हुड्डा बोले बजट नहीं कोरी भाषणबाजी, हरियाणा 5.56 लाख करोड़ के कर्ज तले दबा

भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने हरियाणा बजट 2026-27 को कोरी भाषणबाजी बताते हुए 5.56 लाख करोड़ के कर्ज, लाडो लक्ष्मी योजना में कम प्रावधान और शिक्षा-स्वास्थ्य पर सीमित खर्च को लेकर सरकार पर गंभीर सवाल उठाए।

हुड्डा बोले बजट नहीं कोरी भाषणबाजी, हरियाणा 5.56 लाख करोड़ के कर्ज तले दबा

हुड्डा बोले बजट नहीं कोरी भाषणबाजी, हरियाणा 5.56 लाख करोड़ के कर्ज तले दबा
लाडो लक्ष्मी योजना में 67 प्रतिशत महिलाएं होंगी बाहर, प्रावधान सिर्फ 6500 करोड़
शिक्षा-स्वास्थ्य-कृषि पर कम खर्च, पूंजीगत व्यय सीमित बताकर सरकार पर हमला


हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने राज्य के 2026-27 बजट पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे “बजट नहीं, कोरी भाषणबाजी” करार दिया है। उन्होंने कहा कि इस बजट में जमीनी हकीकत का अभाव है और आंकड़ों के जरिए जनता को भ्रमित किया जा रहा है। हुड्डा ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने हरियाणा को कर्ज के बोझ तले दबा दिया है और राज्य की अर्थव्यवस्था पर गंभीर वित्तीय दबाव है।

हुड्डा के मुताबिक 2026-27 के बजट के अनुसार राज्य का आंतरिक ऋण 3,91,435 करोड़ रुपए है। इसके अलावा छोटी बचतें लगभग 50,000 करोड़ रुपए, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों पर 68,995 करोड़ रुपए और अतिरिक्त देनदारियां 46,193 करोड़ रुपए हैं। इन सबको मिलाकर कुल कर्ज करीब 5,56,623 करोड़ रुपए पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा बताता है कि राज्य की आर्थिक स्थिति कितनी चुनौतीपूर्ण हो चुकी है।

लाडो लक्ष्मी योजना पर भी हुड्डा ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राज्य में 18 से 60 वर्ष की महिलाओं की अनुमानित संख्या 82.5 लाख है। यदि हर महिला को प्रति माह 2100 रुपए दिए जाएं तो सालाना करीब 20,790 करोड़ रुपए की जरूरत होगी। लेकिन बजट में केवल 6500 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। उनके अनुसार इससे केवल 31 प्रतिशत महिलाओं को ही लाभ मिल पाएगा और करीब 67 प्रतिशत महिलाएं योजना से बाहर रह जाएंगी।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि 2,23,658 करोड़ रुपए का नया बजट पिछले वर्ष के 2,05,017 करोड़ रुपए से लगभग 9 प्रतिशत अधिक जरूर है, लेकिन करीब 5 प्रतिशत मुद्रास्फीति को जोड़ने पर वास्तविक वृद्धि केवल 4 प्रतिशत ही रह जाती है। उन्होंने इसे 10 प्रतिशत वृद्धि का दावा भ्रामक बताया। बजट के अनुसार सरकार 76,250 करोड़ रुपए का नया आंतरिक ऋण ले रही है, जबकि मूलधन और ब्याज मिलाकर 65,667 करोड़ रुपए की अदायगी होनी है। ऐसे में अन्य खर्चों के लिए मात्र 10,593 करोड़ रुपए ही बचते हैं।

शिक्षा पर 22,914 करोड़ रुपए का प्रावधान कुल बजट का केवल 6.2 प्रतिशत है और यह जीएसडीपी का मात्र 1.9 प्रतिशत है, जबकि नई शिक्षा नीति में 6 प्रतिशत व्यय की सिफारिश की गई है। स्वास्थ्य के लिए 14,007 करोड़ रुपए निर्धारित किए गए हैं, जो राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 के मानकों से कम है। कृषि पर कुल व्यय का 4.8 प्रतिशत ही खर्च प्रस्तावित है, जबकि राज्य की लगभग 70 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है।

हुड्डा ने कहा कि पूंजीगत व्यय के लिए मात्र 21,756 करोड़ रुपए उपलब्ध हैं, जो कुल बजट का 9.7 प्रतिशत है। उनके अनुसार इससे नए मेडिकल कॉलेज, सड़कें, पुल और घोषित परियोजनाओं के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं हो पाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि उधार ली गई राशि का अधिकांश हिस्सा चालू खर्च और पुराने कर्ज चुकाने में जा रहा है, जिससे विकास गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के भाषण में भी हताशा झलकती है। न महंगाई पर कोई ठोस योजना है, न रोजगार सृजन का स्पष्ट रोडमैप और न ही किसानों के लिए एमएसपी पर कोई ठोस प्रावधान। प्रति व्यक्ति आय के आंकड़ों को लेकर भी हुड्डा ने सरकार पर आधे-अधूरे आंकड़े पेश करने का आरोप लगाया। उनके अनुसार कांग्रेस सरकार के दौरान प्रति व्यक्ति आय चार गुना बढ़ी थी, जबकि भाजपा के दस वर्षों में यह केवल दो गुना हुई।

रोजगार के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि राज्य में उद्योगों की स्थिति कमजोर है और निवेश पलायन कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि 11 साल बाद सरकार को यमुना की सफाई की याद आई है, जबकि प्रदूषण की समस्या लगातार बनी हुई है। साथ ही जल संकट और एसवाईएल मुद्दे पर भी सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए।