पंजाब-हरियाणा की भूमिका होगी कमजोर, अब सभी पावर चंडीगढ़ एडमिनिस्ट्रेटर के पास, विवाद की सम्भावना

चंडीगढ़ प्रशासन ने नया सर्विस रूल लागू कर दिया है। अब भर्ती, सेवा नियमों में बदलाव और डेपुटेशन पर सभी फैसले एडमिनिस्ट्रेटर की मंजूरी से होंगे। पंजाब-हरियाणा की भूमिका सीमित होने से विवाद के आसार हैं।

पंजाब-हरियाणा की भूमिका होगी कमजोर,  अब सभी पावर चंडीगढ़ एडमिनिस्ट्रेटर के पास, विवाद की सम्भावना

➤ चंडीगढ़ प्रशासन ने नया सर्विस रूल लागू किया
➤ अब भर्ती, नियम बदलाव और डेपुटेशन पर अंतिम फैसला एडमिनिस्ट्रेटर करेंगे
➤ पंजाब-हरियाणा के अधिकार सीमित, राजनीतिक विवाद के आसार

चंडीगढ़ प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाते हुए नया सर्विस रूल लागू कर दिया है। इस नियम के तहत अब ग्रुप ए, बी और सी कर्मचारियों की भर्ती, सेवा नियमों में बदलाव और अधिकारियों की डेपुटेशन पर नियुक्ति जैसे सभी फैसले केवल एडमिनिस्ट्रेटर की मंजूरी से ही होंगे। नए आदेश के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि अब किसी भी अफसर की पोस्टिंग या नियुक्ति का फैसला सीधे-सीधे एडमिनिस्ट्रेटर करेंगे और पंजाब व हरियाणा की भूमिका सीमित हो जाएगी।

विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यह फैसला आने वाले समय में राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद को जन्म दे सकता है। केंद्र सरकार इसे पारदर्शिता और प्रशासनिक मजबूती का कदम बताएगी, लेकिन पंजाब की पार्टियां इसे अपने अधिकारों पर हमला मानकर विरोध कर सकती हैं। हरियाणा भी इस बदलाव में अपने हित साधने की कोशिश करेगा।

इस बदलाव के बाद आशंका है कि अन्य कैडर जैसे DANICS अधिकारियों को भी चंडीगढ़ प्रशासन के अहम विभागों की जिम्मेदारी मिल सकती है। इससे केंद्र का सीधा नियंत्रण और मजबूत होगा, वहीं पंजाब और हरियाणा की दखलअंदाजी घट सकती है। पहले विभागों के प्रमुख अपने स्तर पर प्रस्ताव तैयार करते थे और उच्चाधिकारियों के जरिए उन्हें मंजूरी के लिए भेजते थे। पंजाब और हरियाणा से डेपुटेशन पर आने वाले अधिकारियों की पोस्टिंग और वापसी अपेक्षाकृत आसान रहती थी, लेकिन अब हर फैसला एडमिनिस्ट्रेटर की मंजूरी से ही अंतिम होगा।

पंजाब सरकार पहले ही इस मुद्दे पर नाराजगी जता चुकी है। हाल ही में उसने केंद्र को पत्र लिखकर 60:40 अनुपात (पंजाब और हरियाणा से अधिकारियों की नियुक्ति का नियम) के उल्लंघन पर आपत्ति जताई थी। पंजाब का कहना है कि शिक्षा, वित्त, आबकारी और स्वास्थ्य जैसे अहम विभागों में उसके कैडर के अधिकारियों की अनदेखी की जा रही है।

यह आदेश चंडीगढ़ प्रशासन में कार्यरत हजारों कर्मचारियों को प्रभावित करेगा। नई भर्ती प्रक्रियाओं में देरी की आशंका है क्योंकि हर नियुक्ति पर एडमिनिस्ट्रेटर की मंजूरी जरूरी होगी। डेपुटेशन पर आने-जाने वाले अधिकारियों को भी अधिक औपचारिकताओं से गुजरना पड़ेगा।