चंडीगढ़ मेयर चुनाव 2026: AAP-कांग्रेस गठबंधन टूटा, कांग्रेस अकेले मैदान में
चंडीगढ़ मेयर चुनाव 2026 में AAP और कांग्रेस का गठबंधन टूट गया। कांग्रेस ने तीनों पदों पर उम्मीदवार उतारे। ओपन वोटिंग में बीजेपी को बढ़त मिलने के आसार।
➤ चंडीगढ़ मेयर चुनाव 2026 में AAP-कांग्रेस गठबंधन फेल, कांग्रेस ने अकेले लड़ने का ऐलान
➤ कांग्रेस ने मेयर समेत तीनों पदों पर उम्मीदवार उतारे, AAP पर अंदरूनी टूट का आरोप
➤ ओपन वोटिंग में बीजेपी को फायदा, पहले से मजबूत स्थिति में नजर आई पार्टी
चंडीगढ़ मेयर चुनाव 2026 से पहले सियासी समीकरण पूरी तरह बदलते नजर आ रहे हैं। आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन की कोशिशें नामांकन के दिन ही टूट गईं। कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया कि वह इस बार मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर तीनों पदों पर अकेले चुनाव लड़ेगी।
कांग्रेस ने वार्ड नंबर-34 से पार्षद गुरप्रीत सिंह गाबी को मेयर उम्मीदवार घोषित किया है। वहीं वार्ड नंबर-13 से पार्षद सचिन गालव को सीनियर डिप्टी मेयर और वार्ड नंबर-28 से पार्षद निर्मला देवी को डिप्टी मेयर पद के लिए मैदान में उतारा गया है।
गठबंधन टूटने पर चंडीगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एचएस लकी ने आम आदमी पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि AAP अंदरूनी कलह से जूझ रही है और उसके पार्षद एकजुट नहीं हैं। लकी के मुताबिक AAP के दो पार्षद पहले ही बीजेपी में जा चुके हैं, जबकि कुछ अन्य पार्षदों की निष्ठा भी संदिग्ध बनी हुई है।
लकी ने कहा कि AAP के पास बीजेपी को रोकने लायक संख्या नहीं है, इसलिए कांग्रेस ने हारी हुई बाजी में उतरने के बजाय अकेले चुनाव लड़ने का फैसला लिया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस के सभी 6 पार्षद पूरी तरह एकजुट हैं और आने वाले नगर निगम चुनावों में भी पार्टी अकेले दम पर मैदान में उतरेगी।
सियासी गणित पर नजर डालें तो हाल ही में AAP से 2 महिला पार्षदों के बीजेपी में जाने के बाद बीजेपी के पार्षदों की संख्या 18 हो चुकी है। AAP के पास अब 11 पार्षद, जबकि कांग्रेस के पास 6 पार्षद हैं। इसके साथ ही कांग्रेस को सांसद मनीष तिवारी का एक अतिरिक्त वोट भी मिलता है।
इस बार चंडीगढ़ नगर निगम में सीक्रेट बैलेट नहीं बल्कि ओपन वोटिंग से चुनाव होगा। प्रशासक गुलाब चंद कटारिया की मंजूरी के बाद यह फैसला लागू किया गया है। ओपन वोटिंग से क्रॉस वोटिंग की गुंजाइश कम होगी, जिसे बीजेपी के लिए फायदेमंद माना जा रहा है।
चंडीगढ़ में मेयर का कार्यकाल केवल एक साल का होता है और इसमें जनता सीधे वोट नहीं करती। कुल 35 पार्षदों और सांसद के एक वोट से मेयर चुना जाता है। मौजूदा स्थिति में बीजेपी के पास सांसद का वोट नहीं है, लेकिन पार्षदों की संख्या के लिहाज से पार्टी मजबूत नजर आ रही है।
पिछले मेयर चुनाव में भी कम संख्या के बावजूद बीजेपी ने क्रॉस वोटिंग के सहारे बाजी मार ली थी और हरप्रीत कौर बबला मेयर बनी थीं। इस बार बदले नियम और टूटे गठबंधन ने मुकाबले को और ज्यादा राजनीतिक रूप से दिलचस्प बना दिया है।
Akhil Mahajan