हरियाणा पुलिस इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च होंगे ₹750 करोड़

हरियाणा पुलिस इंफ्रास्ट्रक्चर पर अगले दो साल में ₹750 करोड़ खर्च किए जाएंगे। जून से ATS शुरू होगा और दुष्यंत विवाद पर DGP अजय सिंघल ने बयान दिया।

हरियाणा पुलिस इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च होंगे ₹750 करोड़

हरियाणा पुलिस इंफ्रास्ट्रक्चर पर 2 साल में खर्च होंगे ₹750 करोड़

जून से शुरू होगा ATS, आईजीपी स्तर का अधिकारी करेगा नेतृत्व

दुष्यंत विवाद पर DGP बोले- अब पुराना हो चुका किस्सा


हरियाणा पुलिस के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार अगले दो वर्षों में करीब 750 करोड़ रुपए खर्च करेगी। यह जानकारी हरियाणा के डीजीपी अजय सिंघल ने मंगलवार को पंचकूला स्थित पुलिस मुख्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान दी।

डीजीपी ने बताया कि इस बजट के तहत राज्य के विभिन्न जिलों में पुलिस लाइन, पुलिस पोस्ट, पुलिस बूथ, थानों और चौकियों का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा पुलिस विभाग की अन्य बुनियादी सुविधाओं को भी मजबूत किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सैनी ने पुलिस इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए विशेष बजट का प्रावधान किया है। सरकार का उद्देश्य कानून व्यवस्था को और मजबूत करना तथा अपराध नियंत्रण के लिए आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

प्रेसवार्ता के दौरान डीजीपी अजय सिंघल ने हरियाणा में एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) के गठन को लेकर भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जून माह से ATS का संचालन शुरू हो जाएगा। फिलहाल इसमें एक छोटी तकनीकी आपत्ति है, जिसे जल्द दूर कर लिया जाएगा।

डीजीपी के अनुसार ATS का नेतृत्व आईजीपी स्तर का आईपीएस अधिकारी करेगा। इसके अलावा चार आईपीएस अधिकारियों को एसपी स्तर की जिम्मेदारी दी जाएगी, ताकि आतंकवाद और संगठित अपराध से प्रभावी तरीके से निपटा जा सके।

वहीं, दुष्यंत चौटाला और हिसार पुलिस विवाद को लेकर पूछे गए सवाल पर डीजीपी ने कहा कि यह मामला अब पुराना हो चुका है। जांच रिपोर्ट कोर्ट में जमा कर दी गई है और अदालत के फैसले के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

दुष्यंत चौटाला का नंबर ब्लॉक किए जाने के मुद्दे पर डीजीपी ने कहा कि वह इस विषय में संबंधित पक्ष को पहले ही स्थिति स्पष्ट कर चुके हैं और इसे सार्वजनिक नहीं करना चाहते।

एनसीआरबी डेटा को लेकर उठ रहे सवालों पर भी डीजीपी ने सफाई दी। उन्होंने कहा कि हरियाणा में क्राइम रेट ज्यादा दिखने का एक कारण बिजली चोरी और मिसिंग पर्सन मामलों में एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया है।

डीजीपी ने बताया कि हरियाणा में हर साल करीब 40 हजार बिजली चोरी के मामले दर्ज होते हैं, जबकि कई राज्यों में ऐसे मामलों में एफआईआर दर्ज नहीं की जाती। इसके अलावा राज्य में गुमशुदगी के मामलों में भी सीधे एफआईआर दर्ज की जाती है, जबकि अन्य राज्यों में केवल डीडीआर दर्ज होती है।

उन्होंने कहा कि हरियाणा पुलिस पारदर्शिता के साथ हर शिकायत दर्ज करती है। जांच के दौरान हर साल करीब 30 हजार मामलों में समझौता या शिकायत झूठी पाए जाने जैसी स्थिति सामने आती है।