नर्सिंग कॉलेज में यौन उत्पीड़न का बम: चेयरमैन पर बाथरूम तक घुसने के आरोप
हिसार के खुशी नर्सिंग कॉलेज में छात्राओं ने चेयरमैन पर यौन उत्पीड़न, रात में हॉस्टल में घुसने और धमकाने के गंभीर आरोप लगाए। महिला आयोग ने जांच शुरू की है।
-
नर्सिंग कॉलेज चेयरमैन पर छात्राओं ने यौन उत्पीड़न और धमकी के गंभीर आरोप लगाए
-
बाथरूम तक घुसने, शराब के नशे में हॉस्टल आने और गालियां देने तक के आरोप
-
महिला आयोग चेयरपर्सन ने सभी छात्राओं, पेरेंट्स व प्रबंधन को तलब कर जांच शुरू की
हिसार जिले के नारनौंद क्षेत्र स्थित खुशी नर्सिंग कॉलेज कागसर में छात्राओं ने कॉलेज चेयरमैन पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों से पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। छात्राओं ने खुलकर कहा कि चेयरमैन उन पर लंबे समय से दबाव बना रहा है और कई बार हॉस्टल के बाथरूम तक में घुस जाता है, जिससे उनका मानसिक उत्पीड़न हो रहा है।
आज महिला आयोग की चेयरपर्सन रेनू भाटिया ने सभी छात्राओं को हिसार लघु सचिवालय बुलाया। इसके साथ उनके पेरेंट्स, कॉलेज का पूरा प्रबंधन और चेयरमैन जगदीश गोस्वामी को भी बुलाया गया।
छात्राओं ने आयोग के सामने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि चेयरमैन उन लड़कियों का खास ख्याल रखता है जो उसकी बात मान लेती हैं। उनका सरेआम बर्थडे मनाया जाता है, जबकि विरोध करने वाली लड़कियों को नाजायज तरीकों से परेशान किया जाता है। हॉस्टल का माहौल ऐसा बनाया जाता है कि छात्राएं लगातार दहशत में जीती हैं।
मीटिंग के दौरान रेनू भाटिया ने मीडिया को बाहर कर दिया। अंदर सिर्फ छात्राएं, परिजन और कॉलेज प्रशासन को रखा गया। इसी दौरान कॉलेज संचालक बार-बार अपनी बात रखने की कोशिश करता रहा, लेकिन छात्राओं की शिकायतें इतनी गंभीर थीं कि आयोग की चेयरपर्सन ने उसे बीच में बोलने से रोक दिया और शिकायतें सुनने पर जोर दिया।
छात्राओं ने बताया कि कॉलेज की सुरक्षा व्यवस्था बेहद खराब है। कई छात्राओं ने यह भी दावा किया कि चेयरमैन रात में शराब पीकर हॉस्टल पहुंच जाता है। उसकी पत्नी उन पर अशोभनीय भाषा का इस्तेमाल करती है। हॉस्टल में न साफ पानी है, न साफ-सफाई और न ही खाने की उचित व्यवस्था।
कई छात्राएं रो पड़ीं और बोलीं कि बीमार होने के बावजूद उन्हें अस्पताल ले जाने की अनुमति नहीं दी जाती। क्लासेज का हाल भी बेहाल है। पूरे कॉलेज में सिर्फ दो अध्यापिकाएं हैं। तीसरे-चौथे वर्ष की छात्राओं से पहले-दूसरे वर्ष की क्लास चलवाई जाती हैं। यहां तक कि निरीक्षण टीम आने पर भी छात्राओं से काम करवाया जाता है ताकि कॉलेज की खामियां बाहर न आ सकें।
छात्राओं ने शिकायत की कि कॉलेज में दूध या पानी गर्म करने के भी 10 रुपये वसूले जाते हैं। फीस और जुर्माना वसूली के नाम पर लगातार मानसिक प्रताड़ना दी जाती है।
सबसे गंभीर आरोप हॉस्टल के बाथरूमों को लेकर लगा। छात्राओं ने कहा कि यहां नल नहीं हैं, दरवाजों में कुंडी तक नहीं। दीवारों पर चल रहे रंग-रोगन का काम सीधे बाथरूम तक दिखता है, जिससे छात्राओं की गोपनीयता से खेलने की शिकायतें सामने आई हैं।
वहीं कॉलेज चेयरमैन जगदीश गोस्वामी ने सभी आरोपों को झूठा बताते हुए कहा कि वह पिछले 25 सालों से कॉलेज चला रहे हैं और उन पर कभी कोई दाग नहीं लगा। उन्होंने कहा कि असली दिक्कत तब से हुई जब उन्होंने कॉलेज में कड़े नियम लागू किए, जैसे सुबह 6 बजे योग, पर्सनल पार्सल पर रोक, हॉस्टल अनुशासन और इवनिंग एक्स्ट्रा क्लास। उनका दावा है कि छात्राएं सख्ती से परेशान होकर आरोप लगा रही हैं।
अब महिला आयोग पूरे मामले की गहराई से जांच कर रहा है। शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए यह मामला बड़े स्तर पर कार्रवाई की ओर बढ़ सकता है। जिले में यह चर्चा का सबसे बड़ा मुद्दा बन चुका है।
Author1