Video: सौम्य छवि वाले CM सैनी का सख्त अंदाज, अधिकारियों से बोले- कागजों में नहीं, जमीन पर दिखना चाहिए काम

गुरुग्राम बैठक में CM नायब सैनी ने अधिकारियों की जवाबदेही, ग्राउंड परफॉर्मेंस और शिकायतों की क्रॉस-चेकिंग पर जोर दिया, जलापूर्ति परियोजना को भी आगे बढ़ाया।

Video: सौम्य छवि वाले CM सैनी का  सख्त अंदाज, अधिकारियों से बोले- कागजों में नहीं, जमीन पर दिखना चाहिए काम

➤ सौम्य छवि से अलग सख्त तेवर में नजर आए CM सैनी
➤ कागजी रिपोर्ट नहीं, ग्राउंड पर परिणाम की होगी जांच
➤ अधिकारियों की कार्यप्रणाली और ACR में ग्राउंड परफॉर्मेंस पर जोर


हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की पहचान आमतौर पर एक सौम्य और सहज नेता के तौर पर दिखाई देती है, लेकिन गुरुग्राम में हुई अधिकारियों की हाई लेवल बैठक में उनका एक अलग प्रशासनिक अंदाज सामने आया। बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सीधे सवाल उठाए और साफ संदेश दिया कि सरकार की योजनाओं, विकास कार्यों और नागरिकों की शिकायतों का हिसाब केवल कागजों पर तैयार रिपोर्ट से नहीं होगा। काम का असली मूल्यांकन इस बात से होगा कि उसका परिणाम जमीन पर कितना दिखाई देता है और नागरिकों को वास्तव में कितनी राहत मिलती है।

गुरुग्राम की इस बैठक में मुख्यमंत्री का फोकस अधिकारियों की जवाबदेही पर रहा। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट किया कि किसी समस्या के समाधान की रिपोर्ट भेज देना ही पर्याप्त नहीं है। यदि कागजों में समस्या का समाधान दिखाया गया है, लेकिन मौके पर स्थिति पहले जैसी ही बनी हुई है, तो इसे वास्तविक समाधान नहीं माना जा सकता। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह समझाने का प्रयास किया कि प्रशासनिक व्यवस्था में रिपोर्ट और जमीनी हकीकत के बीच किसी तरह का अंतर नहीं होना चाहिए।

बैठक के दौरान एक ऐसी समस्या को लेकर अधिकारियों से जवाब मांगा गया, जिसके समाधान की रिपोर्ट पहले ही मुख्यमंत्री के सामने पहुंच चुकी थी। लेकिन जब रिपोर्ट में किए गए दावे की तुलना वास्तविक स्थिति से की गई तो तस्वीर अलग नजर आई। जिस समस्या के समाधान की जानकारी दी गई थी, वह जमीन पर पूरी तरह खत्म नहीं हुई थी। इस स्थिति ने अधिकारियों की रिपोर्ट और मौके की हकीकत के बीच अंतर को सामने ला दिया।

मुख्यमंत्री ने प्रमाण के साथ अधिकारियों के सामने यह स्थिति रखी कि जिस समस्या के समाधान की रिपोर्ट भेजी गई थी, उसका वास्तविक समाधान अभी तक नहीं हुआ है। इसके बाद अधिकारियों को अपनी रिपोर्ट और जमीन पर मौजूद स्थिति के बीच का अंतर समझ में आया। मुख्यमंत्री ने इस पूरे मामले से यह स्पष्ट कर दिया कि भविष्य में इस तरह की लापरवाही को सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा नहीं माना जाएगा।

बैठक की शुरुआत में ही प्रदूषण से जुड़े मामले में कार्रवाई के निर्देश देकर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को जवाबदेही का संदेश दिया। STP के उचित संचालन से जुड़ी शिकायत के मामले में संबंधित अधिकारियों की लापरवाही पर कार्रवाई की गई। इससे बैठक में यह संकेत साफ रहा कि जिम्मेदारी वाले पद पर बैठे अधिकारियों से केवल रिपोर्ट तैयार करने की नहीं, बल्कि अपने क्षेत्र में वास्तविक स्थिति की निगरानी करने की भी अपेक्षा है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी बताया कि वह स्वयं नागरिकों की समस्याओं का फीडबैक लेते हैं। कई बार मुख्यमंत्री के रूप में अपनी पहचान बताए बिना भी वह सीधे नागरिकों से उनकी समस्याओं के बारे में जानकारी लेते हैं। इसका उद्देश्य सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज जानकारी और नागरिकों की वास्तविक स्थिति के बीच अंतर को समझना है।

यही वजह है कि मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को ग्राउंड फीडबैक को गंभीरता से लेने के निर्देश दिए। उनका जोर इस बात पर रहा कि यदि किसी शिकायत के समाधान की रिपोर्ट भेजी गई है, तो यह भी सुनिश्चित किया जाए कि संबंधित नागरिक को वास्तव में समस्या से राहत मिली है। यदि नागरिक की शिकायत और विभाग की रिपोर्ट में अंतर है, तो मामले की दोबारा जांच और क्रॉस-चेकिंग जरूरी होगी।

मुख्यमंत्री ने गुरुग्राम में काम करने वाले अधिकारियों की ग्राउंड परफॉर्मेंस को उनकी ACR में दर्ज करने की बात भी कही। इसका मतलब है कि अधिकारियों की कार्यप्रणाली का आकलन केवल कार्यालय में निपटाई गई फाइलों के आधार पर नहीं होगा। जमीन पर जाकर समस्याओं को समझना, नागरिकों की शिकायतों पर कार्रवाई करना और समाधान का वास्तविक परिणाम सुनिश्चित करना भी उनकी कार्यप्रणाली का हिस्सा होगा।

गुरुग्राम की बैठक में यह संदेश भी सामने आया कि अधिकारियों को अपने कार्यालयों तक सीमित रहने के बजाय ग्राउंड पर सक्रिय भूमिका निभानी होगी। नागरिकों की समस्याओं को समझना, मौके की स्थिति देखना और कार्रवाई के बाद उसका असर जांचना प्रशासनिक जिम्मेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।

बैठक में गुरुग्राम की वाटर सप्लाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 69.585 किलोमीटर लंबी भूमिगत पाइपलाइन की परियोजना को भी आगे बढ़ाया गया। इस परियोजना पर ₹1,993.59 करोड़ खर्च होंगे। यह परियोजना गुरुग्राम की जलापूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने से जुड़ी है और बैठक में इसे आगे बढ़ाने को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए।

मुख्यमंत्री ने दिल्ली से गुरुग्राम में कूड़ा डालने वाले वाहनों पर भी कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके साथ ही RMC के लिए जोनवार व्यवस्था और नागरिक शिकायतों की क्रॉस-चेकिंग जैसे विषयों पर भी सख्ती से अमल करने के निर्देश दिए गए। इन फैसलों के पीछे मुख्य जोर व्यवस्था को जमीन पर प्रभावी बनाने और नागरिक सुविधाओं में सुधार पर रहा।

गुरुग्राम की इस बैठक में मुख्यमंत्री का पूरा फोकस एक ही बात पर दिखाई दिया कि कागजी कार्रवाई और वास्तविक काम में अंतर नहीं होना चाहिए। किसी योजना की प्रगति हो या नागरिक की शिकायत, दोनों मामलों में अंतिम परिणाम जमीन पर दिखाई देना चाहिए। केवल रिपोर्ट तैयार करने या कार्रवाई की जानकारी देने से प्रशासनिक जिम्मेदारी पूरी नहीं मानी जाएगी।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का यह अंदाज उनकी सामान्य सौम्य सार्वजनिक छवि से अलग सख्त जवाबदेही वाले प्रशासनिक रुख को सामने लाता है। बैठक में उन्होंने अधिकारियों को यह स्पष्ट संकेत दिया कि नागरिकों की समस्याओं को लेकर किसी भी स्तर पर लापरवाही की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए और काम का वास्तविक मूल्यांकन जमीन पर दिखाई देने वाले परिणामों से किया जाएगा।

अब गुरुग्राम में अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन निर्देशों को जमीन पर लागू करने की है। ग्राउंड परफॉर्मेंस, शिकायतों की क्रॉस-चेकिंग, कूड़ा वाहनों पर कार्रवाई और 69.585 किलोमीटर भूमिगत पाइपलाइन परियोजना जैसे मुद्दों पर आने वाले समय में काम की वास्तविक प्रगति महत्वपूर्ण होगी।

गुरुग्राम की इस बैठक से प्रशासन के लिए संदेश साफ है। कागजी रिपोर्ट की जगह ग्राउंड रिपोर्ट, कार्रवाई के आश्वासन की जगह वास्तविक परिणाम और केवल फाइल निस्तारण की जगह नागरिकों को राहत अब काम के आकलन का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। मुख्यमंत्री के सख्त तेवरों के बाद अधिकारियों की कार्यप्रणाली में इसका असर किस तरह दिखाई देता है, यह आने वाले समय में सामने आएगा।