मैकेनिक की लगी लाटरी, 200 रुपए की टिकट से जीते डेढ़ करोड़
मानसा के एक मैकेनिक की किस्मत चमकी जब फोन पर मंगवाई गई 200 रुपए की लॉटरी ने उसे डेढ़ करोड़ का मालिक बना दिया। जलालाबाद में परिवार ने ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न मनाया और मैकेनिक ने गरीबों की मदद का वादा किया।
➤ मानसा के मैकेनिक की लगी डेढ़ करोड़ की लॉटरी
➤ फोन पर मंगवाई थी 200 रुपए की टिकट, निकला पंजाब स्टेट डियर मंथली लॉटरी का पहला इनाम
➤ जश्न में झूम उठा परिवार, भांगड़ा कर मनाया खुशी का त्योहार
किस्मत ने एक आम मैकेनिक की जिंदगी पूरी तरह बदल दी। मानसा निवासी मनमोहन सिंह, जो पेशे से मैकेनिक हैं, ने 200 रुपए की टिकट से डेढ़ करोड़ रुपए की लॉटरी जीत ली। उन्होंने यह टिकट जलालाबाद के लॉटरी संचालक रवि कुमार और मुकेश कुमार को फोन कर मंगवाई थी। जब उन्हें इनाम निकलने की सूचना मिली, तो पहले उन्हें यकीन नहीं हुआ, लेकिन जब कन्फर्म हुआ तो पूरा परिवार खुशी से झूम उठा।
मनमोहन सिंह ने सोमवार को अपनी पत्नी, बेटियों और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ जलालाबाद पहुंचकर लॉटरी संचालक से मुलाकात की। यहां परिवार ने ढोल की थाप पर भांगड़ा कर अपनी खुशी जाहिर की। परिवार के चेहरे पर मुस्कान और आंखों में भविष्य के सपनों की चमक दिखाई दी।
मनमोहन सिंह का कहना है कि उनकी मानसा में वर्कशॉप है, जहां वे गाड़ियों की मरम्मत का काम करते हैं। उनके परिवार में करीब 10 सदस्य हैं, जिनमें माता, पत्नी, दो बेटियां और नानी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि तीन साल पहले वे इस इलाके में काम से आए थे और जाते समय पहली बार लॉटरी का टिकट खरीदा था, लेकिन तब इनाम नहीं लगा। इसके बाद वे फोन पर टिकट बुक कराते रहे और टिकट कोरियर से मंगवाते थे। इस बार किस्मत ने उनका साथ दिया और टिकट नंबर 659770 पर 4 अक्टूबर को पहला इनाम निकला।
लॉटरी संचालक रवि कुमार और मुकेश कुमार के मुताबिक, जलालाबाद के इतिहास में इससे बड़ा इनाम पहले कभी नहीं लगा था। उन्होंने कहा कि अब इस घटना से इलाके में लॉटरी की बिक्री में भी उछाल आने की संभावना है।
मनमोहन सिंह ने कहा कि उन्हें इस इनाम की रकम का इस्तेमाल केवल अपने लिए नहीं करना है। उनका इरादा है कि वे अपने आसपास के गरीब परिवारों की मदद करेंगे। उन्होंने कहा कि उनकी कोशिश होगी कि 10 से 20 किलोमीटर के दायरे में कोई भी जरूरतमंद भूखा न सोए या इलाज के अभाव में परेशान न हो। उन्होंने बताया, “यह भगवान की देन है, इसलिए इसका कुछ हिस्सा उन्हीं के बच्चों यानी गरीबों पर खर्च करूंगा।”
इस किस्से ने दिखा दिया कि किस्मत कब, कहां, किसका दरवाजा खटखटा दे, कोई नहीं जानता। एक साधारण मैकेनिक का जीवन रातोंरात बदल गया — और यह कहानी अब पूरे पंजाब में चर्चा का विषय बन गई है।
Akhil Mahajan