केदारनाथ यात्रा में राहत, 25 हजार यात्रियों के ठहरने का इंतजाम
केदारनाथ यात्रा 2026 में इस बार 25 हजार श्रद्धालुओं के लिए ठहरने की व्यवस्था की गई है। कॉटेज और टेंट के जरिए ‘नो रूम’ की समस्या खत्म करने की तैयारी है।
■ केदारनाथ में ‘नो रूम’ की समस्या खत्म, 25 हजार यात्रियों के ठहरने का इंतजाम
■ कॉटेज और टेंट से पैदल मार्ग से धाम तक मजबूत व्यवस्था
■ 22 अप्रैल को खुलेंगे कपाट, इस बार 10 दिन पहले शुरू होगी यात्रा
चारधाम यात्रा से पहले केदारनाथ धाम में इस बार श्रद्धालुओं को बड़ी राहत मिलने जा रही है। हर साल पीक सीजन में ‘नो रूम’ की समस्या से जूझने वाले यात्रियों के लिए प्रशासन ने इस बार व्यापक तैयारी की है। करीब 25 हजार तीर्थयात्रियों के नाइट स्टे की व्यवस्था धाम और पूरे पैदल मार्ग पर सुनिश्चित की जा रही है, जिससे अब श्रद्धालुओं को रात में ठहरने के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन यात्रा शुरू होने से पहले व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने में जुटा है। केदारनाथ धाम के कपाट खुलने में महज कुछ दिन शेष हैं, ऐसे में जंगलचट्टी, भीमबली, छोटी लिनचोली और बड़ी लिनचोली जैसे प्रमुख पड़ावों पर ठहरने की विशेष व्यवस्था की जा रही है। इस बार पैदल मार्ग से लेकर धाम तक कॉटेज और टेंट की मजबूत श्रृंखला तैयार की जा रही है।
गढ़वाल मंडल विकास निगम (GMVN) की ओर से बनाए गए स्थायी कॉटेज में करीब 6 से 7 हजार श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा लगभग 1000 टेंट लगाए जा रहे हैं, जिनमें करीब 6 हजार यात्री रात्रि विश्राम कर सकेंगे।यही नहीं, स्थानीय युवाओं को भी इस व्यवस्था से जोड़ा गया है। रुद्रा पॉइंट से केदारनाथ धाम तक करीब 1200 टेंट लगाने की अनुमति दी गई है, जिससे लगभग 8 हजार श्रद्धालुओं को अतिरिक्त सुविधा मिलेगी। इससे न केवल यात्रा व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे और उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।
अब तक केदारनाथ में ठहरने की व्यवस्था सीमित थी और हर साल मई-जून के पीक सीजन में ‘नो रूम’ की स्थिति बन जाती थी। कई श्रद्धालुओं को रात में रास्ते में रुकना पड़ता था या ठहरने के लिए भटकना पड़ता था। लेकिन इस बार प्रशासन ने पहले से तैयारी कर इस समस्या को काफी हद तक खत्म करने की दिशा में कदम उठाए हैं।इस साल केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल 2026 को सुबह 8 बजे श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। खास बात यह है कि पिछले साल की तुलना में इस बार यात्रा 10 दिन पहले शुरू हो रही है। 2025 में कपाट 2 मई को खुले थे, जबकि इस बार श्रद्धालु अप्रैल में ही बाबा केदार के दर्शन कर सकेंगे।
प्रशासन का फोकस इस बार यात्रा को सुगम, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने पर है, ताकि लाखों श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के दर्शन कर सकें।
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