पति की हत्या कर सांप से डसवाने वाली रविता और प्रेमी अमरदीप को फांसी, 547 दिन बाद कोर्ट का बड़ा फैसला

मेरठ में पति की हत्या के मामले में पत्नी रविता और प्रेमी अमरदीप को कोर्ट ने मृत्युदंड सुनाया। अदालत ने मामले को रेयरेस्ट ऑफ रेयर माना।

पति की हत्या कर सांप से डसवाने वाली रविता और प्रेमी अमरदीप को फांसी, 547 दिन बाद कोर्ट का बड़ा फैसला

➤ रविता और अमरदीप को मृत्युदंड, 547 दिन बाद आया फैसला
➤ कोर्ट ने मामले को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ मानते हुए सुनाई सजा
➤ तीन दिन में चार दोषियों को फांसी की सजा से चर्चा में आया जिला कोर्ट


पति की हत्या के बाद वारदात को दूसरी वजह से हुई मौत जैसा दिखाने की कोशिश करने वाले मामले में अदालत ने रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। करीब 547 दिन तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद शुक्रवार को अदालत ने दोनों को हत्या का दोषी मानते हुए यह फैसला सुनाया। सजा सुनाए जाने से पहले वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए दोनों से उनकी इच्छा पूछी गई। रविता ने अपने तीन छोटे बच्चों का हवाला देते हुए उनकी देखभाल की अपील की, जबकि अमरदीप ने अपने बुजुर्ग माता-पिता की सेवा की चिंता जताई। इसके बाद दोनों भावुक हो गए।

अदालत ने अपने फैसले में इस मामले को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ श्रेणी का माना। फैसले के दौरान अदालत ने कहा कि किसी अपराध की गंभीरता केवल शव के साथ किए गए व्यवहार से तय नहीं होती, बल्कि भरोसे और पारिवारिक रिश्ते को तोड़ना भी गंभीर पहलू है। अदालत ने मामले की परिस्थितियों और अभियोजन की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों को देखते हुए दोनों को मृत्युदंड की सजा सुनाई।

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, आरोप था कि रविता ने कथित तौर पर अमरदीप के साथ मिलकर अपने पति की हत्या की और वारदात को सांप के डसने से हुई मौत जैसा दिखाने की कोशिश की। मामले में परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अभियोजन पक्ष ने अदालत में अपना पक्ष रखा। एडीजीसी क्राइम नीरज सोम के अनुसार, अभियोजन ने कुल 12 गवाह पेश किए थे।

सजा सुनाए जाने से पहले अदालत ने दोनों दोषियों से पूछा कि वे मृत्युदंड या आजीवन कारावास में से क्या चाहते हैं। दोनों ने अदालत के फैसले को स्वीकार करने की बात कही। इसके बाद अदालत ने मृत्युदंड सुनाया।

फैसले में अदालत ने भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक संदर्भों का भी उल्लेख किया। जज ने सत्यवान-सावित्री के उदाहरण के जरिए पति-पत्नी के रिश्ते और उसके प्रति जिम्मेदारी का जिक्र किया। फैसले में मनुस्मृति और आत्रेय संहिता के संदर्भ भी शामिल किए गए और दंड, न्याय तथा निष्पक्षता के महत्व पर टिप्पणी की गई।

इस मामले में अदालत का फैसला आने के बाद पुलिस और अभियोजन पक्ष की भूमिका की भी सराहना हुई। एसएसपी बीबीजीटीएस मूर्ति ने मामले में प्रभावी कार्रवाई और पैरवी करने वाली पुलिस टीम के प्रयासों की प्रशंसा की। उन्होंने प्रभावी पैरवी करने वालों को 25 हजार रुपये देने की बात भी कही।

सजा सुनाए जाने के बाद रविता की तबीयत भी बिगड़ गई। जेल प्रशासन के अनुसार, उसे तेज बुखार आया और वह बेहोश हो गई। वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा के मुताबिक, रविता सुबह से भूखी थी और लगातार रो रही थी। चिकित्सक से दवा दिलाकर उसे निगरानी में रखा गया। दोनों की काउंसलिंग शुरू कराने की बात भी कही गई है।

फिलहाल दोनों को उनकी पुरानी बैरक में रखा गया है। जेल अधीक्षक के अनुसार, अदालत के फैसले की प्रति मिलने के बाद उन्हें सजायाफ्ता कैदियों की बैरक में स्थानांतरित किया जाएगा।

इस फैसले के साथ पिछले तीन दिनों में इसी अदालत द्वारा चार दोषियों को मृत्युदंड सुनाया जा चुका है। इससे पहले 14 अक्टूबर को नीले ड्रम से जुड़े चर्चित हत्याकांड में मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल को भी फांसी की सजा सुनाई गई थी।

अब सामने आया कि मामला कहां का है

यह पूरा मामला उत्तर प्रदेश के मेरठ का है। मेरठ जिला कोर्ट में एडीजे-12 जयवीर सिंह नागर की अदालत ने शुक्रवार को रविता और अमरदीप को यह सजा सुनाई। 131 पन्नों के फैसले में अदालत ने मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं, साक्ष्यों और पूर्व के कुछ मामलों का भी उल्लेख किया।

अदालत ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया कि केवल किसी शव को क्षत-विक्षत करना ही जघन्य अपराध की कसौटी नहीं है। अदालत ने मामले में रिश्तों, विश्वास और अपराध की परिस्थितियों को भी गंभीरता से देखा।

इस फैसले के बाद मामला एक बार फिर चर्चा में है, हालांकि मृत्युदंड की सजा के बाद भी कानूनी प्रक्रिया आगे जारी रह सकती है और दोषियों को उपलब्ध वैधानिक अपील के अधिकार के तहत ऊपरी अदालत का रुख करने का अवसर रहता है।