हरियाणा में भ्रष्ट पटवारियों की सूची विवाद में तीन अधिकारी चार्जशीट, अखबारों को नोटिस जारी करने के निर्देश
हरियाणा में भ्रष्ट पटवारियों की सूची प्रकाशित होने के विवाद में तीन अधिकारियों को चार्जशीट किया गया है। हाईकोर्ट ने सूचना प्रकाशित करने वाले समाचार पत्रों को नोटिस जारी करने का आदेश दिया है; नोटिस कल से दिए जाएंगे और मामले की जांच जारी है।
➤ तीन अधिकारी चार्जशीट हुए
➤ हाईकोर्ट ने समाचार पत्रों को नोटिस जारी करने का आदेश
➤ नोटिस कल से जारी होंगे और जांच जारी है
हरियाणा में भ्रष्ट पटवारियों की सूची जारी करने के मामले ने अब बड़ा मोड़ ले लिया है। इस मामले में सरकार ने हाईकोर्ट को जानकारी दी है कि तीन अधिकारियों को चार्जशीट किया गया है। वहीं याचियों की ओर से मांग की गई थी कि सूची प्रकाशित करने वाले समाचार पत्रों पर भी कार्रवाई की जाए—हाईकोर्ट ने इसी अनुरोध पर समाचार पत्रों को नोटिस जारी करने का आदेश दे दिया है और यह नोटिस कल से जारी किए जाएंगे।
सूत्रों के मुताबिक़, यह सूची प्रशासनिक रिकॉर्डों और शिकायतों के आधार पर तैयार की गई थी और इसमें उन पटवारियों के नाम शामिल थे जिन पर भ्रष्टाचार, भूमि से जुड़ी अनियमितताएँ और जनता के अधिकारों से खिलवाड़ के गंभीर आरोप थे। सूची प्रकाशित होते ही कई स्थानीय लोगों और प्रभावित पटवारियों ने इसे निजी अतिशयोक्ति तथा मानहानि करार दिया और न्यायालय की शरण ली।
सरकार ने हाईकोर्ट में यह भी कहा कि आरोपों की स्वतंत्र जांच और दोषियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है, इसलिए सार्वजनिक आरोप-प्रचार से पहले जांच का नियम और संवैधानिक प्रक्रिया का पालन आवश्यक है। गृहमंत्रालय और स्थानीय प्रशासन की ओर से यह भी बताया गया कि चार्जशीट करने की प्रक्रिया में सबूत, सोमवार दर्ज व्यवहारिक दस्तावेज और जाँच समितियों की रिपोर्ट को शामिल किया गया है।
वहीं मीडिया पर नोटिस जारी करने के हाईकोर्ट के निर्देश ने प्रेस और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा धर्म-निरपेक्ष प्रशासनिक कार्यवाही के बीच संवेदनशील संतुलन पर बहस छेड़ दी है। पत्रकार संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि नोटिस का दुरुपयोग कर किसी प्रकार का दमन-जन्य दबाव बनाया गया तो वह प्रेस की आज़ादी के लिए चिंताजनक संकेत होगा; वहीं कुछ कार्यकर्ताओं और पीड़ित समूहों का कहना है कि सूचानाओं का सार्वजनिक होना ही पारदर्शिता खड़ी करता है और उससे भ्रष्ट अधिकारियों की पहचान संभव होती है।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि नोटिस जारी करने का उद्देश्य संबंधित समाचार पत्रों से जवाब माँगना और तथ्यात्मक आधार व स्रोत का खुलासा करवाना है, न कि तत्काल प्रतिबंधात्मक कार्रवाई। अदालत ने मीडिया संस्थानों को निर्देश दिया है कि वे अपनी रिपोर्टिंग में स्रोतों, दस्तावेजों और तथ्यों का खुलासा करें ताकि मामले की निष्पक्ष जांच हो सके। नोटिस जारी होने के बाद किस तरह की प्रतिक्रिया आती है—क्या मीडिया स्वयं स्पष्टीकरण देता है, क्या सरकार विस्तृत जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करती है, और क्या चार्जशीट के आधार पर आरोपियों के खिलाफ आपराधिक प्रोसेस आगे बढ़ता है—इन सब पर अगले दिनों कानूनी और राजनीतिक लड़ाई देखने को मिल सकती है।
Akhil Mahajan