गुरुग्राम में फर्जी कॉल सेंटर पर साइबर पुलिस का बड़ा छापा, तीन युवतियां गिरफ्तार
गुरुग्राम में साइबर पुलिस ने वजन कम करने की हर्बल दवा के नाम पर ठगी करने वाले फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया। तीन युवतियां गिरफ्तार, 102 मोबाइल और 150 सिम बरामद।c
गुरुग्राम में फर्जी कॉल सेंटर पर साइबर पुलिस का बड़ा छापा, तीन युवतियां गिरफ्तार
वजन कम करने की हर्बल दवा और 100% रिफंड का झांसा देकर करोड़ों की ठगी
102 मोबाइल, 150 सिम कार्ड और 12 लैपटॉप बरामद, गुजरात समेत कई राज्यों के लोग बने शिकार
गुरुग्राम में साइबर क्राइम पुलिस ने वजन कम करने के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले एक फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने उद्योग विहार स्थित कॉल सेंटर पर छापेमारी कर तीन युवतियों को गिरफ्तार किया है। मौके से 102 मोबाइल फोन, 150 सिम कार्ड और 12 लैपटॉप बरामद किए गए हैं।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मंदीप निवासी आया नगर (दिल्ली), हाल निवासी चक्करपुर, नेहा निवासी रंगपुरी (दिल्ली) और वर्षा निवासी मैनपुरी (उत्तर प्रदेश), हाल निवासी सुशांत लोक के रूप में हुई है। तीनों के खिलाफ साइबर क्राइम वेस्ट थाना में धोखाधड़ी समेत संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
एसीपी साइबर क्राइम गौरव फोगाट ने बताया कि आरोपी 'क्योरस्ट साइंस एंड वेलनेस प्राइवेट लिमिटेड' के नाम से फेसबुक और इंस्टाग्राम पर विज्ञापन चलाते थे। इन विज्ञापनों में हर्बल दवाओं से वजन कम करने का दावा किया जाता था। जैसे ही कोई व्यक्ति विज्ञापन पर क्लिक करता, कॉल सेंटर से उसे फोन कर दवाइयां खरीदने के लिए तैयार किया जाता था।
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों द्वारा बेची जाने वाली दवाइयों से लोगों का वजन कम नहीं होता था। ग्राहकों को 100 प्रतिशत रिफंड का भरोसा दिया जाता था, लेकिन शिकायत करने पर उनका पैसा वापस नहीं किया जाता था और उन्हें ब्लॉक कर दिया जाता था।
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि इस गिरोह ने गुजरात के लोगों को सबसे अधिक निशाना बनाया और वहां करोड़ों रुपये की ठगी की। इसके अलावा देश के अन्य राज्यों में भी इसी तरह की साइबर ठगी को अंजाम दिया गया।
पुलिस के अनुसार आरोपी खुद को ब्यूटीशियन, डाइटिशियन और डॉक्टर बताकर लोगों का विश्वास जीतते थे। जांच में पता चला कि धोखाधड़ी में इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर कंपनी के कर्मचारियों को आवंटित किए गए थे और पूरे रैकेट का संचालन कंपनी के मैनेजर, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (CAO), डायरेक्टर, मालिक और अन्य सहयोगियों की निगरानी में किया जा रहा था।
साइबर पुलिस अब पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को ठगा है और इस मामले में और किन लोगों की संलिप्तता है।
pooja