हरियाणा में बिजली निजीकरण की तैयारी पर बढ़ा विरोध, ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने भी जताई आपत्ति: गुरुग्राम-नूंह पर एक्सपर्ट कमेटी, 15 दिन में रिपोर्ट

हरियाणा में गुरुग्राम और नूंह में समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस के प्रस्ताव पर विरोध तेज हो गया है। ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने भी आपत्ति जताई है। HERC की तीन सदस्यीय एक्सपर्ट कमेटी 15 दिन में रिपोर्ट सौंपेगी।

हरियाणा में बिजली निजीकरण की तैयारी पर बढ़ा विरोध, ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने भी जताई आपत्ति: गुरुग्राम-नूंह पर एक्सपर्ट कमेटी, 15 दिन में रिपोर्ट

गुरुग्राम और नूंह में समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस के प्रस्ताव पर तेज हुआ विरोध
ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा- कर्मचारियों और उपभोक्ताओं के हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए
HERC की तीन सदस्यीय एक्सपर्ट कमेटी 15 दिन में देगी रिपोर्ट, उसके बाद होगा फैसला


हरियाणा में बिजली वितरण व्यवस्था में निजी कंपनी की एंट्री से जुड़े प्रस्ताव पर विवाद तेज हो गया है। गुरुग्राम और नूंह में एक निजी कंपनी की ओर से समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस मांगे जाने के मामले में अब कर्मचारी संगठनों और राजनीतिक दलों के साथ प्रदेश के ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने भी आपत्ति जताई है। दूसरी ओर, दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) ने भी हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग की जनसुनवाई में प्रस्ताव के खिलाफ अपना पक्ष रखा है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) ने तीन सदस्यीय स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित की है, जो 13 जुलाई से काम शुरू कर 15 दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। इसके बाद आयोग समानांतर वितरण लाइसेंस से जुड़े आवेदन पर अंतिम फैसला करेगा।

गुरुग्राम-नूंह से शुरू हो सकती है नई बिजली वितरण व्यवस्था

सूत्रों के अनुसार, फिलहाल गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने के प्रस्ताव पर विचार चल रहा है। हालांकि सरकार की ओर से बिजली वितरण व्यवस्था को सीधे निजी कंपनी को सौंपने या अन्य जिलों में इसे लागू करने को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

चर्चा यह भी है कि यदि गुरुग्राम और नूंह में प्रस्तावित मॉडल लागू होता है तो भविष्य में पंचकूला और फरीदाबाद जैसे जिलों में भी इसी तरह की व्यवस्था पर विचार हो सकता है। कर्मचारी संगठन इसी आशंका को लेकर विरोध कर रहे हैं।

कर्मचारियों के भविष्य को लेकर सबसे बड़ा सवाल

विरोध करने वाले संगठनों का प्रमुख सवाल बिजली निगमों में कार्यरत नियमित और अनुबंधित कर्मचारियों के भविष्य को लेकर है। उनका कहना है कि नई व्यवस्था लागू होने की स्थिति में कर्मचारियों के समायोजन, सेवा सुरक्षा और कार्यक्षेत्र को लेकर स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।

कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि बिजली वितरण जैसी आवश्यक सार्वजनिक सेवा में किसी भी बड़े बदलाव से पहले कर्मचारियों और उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले प्रभाव का व्यापक अध्ययन जरूरी है।

गुरुग्राम-नूंह के राजस्व को लेकर भी उठे सवाल

DHBVN और बिजली क्षेत्र से जुड़े संगठनों की ओर से गुरुग्राम और नूंह के राजस्व महत्व को भी प्रमुखता से उठाया गया है। दावा किया गया है कि इन क्षेत्रों से बिजली निगम को बड़ी मात्रा में राजस्व प्राप्त होता है।

हरियाणा पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन ने आयोग के सामने कंपनी की वित्तीय और तकनीकी क्षमता को लेकर भी सवाल उठाए हैं। एसोसिएशन का दावा है कि आवेदनकर्ता कंपनी अपेक्षाकृत नई है और उसकी चुकता पूंजी करीब एक करोड़ रुपए है, जबकि गुरुग्राम और नूंह से बिजली राजस्व का स्तर इससे कहीं अधिक है।

अनिल विज ने कहा- आवश्यक सेवा में जल्दबाजी ठीक नहीं

प्रदेश के ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने भी इस मामले में अपनी आपत्ति सार्वजनिक रूप से जाहिर की है। उनका कहना है कि बिजली जैसी आवश्यक सेवा से जुड़े किसी भी फैसले में जल्दबाजी नहीं होनी चाहिए।

विज के मुताबिक, कर्मचारियों और उपभोक्ताओं के हित सर्वोपरि होने चाहिए और कोई भी निर्णय लेने से पहले सभी पक्षों की राय तथा संभावित प्रभावों का अध्ययन किया जाना जरूरी है। उन्होंने सरकार से सभी पहलुओं पर विचार करने की बात कही है।

HERC ने तीन सदस्यीय स्वतंत्र कमेटी बनाई

मामले पर फिलहाल कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। HERC ने प्रस्ताव की विस्तृत जांच के लिए तीन सदस्यीय स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित की है।

समिति की अध्यक्षता सेवानिवृत्त IAS अधिकारी आलोक निगम करेंगे। उनके साथ बिजली क्षेत्र के विशेषज्ञ ई. रविंदर कुमार शर्मा और वित्त विशेषज्ञ बिभू प्रसाद महापात्र को सदस्य बनाया गया है।

समिति 13 जुलाई से अपना काम शुरू करेगी और 15 दिन के भीतर आयोग को रिपोर्ट सौंपेगी। रिपोर्ट के आधार पर आयोग आगे का निर्णय करेगा।

वित्तीय से लेकर कानूनी पहलुओं तक होगी जांच

एक्सपर्ट कमेटी यह जांच करेगी कि एलवन पावर प्राइवेट लिमिटेड बिजली अधिनियम और HERC के नियमों के तहत समानांतर वितरण लाइसेंस हासिल करने की पात्रता रखती है या नहीं।

इसके साथ ही कंपनी की वित्तीय क्षमता, तकनीकी तैयारी, निवेश योजना, उपभोक्ता हित, बिजली दरों पर संभावित असर, क्रॉस-सब्सिडी, बिजली आपूर्ति व्यवस्था और सार्वजनिक हित जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं का भी मूल्यांकन किया जाएगा।

आयोग का मानना है कि बिजली क्षेत्र पर पड़ने वाले दीर्घकालिक प्रभावों को देखते हुए स्वतंत्र और विशेषज्ञ समीक्षा जरूरी है।

कंपनी को 30 लाख रुपए जमा कराने के निर्देश

HERC ने याचिकाकर्ता कंपनी को विशेषज्ञ समिति के खर्च के लिए 30 लाख रुपए अग्रिम जमा कराने के निर्देश दिए हैं। समिति का खर्च शुरुआती तौर पर आयोग वहन करेगा, जिसकी बाद में कंपनी से भरपाई की जाएगी।

इसके अलावा संबंधित कंपनी और दोनों बिजली निगमों को एक-एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि समिति को आवश्यक जानकारी और दस्तावेज उपलब्ध कराए जा सकें।

8 जुलाई की जनसुनवाई में आमने-सामने आए पक्ष

इससे पहले 8 जुलाई को हुई जनसुनवाई में निजी कंपनी, बिजली निगमों, कर्मचारी संगठनों, किसान संगठनों, उपभोक्ता प्रतिनिधियों और अन्य पक्षों ने अपनी दलीलें रखी थीं। सुनवाई पूरी होने के बाद आयोग ने मामला विचाराधीन रखा और अब विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट लेने का फैसला किया है।

प्रस्ताव का विरोध करने वाले पक्षों का कहना है कि समानांतर वितरण लाइसेंस से सार्वजनिक बिजली व्यवस्था पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है। वहीं प्रस्ताव का समर्थन करने वाले कुछ उद्योग, आरडब्ल्यूए और उपभोक्ता संगठन इसे बिजली वितरण क्षेत्र में विकल्प और प्रतिस्पर्धा बढ़ाने से जोड़कर देख रहे हैं।

इनेलो ने भी किया विरोध

पूर्व वित्त मंत्री और इनेलो नेता संपत सिंह ने भी जनसुनवाई के दौरान प्रस्ताव का विरोध किया। उनका कहना है कि बिजली जैसी आवश्यक सेवा की सार्वजनिक व्यवस्था को कमजोर नहीं किया जाना चाहिए।

कर्मचारी संगठनों ने भी साफ किया है कि वे इस प्रस्ताव का विरोध जारी रखेंगे। इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया, ऑल हरियाणा पावर कॉरपोरेशन वर्कर यूनियन, हरियाणा पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन, ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन, एचएसईबी वर्कर्स यूनियन और किसान संगठनों से जुड़े प्रतिनिधियों ने जनसुनवाई में अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं।

अब एक्सपर्ट कमेटी की रिपोर्ट पर टिकी नजर

इस पूरे मामले में अब सबसे महत्वपूर्ण भूमिका तीन सदस्यीय एक्सपर्ट कमेटी की रिपोर्ट की होगी। समिति कंपनी की पात्रता और क्षमता के साथ उपभोक्ताओं, कर्मचारियों और मौजूदा बिजली वितरण व्यवस्था पर संभावित प्रभावों की समीक्षा करेगी।

रिपोर्ट मिलने के बाद HERC यह तय करेगा कि गुरुग्राम और नूंह में समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस के आवेदन पर आगे क्या निर्णय लिया जाए। ऐसे में अगले 15 दिन इस मामले के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।