Video: उम्र 12 साल, हाथ में कांवड़ और साथ मिनी बाइक... महादेव की भक्ति में निकली दीक्षा

झज्जर की 12 वर्षीय दीक्षा हरिद्वार से गंगाजल लेकर मिनी बाइक पर कांवड़ यात्रा कर रही हैं। उज्जैन में लिया संकल्प 11 अगस्त को जलाभिषेक के साथ पूरा होगा।

Video: उम्र 12 साल, हाथ में कांवड़ और साथ मिनी बाइक... महादेव की भक्ति में निकली दीक्षा

उज्जैन में लिया था संकल्प, एक साल बाद हरिद्वार से गंगाजल लेकर निकली

मिनी बाइक पर शिव प्रतिमा के साथ रोजाना 20 किलोमीटर का सफर तय कर रही दीक्षा

11 अगस्त को झज्जर के गांव स्थित शिव मंदिर में करेगी जलाभिषेक


झज्जर के बहु गांव की 12 वर्षीय दीक्षा इन दिनों अपनी अनोखी कांवड़ यात्रा को लेकर चर्चा में है। करीब एक साल पहले उज्जैन में उसने मन में संकल्प लिया था कि अगली बार हरिद्वार से गंगाजल लेकर अपने गांव पहुंचेगी। इसी संकल्प को पूरा करने के लिए दीक्षा 27 जुलाई को हरिद्वार पहुंची और 3 अगस्त की शाम करीब 4 बजे वहां से कांवड़ यात्रा शुरू की। अब वह मिनी बाइक पर भगवान शिव की प्रतिमा साथ लेकर अपने गांव की ओर बढ़ रही है। उसके साथ कार में पिता टिंकू और चाचा भी चल रहे हैं। दीक्षा रोजाना करीब 20 किलोमीटर का सफर तय कर रही है और 11 अगस्त को गांव के शिव मंदिर में जलाभिषेक करेगी।

दीक्षा की यह तस्वीर पिछले साल उज्जैन की है। यहीं उसने कांवड़ लाने का संकल्प लिया था।

सातवीं कक्षा में पढ़ने वाली दीक्षा की इस यात्रा में धार्मिक आस्था के साथ राइडिंग का जुनून भी नजर आता है। उसका कहना है कि वह मन से साध्वी और कर्म से राइडर बनना चाहती है। हालांकि, उसकी उम्र कम होने के कारण यात्रा के दौरान उसके साथ परिवार के सदस्य मौजूद हैं और उसके सफर पर नजर रख रहे हैं।

दीक्षा अपने साथ मिनी बाइक पर भगवान शिव की प्रतिमा भी लेकर चल रही हैं।

एक साल पहले उज्जैन में लिया था संकल्प, अब पूरा करने निकली दीक्षा

दीक्षा के पिता टिंकू के मुताबिक, करीब एक साल पहले दीक्षा उज्जैन गई थी। वहीं उसके मन में कांवड़ लाने की इच्छा हुई। उसने उसी समय तय कर लिया था कि अगली बार हरिद्वार से गंगाजल लेकर अपने गांव पहुंचेगी।

एक साल बाद जब दीक्षा ने अपना संकल्प पूरा करने की इच्छा जताई तो परिवार ने उसकी बात मान ली। इसके बाद वह 27 जुलाई को हरिद्वार पहुंची। 3 अगस्त की शाम करीब 4 बजे उसने वहां से अपनी कांवड़ यात्रा शुरू की।

दीक्षा अपनी मिनी बाइक पर सफर कर रही है और पीछे भगवान शिव की प्रतिमा भी रखी हुई है। उसके पिता टिंकू और भाई रणधीर स्विफ्ट गाड़ी से उसके पीछे चल रहे हैं। यात्रा के दौरान दीक्षा रोजाना करीब 20 किलोमीटर का सफर तय करती है।

बाइक, कांवड़ और शिव की भक्ति ने खींचा लोगों का ध्यान

दीक्षा की यात्रा का सबसे खास पहलू उसका बाइक से सफर करना है। उसे बाइक चलाने का शौक है। कांवड़ के साथ धार्मिक वेशभूषा में और उज्जैन से खरीदी गई माला, कपड़े और कुंडल पहनकर जब वह मिनी बाइक पर निकलती है तो रास्ते में लोगों का ध्यान उसकी ओर चला जाता है।

दीक्षा अपने साथ भगवान शिव की प्रतिमा भी लेकर चल रही है। उसकी इस यात्रा के वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहे हैं। 12 साल की उम्र में कांवड़ लेकर निकली दीक्षा के सफर को लेकर आसपास के लोगों में भी उत्सुकता बनी हुई है।

उसकी यात्रा में आस्था के साथ राइडिंग के प्रति उसका लगाव भी दिखाई देता है। इसी वजह से परिवार के मुताबिक, दीक्षा के इस सफर को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ रही है।

पिता पहले ला चुके हैं डाक कांवड़, अब बेटी ने उठाया संकल्प

दीक्षा के पिता टिंकू खेतीबाड़ी करते हैं, जबकि उसकी मां गृहिणी हैं। दीक्षा उनकी इकलौती बेटी है। टिंकू खुद पहले डाक कांवड़ ला चुके हैं। अब बेटी के संकल्प को पूरा करने में वह उसके साथ चल रहे हैं।

टिंकू का कहना है कि वह अपनी बेटी को आगे चलकर एक अच्छी राइडर बनते देखना चाहते हैं। उनके मुताबिक, दीक्षा में कुछ अलग करने का जज्बा है और वह अपनी मेहनत से अपनी अलग पहचान बनाएगी।

पिता के लिए यह यात्रा केवल धार्मिक संकल्प पूरा करने तक सीमित नहीं है। वह बेटी के भविष्य को लेकर भी अपनी अलग उम्मीद रखते हैं और चाहते हैं कि दीक्षा आगे चलकर राइडिंग के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाए।

बेटी के लिए दो बड़ी इच्छाएं, एक राइडर बनने की और दूसरी गांव का पुराना नाम लौटाने की

टिंकू के मुताबिक, बेटी को लेकर उनकी दो बड़ी इच्छाएं हैं। पहली इच्छा है कि दीक्षा आगे चलकर एक अच्छी राइडर बने और अपनी अलग पहचान बनाए। दूसरी इच्छा उनके गांव से जुड़ी है।

उनका कहना है कि उनके गांव का पुराना नाम भवनगढ़ था, जबकि वर्तमान में गांव को बहु के नाम से जाना जाता है। वह चाहते हैं कि गांव को दोबारा उसके पुराने नाम भवनगढ़ से पहचान मिले।

इस तरह दीक्षा की कांवड़ यात्रा के साथ पिता की अपनी दो इच्छाएं भी जुड़ी हुई हैं। एक तरफ वह बेटी को राइडिंग में आगे बढ़ते देखना चाहते हैं, वहीं दूसरी ओर गांव की पुरानी पहचान लौटने की उम्मीद रखते हैं।

गाय को राष्ट्र पशु का दर्जा दिलाने की इच्छा

दीक्षा केवल राइडिंग और कांवड़ यात्रा को लेकर ही अपनी बात नहीं रखती। उसने कहा कि वह चाहती है कि गाय को राष्ट्र पशु का दर्जा मिले।

दीक्षा का कहना है कि वह नॉनवेज नहीं खाती और सभी जीव-जंतुओं के प्रति दया का भाव होना चाहिए। उसे पशु-पक्षियों से खास लगाव है। वह लोगों से भी जीवों के प्रति दया रखने और शाकाहारी बनने की अपील करती है।

उसकी सोच में धार्मिक आस्था के साथ जीवों के प्रति संवेदना भी दिखाई देती है। इसी वजह से वह अपनी यात्रा के दौरान लोगों से पशु-पक्षियों के प्रति दया रखने की बात कहती है।

आस्था के साथ राइडिंग का जुनून, सोशल मीडिया पर भी चर्चा

टिंकू के मुताबिक, दीक्षा की कांवड़ यात्रा उसके एक साल पुराने संकल्प और राइडर बनने के जुनून से जुड़ी है। 12 साल की उम्र में कांवड़ उठाकर मिनी बाइक से सफर करना और आधा रास्ता पैदल तय करना उसकी इस यात्रा को अलग बनाता है।

दीक्षा की कांवड़ यात्रा के वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहे हैं। धार्मिक वेशभूषा में मिनी बाइक पर भगवान शिव की प्रतिमा के साथ सफर करती दीक्षा को देखकर लोग उसके बारे में जानने में रुचि दिखा रहे हैं।

अब दीक्षा अपनी यात्रा पूरी करके 11 अगस्त को गांव के शिव मंदिर में जलाभिषेक करेगी। इसके साथ ही करीब एक साल पहले उज्जैन में लिया गया उसका संकल्प भी पूरा हो जाएगा। उसकी यह यात्रा आस्था, परिवार के सहयोग और राइडिंग के प्रति उसके जुनून की वजह से चर्चा में बनी हुई है।