हरियाणा के स्कूलों में अब नॉट वाली टाई नहीं होगी अनिवार्य, बाल आयोग ने जारी की एडवाइजरी
हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए सरकारी और निजी स्कूलों में पारंपरिक नॉट वाली टाई की अनिवार्यता खत्म करने की एडवाइजरी जारी की है। सुरक्षित विकल्प अपनाने की सलाह दी गई है।
➤ सरकारी और निजी स्कूलों में पारंपरिक नॉट वाली टाई की अनिवार्यता खत्म करने की एडवाइजरी
➤ भिवानी में 7 वर्षीय बच्चे की दुर्घटना के बाद बाल सुरक्षा को लेकर उठाया गया कदम
➤ आई-कार्ड से अटैच या आसानी से अलग होने वाली सुरक्षित टाई अपनाने का विकल्प
भिवानी। हरियाणा के स्कूलों में बच्चों की यूनिफॉर्म से पारंपरिक नॉट वाली टाई की अनिवार्यता खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (HSCPCR) ने बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एडवाइजरी जारी कर सरकारी और निजी स्कूलों में ऐसी टाई को अनिवार्य नहीं रखने को कहा है। आयोग ने इस संबंध में शिक्षा विभाग और हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड को पत्र भेजा है। यह कदम भिवानी जिले के गांव फूलपुरा में 7 वर्षीय बच्चे के साथ हुई एक दुखद दुर्घटना के बाद उठाया गया है। आयोग का कहना है कि पारंपरिक टाई के बजाय ऐसे सुरक्षित विकल्प अपनाए जाने चाहिए, जो किसी वस्तु में फंसने या खिंचाव की स्थिति में आसानी से अलग हो सकें।
भिवानी की घटना के बाद बच्चों की सुरक्षा पर बढ़ी चिंता
भिवानी के गांव फूलपुरा में 2 जुलाई को 7 वर्षीय बच्चे के साथ हुई दुर्घटना ने स्कूल यूनिफॉर्म में इस्तेमाल होने वाली पारंपरिक टाई की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे।
बताया गया कि घर में बड़े भाई की स्कूल टाई खूंटी पर टंगी थी। बच्चा खेलते समय उसे पहनने की कोशिश कर रहा था और इसी दौरान दुर्घटना हो गई। इस घटना के बाद बच्चों के लिए नॉट वाली टाई से जुड़े संभावित जोखिम को लेकर चर्चा तेज हुई।
सभी सरकारी और निजी स्कूलों के लिए एडवाइजरी
बाल आयोग ने स्कूलों से कहा है कि बच्चों के लिए पारंपरिक नॉट वाली टाई की अनिवार्यता समाप्त की जाए। यह एडवाइजरी प्रदेश के सरकारी और निजी दोनों तरह के स्कूलों को ध्यान में रखकर जारी की गई है।
आयोग ने शिक्षा विभाग और भिवानी बोर्ड को भी इस संबंध में पत्र भेजा है, ताकि स्कूल यूनिफॉर्म से जुड़े नियमों में बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा सके।
सुरक्षित टाई के विकल्प अपनाने की सलाह
आयोग की चेयरपर्सन तृप्ति श्योराण के अनुसार, पारंपरिक टाई के स्थान पर बच्चों के लिए अधिक सुरक्षित विकल्प अपनाए जा सकते हैं। इनमें आई-कार्ड से अटैच होने वाली टाई या ऐसी टाई शामिल हो सकती है, जो खिंचाव पड़ने पर आसानी से अलग हो जाए।
इसका उद्देश्य स्कूल यूनिफॉर्म की पहचान बनाए रखते हुए बच्चों की सुरक्षा से जुड़े संभावित जोखिम को कम करना है।
आयोग ने अन्य घटनाओं का भी लिया संज्ञान
आयोग के अनुसार, देश के अलग-अलग हिस्सों में ऐसी दुर्घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें बच्चों की टाई झूले, हुक, गेट या अन्य वस्तुओं में फंस गई। आयोग का मानना है कि ऐसी घटनाएं दुर्घटनावश होती हैं, लेकिन उचित सुरक्षा उपाय अपनाकर इनके जोखिम को कम किया जा सकता है।
इसी को ध्यान में रखते हुए आयोग ने बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम, 2005 की धारा-13 के तहत अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए एडवाइजरी जारी की है।
स्कूल यूनिफॉर्म में सुरक्षा को प्राथमिकता देने पर जोर
बाल आयोग की इस पहल के बाद अब स्कूल यूनिफॉर्म से जुड़े नियमों में बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की चर्चा बढ़ सकती है। विशेष रूप से छोटे बच्चों के लिए ऐसी वस्तुओं के इस्तेमाल पर पुनर्विचार की जरूरत बताई गई है, जिनके किसी जगह फंसने से दुर्घटना का खतरा पैदा हो सकता है।
अब निगाहें शिक्षा विभाग और संबंधित स्कूलों की ओर से इस एडवाइजरी के आधार पर उठाए जाने वाले कदमों पर रहेंगी।
Akhil Mahajan