HSPCB के 169 करोड़ घोटाले में CBI का बड़ा एक्शन, सीनियर अकाउंट ऑफिसर गिरफ्तार

हरियाणा पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के 169 करोड़ रुपये के वित्तीय घोटाले में CBI ने सीनियर अकाउंट ऑफिसर प्रवीण कुमार को गिरफ्तार किया है। जांच में गुप्त बैंक खाते और फर्जी लेनदेन के आरोप सामने आए हैं।

HSPCB के 169 करोड़ घोटाले में CBI का बड़ा एक्शन, सीनियर अकाउंट ऑफिसर गिरफ्तार

CBI ने हरियाणा पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के सीनियर अकाउंट ऑफिसर को किया गिरफ्तार
बिना मंजूरी गुप्त बैंक खाता खुलवाकर करोड़ों के फर्जी लेनदेन का आरोप
169 करोड़ के घोटाले में तीसरी गिरफ्तारी, जांच का दायरा लगातार बढ़ा


हरियाणा के बहुचर्चित हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) से जुड़े 169 करोड़ रुपये के वित्तीय घोटाले में सीबीआई ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बोर्ड के सीनियर अकाउंट ऑफिसर प्रवीण कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि उन्होंने बोर्ड की अनुमति के बिना IDFC First Bank में गुप्त रूप से खाता खुलवाया, जिसका इस्तेमाल कथित तौर पर फर्जी वित्तीय लेनदेन के लिए किया गया।

CBI के अनुसार, यह खाता बोर्ड की मंजूरी के बिना खोला गया था। आरोप है कि इसी खाते के माध्यम से बोर्ड की रकम चेक और डेबिट नोट्स के जरिए निकालकर विभिन्न शेल कंपनियों में भेजी गई। जांच में यह भी सामने आया कि खाता प्रवीण कुमार के नाम पर था, लेकिन उसमें दूसरे आरोपी का मोबाइल नंबर दर्ज कराया गया था, ताकि संदिग्ध लेनदेन का आसानी से पता न चल सके।

इस मामले में यह तीसरी गिरफ्तारी है। इससे पहले 30 जून को बोर्ड के पूर्व सदस्य सचिव एवं वरिष्ठ IAS अधिकारी प्रदीप डागर को गिरफ्तार किया गया था। वहीं सबसे पहले डेटा एंट्री ऑपरेटर सौरभ शर्मा को गिरफ्तार किया गया था। सीबीआई का कहना है कि पूछताछ में जिन-जिन लोगों की भूमिका सामने आ रही है, उनके खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है।

जांच एजेंसी के मुताबिक यह मामला IDFC First Bank की सेक्टर-32 शाखा से जुड़े बड़े बैंक घोटाले का हिस्सा है। आरोप है कि हरियाणा सरकार के आठ विभागों के करीब 504 करोड़ रुपये फर्जी या अस्तित्वहीन फिक्स्ड डिपॉजिट और डेबिट नोट्स के जरिए निकालकर शेल कंपनियों में ट्रांसफर किए गए।

सीबीआई ने बताया कि अब तक इस पूरे मामले में 25 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि 17 आरोपियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। इनमें बैंक अधिकारियों, सरकारी कर्मचारियों, निजी कंपनियों और अन्य व्यक्तियों के नाम शामिल हैं।

इस बीच, पूर्व सदस्य सचिव प्रदीप डागर की दो दिन की सीबीआई रिमांड पूरी होने के बाद उन्हें अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। रिमांड के दौरान उन्होंने घबराहट और सीने में दर्द की शिकायत की थी, जिसके बाद उनका ईसीजी और अन्य मेडिकल परीक्षण कराया गया। सीबीआई ने अदालत को बताया कि हिरासत के दौरान उन्हें चिकित्सकीय सुविधा, दवाइयां, घर का भोजन तथा बेटे और वकील से मिलने की अनुमति दी गई थी।

सीबीआई ने अदालत में यह भी दावा किया कि पूछताछ के दौरान प्रदीप डागर ने जांच में अपेक्षित सहयोग नहीं किया और कई अहम जानकारियां छिपाईं। एजेंसी का आरोप है कि मामले से जुड़े महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य मोबाइल से मिटाए गए हैं। यदि आरोपियों को खुला छोड़ा गया तो वे अन्य लोगों को भी साक्ष्य नष्ट करने या जांच प्रभावित करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

पूछताछ के दौरान सीबीआई ने सरकारी धन के निवेश, बैंक खाते खोलने की प्रक्रिया, फर्जी लेनदेन, सह-आरोपियों से संबंध, बैठकों, कथित रिश्वत और प्रशासनिक फैसलों से जुड़े कई सवाल पूछे। सूत्रों के अनुसार, प्रदीप डागर ने पूछताछ में खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि उन्होंने तत्कालीन चेयरमैन के निर्देशों का पालन किया था। जांच अब अन्य अधिकारियों की भूमिका पर भी केंद्रित है।