जी
  • मंगलवार और शनिवार को उमड़ती है श्रद्धालुओं की भारी भीड़


राजस्थान के अलवर जिले में सरिस्का टाइगर रिजर्व के घने जंगलों के बीच स्थित पांडुपोल हनुमान मंदिर आस्था, इतिहास और प्रकृति का अद्भुत संगम माना जाता है। यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसका संबंध सीधे महाभारत काल से भी जोड़ा जाता है। मान्यता है कि वनवास के दौरान पांडवों ने इसी स्थान पर विश्राम किया था और भीम की भेंट यहीं भगवान हनुमान से हुई थी।

पांडुपोल’ का अर्थ है पांडवों का द्वार। कहा जाता है कि यहीं हनुमान जी ने भीम का अहंकार तोड़ते हुए उन्हें शक्ति और विनम्रता का वास्तविक अर्थ समझाया था। यही कारण है कि यह स्थल शक्ति के साथ-साथ संयम और भक्ति का प्रतीक माना जाता है।

इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां हनुमान जी लेटी हुई मुद्रा में विराजमान हैं। भारत में यह स्वरूप बहुत ही दुर्लभ माना जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस स्वरूप के दर्शन से मानसिक शांति मिलती है और जीवन के संकट दूर होते हैं।

हर मंगलवार और शनिवार को यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। दूर-दूर से श्रद्धालु संकट मोचन हनुमान के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। घने जंगल, पहाड़ों और प्राकृतिक झरनों के बीच स्थित यह मंदिर भक्तों को आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ प्रकृति से जुड़ने का भी अवसर देता है।

मंदिर तक पहुंचने के लिए सरिस्का के जंगलों से होकर जाना होता है। मंगलवार और शनिवार को निजी वाहनों को अनुमति दी जाती है, जबकि अन्य दिनों में श्रद्धालुओं को सफारी जिप्सी या कैंटर के माध्यम से मंदिर तक पहुंचाया जाता है। यह व्यवस्था वन्यजीवों और पर्यावरण की सुरक्षा को ध्यान में रखकर की गई है।

पांडुपोल हनुमान मंदिर आज भी श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है, जहां भक्ति, इतिहास और प्रकृति एक साथ जीवंत दिखाई देते हैं।