हरियाणा सरकार की बड़ी कवायद! परिवार पहचान पत्र में भूमि और टैक्स डाटा जुड़ेगा
हरियाणा सरकार ने परिवार पहचान पत्र को और प्रभावी बनाने के लिए भूमि स्वामित्व और सीबीडीटी का टैक्स डेटा जोड़ने का फैसला किया है, ताकि योजनाओं का लाभ केवल वास्तविक पात्रों तक पहुंचे और पारदर्शिता बढ़े।
➤ हरियाणा सरकार ने परिवार पहचान पत्र में भूमि और टैक्स डाटा जोड़ने का फैसला
➤ सीबीडीटी और भूमि रिकॉर्ड से जुड़ेगा परिवार पहचान पत्र
➤ पारदर्शिता और सटीक लाभ वितरण पर जोर
हरियाणा सरकार ने परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) योजना को और व्यापक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। अब तक यह पहचान पत्र मुख्य रूप से आधार और लाभार्थियों के एक बैंक खाते से जुड़ा हुआ था, लेकिन राज्य सरकार ने इसका दायरा बढ़ाने की घोषणा की है। जल्द ही इसमें भूमि स्वामित्व रिकॉर्ड और केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) का महत्वपूर्ण डेटा जोड़ा जाएगा। इसमें आयकर रिटर्न, बैंक खातों, स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) और अन्य वित्तीय लेनदेन की जानकारी शामिल होगी।
इस एकीकरण से सरकार को परिवारों की वास्तविक आर्थिक स्थिति की स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी। अधिकारी अब किसी भी परिवार के पास मौजूद बैंक खातों, आय स्रोत और संपत्ति की पूरी जानकारी देख पाएंगे। इससे सुनिश्चित किया जा सकेगा कि सरकारी सहायता योजनाएं उन्हीं जरूरतमंदों तक पहुंचें, जो वास्तव में इसके पात्र हैं।
इसकी पुष्टि करते हुए पीपीपी कार्यक्रम के राज्य समन्वयक सतीश खोला ने बताया कि योजना की उच्च स्तर पर समीक्षा पूरी कर ली गई है। उनके अनुसार, हरियाणा में अब तक 76 लाख से ज्यादा परिवार पहचान पत्र जारी किए जा चुके हैं, जिनमें से 40 लाख से अधिक बीपीएल श्रेणी में आते हैं। खोला ने कहा कि भूमि अभिलेखों और सीबीडीटी डेटा को पीपीपी से जोड़ना कल्याणकारी योजनाओं के वितरण में पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सुधार है।
अभी तक पात्रता और आय का निर्धारण सीमित दस्तावेजों—आय प्रमाण पत्र, आधार कार्ड और कुछ अन्य कागजों के आधार पर किया जाता रहा है। इससे अक्सर गलत आकलन की संभावना बनी रहती थी। लेकिन सरकार का मानना है कि जब डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय डेटा सीधे एकीकृत होंगे तो धोखाधड़ी की संभावनाएं घटेंगी और सही लाभार्थियों की पहचान हो सकेगी।
इसके अलावा, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि दूसरे चरण में इस व्यवस्था को और आधुनिक बनाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित प्रणालियों का सहारा लिया जाएगा। इन प्रणालियों से डेटा का मिलान स्वतः होगा और गलत जानकारी देने वालों का तुरंत पता चल सकेगा। अधिकारी मानते हैं कि यह कदम न केवल लाभ वितरण को सरल बनाएगा, बल्कि सरकारी योजनाओं में जनता का विश्वास और पारदर्शिता भी बढ़ाएगा।
Akhil Mahajan