हत्यारोपी की जमानत रद्द / बाहर आते ही शिकायतकर्ता परिवार को धमकी देने का आरोप

कैथल में हत्या के आरोपी पर जमानत के बाद शिकायतकर्ता परिवार को धमकाने का आरोप लगा। पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने जमानत रद्द कर जेल भेजने के निर्देश दिए।

हत्यारोपी की जमानत रद्द / बाहर आते ही शिकायतकर्ता परिवार को धमकी देने का आरोप

➤ जमानत मिलते ही शिकायतकर्ता और उसके परिवार को धमकाने का आरोप

➤ सोशल मीडिया पर संदेश और तस्वीरें अपलोड करने का भी दावा

➤ अप्रिय घटना की आशंका जताकर हाईकोर्ट ने जमानत रद्द की


चंडीगढ़। कैथल में हत्या के एक मामले में जमानत पर बाहर आए आरोपी की कथित धमकियों को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। शिकायतकर्ता और उसके परिवार को धमकाने तथा सोशल मीडिया माध्यमों के जरिए संदेश भेजने के आरोपों के बाद अदालत ने आरोपी को मिली नियमित जमानत रद्द कर दी। कोर्ट ने माना कि मौजूदा परिस्थितियों में आरोपी को जमानत पर बाहर रहने की अनुमति देने से कोई अप्रिय घटना हो सकती है। अदालत ने हरियाणा सरकार को आदेश का पालन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश भी दिए हैं।

मामला कैथल में पड़ोसियों के बीच जून 2023 में हुए एक विवाद से जुड़ा है। विवाद के दौरान सिर में चोट लगने से एक घरेलू सहायक की मौत हो गई थी। इसी मामले में आरोपी को 28 जनवरी को नियमित जमानत मिली थी। आरोप है कि जेल से बाहर आने के बाद उसने शिकायतकर्ता और उसके परिवार को कथित तौर पर धमकाना शुरू कर दिया।

शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से अदालत में कहा गया कि आरोपी के इंस्टाग्राम और फेसबुक खातों से धमकी भरे संदेश भेजे गए। आरोप यह भी है कि शिकायतकर्ता की बहन की तस्वीरें सोशल मीडिया पर अपलोड की गईं और उसे संदेश भेजे गए। इसके बाद शिकायत दर्ज कराई गई और 17 मार्च को एक अन्य प्राथमिकी दर्ज की गई। इस मामले में आरोपी की गिरफ्तारी भी हुई।

जमानत की शर्तों के उल्लंघन का आरोप

हाईकोर्ट में शिकायतकर्ता पक्ष के वकील ने दलील दी कि आरोपी ने जमानत की शर्तों का उल्लंघन करते हुए शिकायतकर्ता और उसके परिवार को सीधे धमकियां दीं। इसी आधार पर उसकी जमानत रद्द करने की मांग की गई।

वहीं, आरोपी की ओर से दलील दी गई कि केवल एक घटना के आधार पर जमानत रद्द करना उचित नहीं होगा। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस विक्रम अग्रवाल की पीठ ने मामले की परिस्थितियों और उपलब्ध सामग्री पर विचार किया।

अदालत ने कहा कि जमानत रद्द करना एक गंभीर कदम है और इसका इस्तेमाल सामान्य तौर पर आसानी से नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि, इस मामले में अदालत ने कथित संदेशों और परिस्थितियों को गंभीरता से लिया।

कोर्ट ने अप्रिय घटना की आशंका जताई

हाईकोर्ट ने कहा कि जमानत मिलने के तुरंत बाद शिकायतकर्ता और उसके परिवार को कथित तौर पर धमकियां देना गंभीर विषय है। आदेश में शिकायतकर्ता की बहन की तस्वीरें अपलोड किए जाने और उसे संदेश भेजे जाने के आरोपों का भी उल्लेख किया गया।

वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से पेशी के दौरान आरोपी के व्यवहार को लेकर भी आदेश में टिप्पणी की गई। अदालत ने उसके व्यवहार को असामान्य और बातचीत को अस्पष्ट पाए जाने का उल्लेख किया। साथ ही अदालत ने कहा कि आवश्यकता होने पर जेल प्रशासन या संबंधित अधिकारी उसकी मानसिक स्थिति की जांच करा सकते हैं।

हरियाणा सरकार को कार्रवाई के निर्देश

मामले के समग्र तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि आरोपी को जमानत पर बने रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती। अदालत ने 28 जनवरी को दी गई नियमित जमानत रद्द कर दी।

हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को आदेश के अनुपालन के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। अदालत का यह फैसला उस स्थिति में आया है, जब जमानत पर बाहर आने के बाद आरोपी पर शिकायतकर्ता और उसके परिवार को कथित तौर पर धमकाने के आरोप लगे।