कुरुक्षेत्र में स्वामी रामदेव का बड़ा बयान, बोले– मैकाले और मदरसा बोर्ड नहीं चाहिए, भारतीय शिक्षा मॉडल से ही होगा राष्ट्र निर्माण

कुरुक्षेत्र के ब्रह्मसरोवर कार्यक्रम में स्वामी रामदेव ने मैकाले और मदरसा बोर्ड का विरोध करते हुए भारतीय शिक्षा बोर्ड की वकालत की। उन्होंने सामाजिक एकता और साझा विरासत पर भी जोर दिया।

कुरुक्षेत्र में स्वामी रामदेव का बड़ा बयान, बोले– मैकाले और मदरसा बोर्ड नहीं चाहिए, भारतीय शिक्षा मॉडल से ही होगा राष्ट्र निर्माण

ब्रह्मसरोवर कार्यक्रम में स्वामी रामदेव का संबोधन
मैकाले और मदरसा बोर्ड पर जताई आपत्ति
अच्छा मुसलमान खुद को मुगलों से नहीं जोड़ता बयान


कुरुक्षेत्र के पवित्र ब्रह्मसरोवर पर आयोजित स्वामी दयानंद जयंती और स्वामी श्रद्धानंद बलिदान शताब्दी को समर्पित चतुर्वेद परायण महायज्ञ में गुरुवार को योग गुरु स्वामी रामदेव पहुंचे। उन्होंने यज्ञ में पूर्णाहुति डालकर कार्यक्रम का समापन किया और मंच से शिक्षा, संस्कृति और राष्ट्रीय एकता पर विस्तार से विचार रखे। अपने संबोधन और मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने मैकाले शिक्षा पद्धति और मदरसा शिक्षा बोर्ड को लेकर स्पष्ट आपत्ति जताते हुए भारतीय शिक्षा बोर्ड की वकालत की।

स्वामी रामदेव ने कहा कि देश में अलग-अलग नामों से शिक्षा बोर्ड चल रहे हैं, लेकिन उनका कंटेंट लगभग एक जैसा है। उन्होंने कहा कि मैकाले की सोच पर आधारित शिक्षा से ऐसे युवा तैयार हो रहे हैं जिनमें भारतीयता की भावना कमजोर पड़ रही है। उन्होंने कहा कि देश को न तो मदरसा बोर्ड चाहिए और न ही मैकाले बोर्ड, बल्कि एक ऐसा भारतीय शिक्षा बोर्ड चाहिए जो युवाओं के चरित्र निर्माण के साथ राष्ट्र निर्माण का आधार बने। उन्होंने गुरुकुलीय परंपरा को शिक्षा का मूल आधार बनाने की बात कही।

अपने संबोधन में उन्होंने सामाजिक एकता पर जोर देते हुए कहा कि चाहे कोई हिंदू हो, मुसलमान हो, सिख हो, ईसाई हो या बौद्ध, सबका DNA एक है और हम सभी ऋषि-मुनियों की संतान हैं। उन्होंने कहा कि अच्छा मुसलमान खुद को मुगलों से नहीं जोड़ता, बल्कि भारत और इस धरती माता से जोड़ता है। यह बयान सामने आते ही कार्यक्रम चर्चा का केंद्र बन गया।

स्वामी रामदेव ने कहा कि हमारे देश की व्यवस्था में कुछ लोगों ने मिलावट करने की कोशिश की, लेकिन यह देश साझा विरासत और संस्कृति वाला है। उन्होंने वर्ण व्यवस्था को कर्म आधारित बताते हुए कहा कि जो ज्ञान दे वह ब्राह्मण है, जो न्याय दिलाए वह क्षत्रिय है, जो व्यापार से देश को आगे बढ़ाए वह वैश्य है और जो पवित्रता बनाए रखे वह शूद्र है।

कार्यक्रम से पहले स्वामी रामदेव ने रेलवे रोड स्थित एक स्कूल में बच्चों को सूर्य नमस्कार का अभ्यास भी करवाया। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि सभी जाति, वर्ग और समुदाय ने देश की आजादी और विकास में योगदान दिया है। आपसी कटुता छोड़कर देश को आगे बढ़ाने की सोच विकसित करनी चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत में रहने वाले सभी लोग किसी न किसी रूप में सनातन परंपरा से जुड़े हैं क्योंकि हमारे पूर्वज, संस्कृति और विरासत साझा हैं। इसी भावना के साथ एक भारत और श्रेष्ठ भारत का सपना साकार हो सकता है।