होमगार्ड के बेटे की हत्या में 2 पुलिसकर्मी सस्पेंड, हुक्का विवाद के बाद सागर की मौत; पंचायत में BJP विधायक ने SHO को फटकारा
गुरुग्राम के फर्रुखनगर में सागर हत्याकांड में लापरवाही पर दो पुलिसकर्मी सस्पेंड हुए। पंचायत में BJP विधायक ने SHO को फटकारा, पुलिस ने 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया।
➤ सागर हत्याकांड में लापरवाही के आरोप पर हेडकांस्टेबल अशोक और कांस्टेबल विनोद सस्पेंड
➤ हुक्का भरने के विवाद से बढ़ी रंजिश, 6 अगस्त को घर में घुसकर सागर पर हमला
➤ पंचायत में विधायक बिमला देवी ने SHO से पूछा- पहले कार्रवाई होती तो हमारा बच्चा नहीं जाता
गुरुग्राम के फर्रुखनगर में होमगार्ड मुन्नीलाल के 22 वर्षीय बेटे सागर की हत्या के मामले में पुलिस ने लापरवाही बरतने के आरोप में दो पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया है। फर्रुखनगर थाना एसएचओ महेंद्र सिंह ने हेडकांस्टेबल अशोक और कांस्टेबल विनोद के निलंबन की पुष्टि की है। दोनों के खिलाफ इंटरनल जांच भी बैठा दी गई है। सागर की हत्या के बाद परिवार और ग्रामीणों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए विरोध किया था। 8 अगस्त को हुई पंचायत में पटौदी से BJP विधायक बिमला देवी ने एसएचओ महेंद्र सिंह को भी जमकर फटकार लगाई थी।
सागर के परिवार का आरोप था कि उसके पिता मुन्नीलाल और भाई शंकर के साथ हुए विवाद की शिकायत पुलिस को दी गई थी, लेकिन समय रहते कार्रवाई नहीं की गई। परिवार का कहना था कि यदि पुलिस ने पहले कार्रवाई की होती तो सागर की जान नहीं जाती। इसी मुद्दे को लेकर ग्रामीणों ने सड़क जाम किया और सागर का शव लेने से भी इनकार कर दिया था।
हुक्का भरने के विवाद से शुरू हुई रंजिश
परिवार के मुताबिक, 3 अगस्त को सागर के पिता मुन्नीलाल अपने भाई होशियार के साथ दुकान पर बैठे थे। इसी दौरान गांव के सचेत उर्फ मुन्ना की सागर के भाई शंकर के साथ हुक्का भरने को लेकर कहासुनी हो गई।
आरोप है कि इसके बाद सचेत ने अपने साथियों के साथ मिलकर मुन्नीलाल और शंकर के साथ मारपीट की। उसी दिन मुन्नीलाल ने इस संबंध में पुलिस को शिकायत दी थी। परिवार का कहना है कि इस विवाद के बाद दोनों पक्षों के बीच रंजिश बढ़ गई थी।
इसी विवाद के कुछ दिन बाद सागर की हत्या कर दी गई। परिवार का आरोप है कि पहले हुए विवाद की शिकायत पर पुलिस ने कार्रवाई नहीं की, जिसका खामियाजा सागर को अपनी जान देकर भुगतना पड़ा।
पिता और भाई से झगड़े की खबर सुनकर बेंगलुरु से घर लौटा था सागर
परिवार के मुताबिक, सागर बेंगलुरु में ट्रांसपोर्ट कंपनी में काम करता था। पिता और भाई के साथ झगड़े की सूचना मिलने के बाद वह 6 अगस्त को बेंगलुरु से अपने घर लौट आया था।
बस अड्डे पर उतरने के बाद वह अपने भाई शंकर के साथ घर जा रहा था। आरोप है कि इसी दौरान सचेत उर्फ मुन्ना सहित करीब 20-25 लोगों ने दोनों भाइयों का पीछा शुरू कर दिया।
दोनों भाई हमलावरों को देखकर भागते हुए अपने घर में घुस गए। आरोप है कि हथियारों और लाठियों से लैस हमलावर भी उनके पीछे घर में घुस गए और हमला कर दिया।
घर में घुसे हमलावर, सागर की मौत
परिवार के मुताबिक, हमलावरों ने घर में घुसकर दोनों भाइयों पर हमला किया। इसी दौरान एक आरोपी ने गोली चला दी, जो सागर को लगी। उसका भाई शंकर वहां से भागकर अपनी जान बचाने में सफल रहा। इसके बाद हमलावर मौके से फरार हो गए।
परिजन घायल सागर को अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
हालांकि, मामले में पुलिस की ओर से बाद में पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर यह कहा गया कि सागर की मौत गोली लगने से नहीं, बल्कि चाकू घोंपने से हुई। इस तरह हत्या के तरीके को लेकर सामने आई शुरुआती जानकारी और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बीच अंतर सामने आया है।
हत्या के बाद परिवार ने शव लेने से किया इनकार
सागर की हत्या से नाराज परिवार और ग्रामीणों ने पुलिस की कार्यप्रणाली के विरोध में शव लेने से इनकार कर दिया था। परिवार का आरोप था कि मुन्नीलाल पर हुए हमले की शिकायत पुलिस को दी गई थी, लेकिन उस पर कार्रवाई नहीं की गई।
परिवार का कहना था कि शिकायत के बावजूद मामला दबा दिया गया। इसके बाद ग्रामीणों ने आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग शुरू कर दी।
शुक्रवार को ग्रामीणों ने पटौदी-कुलाना रोड पर खंडेवला मोड़ के पास जाम लगा दिया। ग्रामीण पुलिस अधिकारियों से सवाल पूछते हुए कार्रवाई की मांग कर रहे थे।
पंचायत में BJP विधायक ने SHO को लगाई फटकार
8 अगस्त को मामले को लेकर पंचायत बुलाई गई। इसमें पटौदी से BJP विधायक बिमला देवी भी पहुंचीं। उन्होंने फर्रुखनगर थाना एसएचओ महेंद्र सिंह से पुलिस की कार्रवाई को लेकर सीधे सवाल किए।
विधायक ने एसएचओ से पूछा कि कार्रवाई क्यों नहीं की गई। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस ने पहले कार्रवाई कर दी होती तो सागर की जान नहीं जाती। उन्होंने यह भी कहा कि परिवार की ओर से 112 पर कॉल की गई थी और पुलिस की गाड़ी भी वहां पहुंची थी, इसके बावजूद ऐसी स्थिति बनी।
पंचायत के दौरान विधायक ने पुलिस की जवाबदेही पर सवाल उठाए। उस समय एसएचओ सिर झुकाकर खड़े रहे।
परिवार और ग्रामीणों की नाराजगी का मुख्य कारण यही था कि सागर की हत्या से पहले हुए विवाद में पुलिस को शिकायत दिए जाने के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई।
पुलिस ने 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया
मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया और उनका वीडियो भी जारी किया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान झज्जर के भाभेवा निवासी ओम, चिमनी गांव निवासी साहिल, सोनीपत के धनाना गांव निवासी गौतम, गुरुग्राम के करौला गांव निवासी सचेत उर्फ मुन्ना, झज्जर के मेहराना गांव निवासी विनय कुमार, सोनीपत के खिलौड़ निवासी सुनील उर्फ अभिषेक, मंदीप उर्फ डिप्पी, अश्वनी और अनुश के रूप में की गई।
परिवार को आरोपियों की गिरफ्तारी का वीडियो भेजा गया था। वीडियो देखने के बाद ही परिवार ने सागर के शव का अंतिम संस्कार किया।
इसके साथ ही परिवार ने उन पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की थी, जिन पर मामले को गंभीरता से नहीं लेने का आरोप लगाया गया था।
दो पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज, इंटरनल जांच भी शुरू
परिवार की इसी मांग के बाद गुरुग्राम पुलिस ने हेडकांस्टेबल अशोक और कांस्टेबल विनोद को सस्पेंड कर दिया। दोनों के खिलाफ इंटरनल जांच बैठाई गई है।
फर्रुखनगर थाना एसएचओ महेंद्र सिंह ने दोनों पुलिसकर्मियों के निलंबन की पुष्टि की है। अब विभागीय जांच में यह देखा जाएगा कि सागर के परिवार की ओर से दी गई शिकायत और घटना से पहले हुए विवाद के मामले में पुलिस की ओर से क्या कार्रवाई की गई थी।
सागर हत्याकांड में एक तरफ पुलिस ने 9 आरोपियों की गिरफ्तारी की है, वहीं दूसरी तरफ दो पुलिसकर्मियों के निलंबन के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली भी जांच के दायरे में आ गई है। पंचायत में विधायक की नाराजगी और ग्रामीणों के विरोध के बाद मामले ने प्रशासनिक स्तर पर भी गंभीर रूप ले लिया है।
Akhil Mahajan