Haryana Congress: हमारे 4-5 MLA भाग गए, बाकी भी नहीं संभल रहे: गोकुल सेतिया
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➤ गोकुल सेतिया ने कांग्रेस की बैठक में मंच पर नेताओं की बैठने की व्यवस्था पर उठाए सवाल
➤ दावा- देवेंद्र हंस और विकास सहारण के साथ पीछे लगी नेम स्लिप फाड़कर आगे जाकर बैठे
➤ अशोक तंवर और बृजेंद्र सिंह का नाम लिए बिना साधा निशाना, पार्टी नेतृत्व को भी दी नसीहत
हरियाणा कांग्रेस में नए प्रदेश प्रभारी संजय दत्त की पहली बैठक के बाद अंदरूनी विवाद सामने आ गया है। सिरसा से कांग्रेस विधायक गोकुल सेतिया ने 8 जुलाई को चंडीगढ़ स्थित प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में हुई बैठक के दौरान मंच पर नेताओं की बैठने की व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं। शनिवार को सिरसा में मीडिया से बातचीत के दौरान सेतिया ने आरोप लगाया कि जिन लोगों ने पहले पार्टी को नुकसान पहुंचाया, उन्हें मंच पर आगे जगह दी जा रही है, जबकि मौजूदा विधायकों को पीछे बैठाने की व्यवस्था की गई थी। उन्होंने दावा किया कि उनके साथ विधायक देवेंद्र हंस और विकास सहारण के नाम की पर्चियां पीछे लगी थीं, जिन्हें फाड़कर वे आगे जाकर बैठ गए। इसी दौरान सेतिया ने पार्टी की मौजूदा स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के 37 विधायक जीते थे, लेकिन राज्यसभा चुनाव के बाद चार-पांच विधायक चले गए और जब बाकी विधायकों को ही नहीं संभाला जा रहा तो संगठन कैसे संभलेगा।
मंच पर बैठने की व्यवस्था से शुरू हुआ विवाद
गोकुल सेतिया के मुताबिक, नए प्रभारी की बैठक में मंच पर बैठने की व्यवस्था को लेकर उन्हें आपत्ति थी। उन्होंने दावा किया कि मंच की पहली पंक्ति में पांच कुर्सियां थीं, जबकि पीछे कॉर्नर में रखी गई कुर्सियों पर उनका और विधायक देवेंद्र हंस का नाम लिखा गया था।
सेतिया ने कहा कि इसके बाद भी अन्य विधायकों के लिए अलग पंक्तियां थीं, जबकि आगे की तरफ पार्टी के पदाधिकारियों और हाल में जिम्मेदारी पाने वाले कुछ नेताओं को जगह दी गई थी। उन्होंने इस व्यवस्था को लेकर बैठक के दौरान ही अपनी नाराजगी जाहिर की।
नेम स्लिप फाड़ी और आगे जाकर बैठ गए
सेतिया ने दावा किया कि पीछे लगी कुर्सियों पर उनके साथ अन्य विधायकों के नाम की पर्चियां थीं। उन्होंने कहा कि इन नेम स्लिप को फाड़कर वे आगे जाकर बैठ गए।
उनका कहना था कि निर्वाचित विधायकों को मंच पर उचित स्थान मिलना चाहिए। उन्होंने इसे केवल व्यक्तिगत सम्मान का मुद्दा नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर प्राथमिकता और संदेश से जुड़ा सवाल बताया।
बिना नाम लिए अशोक तंवर पर साधा निशाना
गोकुल सेतिया ने किसी का नाम लिए बिना कुछ ऐसे नेताओं पर निशाना साधा, जो अलग-अलग राजनीतिक दलों में रहने के बाद कांग्रेस में लौटे हैं। उनके बयान को पूर्व सांसद अशोक तंवर से जोड़कर देखा जा रहा है।
सेतिया ने कहा कि कुछ लोग समय से पहले आकर आगे की कुर्सियों पर बैठ गए और बाद में उन्हें माइक भी दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि जिन लोगों पर पहले पार्टी को कमजोर करने के आरोप लगते रहे हैं, वे अब पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं को अनुशासन का पाठ कैसे पढ़ा सकते हैं।
बोले- कभी इधर गए, कभी उधर और फिर कांग्रेस में लौट आए
सेतिया ने कहा कि कुछ नेता पहले कांग्रेस छोड़कर दूसरे दलों में गए और बाद में वापस कांग्रेस में लौट आए। उन्होंने TMC, BSP और BJP का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे राजनीतिक सफर वाले लोगों को पार्टी में आगे बैठाकर क्या संदेश दिया जा रहा है।
उन्होंने दावा किया कि सिरसा में कांग्रेस को कमजोर करने में कुछ नेताओं की भूमिका रही थी। सेतिया ने कहा कि यदि शुरुआत में ही गलत व्यवस्था दिखाई देगी तो उसके खिलाफ आवाज उठाना वह पार्टी हित में मानते हैं।
‘37 विधायक जीते थे, 4-5 चले गए’
गोकुल सेतिया ने पार्टी नेतृत्व और संगठन की स्थिति पर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के 37 विधायक जीतकर आए थे, लेकिन राज्यसभा चुनाव के बाद चार-पांच विधायक चले गए।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब पार्टी अपने मौजूदा विधायकों को ही एकजुट नहीं रख पा रही तो संगठन को कैसे मजबूत किया जाएगा। सेतिया का यह बयान हरियाणा कांग्रेस के भीतर चल रही खींचतान के बीच राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।
पार्टी को कमजोर करने वालों को आगे बैठाने पर सवाल
सेतिया ने आरोप लगाया कि जिन नेताओं ने पहले पार्टी को कमजोर किया, उन्हें मंच पर प्रमुखता दी जा रही है। उन्होंने सिरसा के पुराने कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं के साथ कथित व्यवहार का मुद्दा भी उठाया।
उन्होंने भरत सिंह बैनीवाल, रणजीत सिंह, डॉ. केवी सिंह और शीशपाल केहरवाला का उल्लेख करते हुए कहा कि पार्टी को यह देखना चाहिए कि स्थानीय स्तर पर नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच संबंध कैसे रहे हैं।
सेतिया ने सवाल किया कि ऐसे नेताओं को आगे बैठाकर पार्टी आखिर क्या संदेश देना चाहती है। उन्होंने कहा कि यह बात उन्होंने बैठक के अंदर भी स्पष्ट रूप से रखी थी।
बृजेंद्र सिंह पर भी बिना नाम लिए निशाना
गोकुल सेतिया ने बिना नाम लिए पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह पर भी निशाना साधा। उन्होंने कुछ नेताओं की पिछली राजनीतिक भूमिका का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि अब वही लोग पार्टी को चलाने की सीख दे रहे हैं।
सेतिया ने कहा कि उन्हें कांग्रेस में अपनी बात रखने में कोई दिक्कत नहीं है। वह पार्टी के भीतर अपनी बात खुलकर रखते रहेंगे। पार्टी उनकी बात पर कार्रवाई करे या न करे, वह अपना राजनीतिक काम जारी रखेंगे।
नए प्रभारी की पहली बैठक में दिखी अंदरूनी खींचतान
हरियाणा कांग्रेस के नए प्रभारी संजय दत्त की पहली बैठक को संगठन में समन्वय और आगामी रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा था। हालांकि बैठक के बाद मंच पर बैठने की व्यवस्था को लेकर उठे सवालों ने पार्टी की अंदरूनी राजनीति को फिर चर्चा में ला दिया है।
बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला, प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे।
हुड्डा-सुरजेवाला के बीच हुआ हल्का-फुल्का संवाद
बैठक शुरू होने से पहले भूपेंद्र सिंह हुड्डा और रणदीप सिंह सुरजेवाला के बीच हल्का-फुल्का संवाद भी चर्चा में रहा। हुड्डा ने मुस्कुराते हुए सुरजेवाला से साथ देने की बात कही, जिस पर सुरजेवाला ने भी मजाकिया अंदाज में जवाब दिया।
एक तरफ वरिष्ठ नेताओं के बीच यह हल्का-फुल्का संवाद देखने को मिला, वहीं दूसरी तरफ बैठक में बैठने की व्यवस्था को लेकर गोकुल सेतिया की नाराजगी ने पार्टी के भीतर नए विवाद को जन्म दे दिया है।
अब पार्टी नेतृत्व के रुख पर नजर
गोकुल सेतिया के सार्वजनिक बयान के बाद अब निगाहें हरियाणा कांग्रेस नेतृत्व के रुख पर हैं। नए प्रभारी की पहली बैठक के तुरंत बाद सामने आया यह विवाद पार्टी के भीतर नेताओं की प्राथमिकता, सम्मान और संगठनात्मक संतुलन से जुड़े सवाल खड़े कर रहा है।
सेतिया ने साफ किया है कि वह अपनी बात पार्टी के भीतर और सार्वजनिक रूप से रखने से पीछे नहीं हटेंगे। अब देखना होगा कि कांग्रेस नेतृत्व इस नाराजगी को किस तरह संभालता है और संगठन में एकजुटता बनाए रखने के लिए क्या कदम उठाता है।
Akhil Mahajan