हरियाणा की राजनीति में चौधरी बीरेंद्र सिंह की तीसरी पीढ़ी की एंट्री की चर्चा, जानें कौन है कुदरत सिंह
हरियाणा के पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह की पोती कुदरत सिंह के राजनीति में आने की चर्चाएं तेज हैं। उन्होंने पिता बृजेंद्र सिंह की सद्भावना यात्रा में भाग लिया। बीरेंद्र परिवार की तीसरी पीढ़ी के राजनीति में उतरने की चर्चा ने प्रदेश की सियासत को गरमा दिया है।
➤ हरियाणा की राजनीति में चौधरी बीरेंद्र सिंह की तीसरी पीढ़ी की एंट्री की चर्चा
➤ पोती कुदरत ने पिता बृजेंद्र सिंह की सद्भावना यात्रा में दी मौजूदगी से बढ़ाई हलचल
➤ राजनीतिक घरानों में बेटियों के आगे आने की नई परंपरा मजबूत होती दिखी
हरियाणा की राजनीति में एक बार फिर चौधरी बीरेंद्र सिंह परिवार सुर्खियों में है। प्रदेश के कद्दावर नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री की तीसरी पीढ़ी को अब राजनीति में उतरने की चर्चा जोरों पर है। बीरेंद्र सिंह की 24 वर्षीय पोती कुदरत सिंह, जो पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह की बेटी हैं, हाल ही में सद्भावना यात्रा के दौरान हिसार जिले के उकलाना में नजर आईं। उनकी मौजूदगी ने यह अटकलें तेज कर दी हैं कि सर छोटूराम की वंश परंपरा की एक और कड़ी अब राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा सकती है।
कुदरत सिंह, जो सर छोटूराम की ग्रेट-ग्रेट ग्रैंड डॉटर हैं, ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा—"मैं अपने पिता को सपोर्ट करने के लिए सद्भावना यात्रा में शामिल हुई हूं। फिलहाल मेरा और छोटे भाई समरवीर (19) का फोकस केवल पढ़ाई पर है।" राजनीति में आने के सवाल पर कुदरत मुस्कुराते हुए बोलीं कि वह परिवार को सपोर्ट करने के लिए समय-समय पर उचाना और हिसार आती रही हैं। उन्होंने पिता के विधानसभा और लोकसभा चुनाव में भी प्रचार किया था।
बृजेंद्र सिंह के राजनीतिक करियर की पृष्ठभूमि भी उतनी ही दिलचस्प है। 2019 में भाजपा के टिकट पर हिसार से सांसद बने बृजेंद्र सिंह ने रिकॉर्ड वोटों से जीत दर्ज की थी, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले ही उनका भाजपा से मोहभंग हो गया। किसान आंदोलन, अग्निवीर योजना और महिला पहलवानों के यौन शोषण जैसे मुद्दों पर मतभेद के चलते उन्होंने पार्टी छोड़ दी और कांग्रेस में शामिल हो गए। कांग्रेस से उन्हें लोकसभा टिकट की उम्मीद थी, पर नहीं मिला। इसके बाद उचाना कलां से विधानसभा चुनाव लड़े, लेकिन भाजपा के देवेंद्र अत्री से मात्र 32 वोटों से हार गए। अब उन्होंने बैलेट वोटों की गिनती को लेकर हाईकोर्ट में याचिका लगाई है।
हरियाणा की राजनीति में उचाना सीट का खास महत्व रहा है। यहीं से चौधरी बीरेंद्र सिंह और उनकी पत्नी प्रेमलता सिंह ने राजनीति में कदम रखा। बीरेंद्र सिंह पांच बार उचाना से विधायक और तीन बार हरियाणा कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। उन्होंने तीन बार सांसद का चुनाव भी जीता। बीरेंद्र सिंह का राजनीतिक सफर 1972 में ब्लॉक समिति उचाना के चेयरमैन बनने से शुरू हुआ था। वहीं प्रेमलता सिंह ने 2014 में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़कर दुष्यंत चौटाला को हराया था।
वर्तमान में पूर्व IAS अधिकारी बृजेंद्र सिंह सद्भावना यात्रा के ज़रिए प्रदेश की राजनीति में अपनी जमीनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में जुटे हैं। कांग्रेस हाईकमान ने उन्हें हाल ही में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ओवरसीज विभाग का सह संयोजक बनाया है। उनका लक्ष्य न केवल पार्टी में सक्रिय भूमिका निभाना है, बल्कि अपने परिवार की राजनीतिक परंपरा को नई ऊंचाई देना भी है।
हरियाणा की राजनीति में अब बेटियां भी अपने परिवार की विरासत को संभालने के लिए आगे आ रही हैं। आरती राव, श्रुति चौधरी, गायत्री विजयलक्ष्मी और चित्रा सरवारा जैसी युवा महिलाएं राजनीतिक मंचों पर सक्रिय हैं। आरती राव जहां नेशनल लेवल की शूटर रहीं और अब कैबिनेट मंत्री हैं, वहीं श्रुति चौधरी ऑक्सफोर्ड से पढ़कर राजनीति में आईं। गायत्री विजयलक्ष्मी और चित्रा सरवारा भी अपने दादा और पिता के नक्शे कदम पर चल रही हैं।
ऐसे में यह कहा जा सकता है कि हरियाणा की राजनीति में ‘गर्ल पावर’ धीरे-धीरे एक नई दिशा ले रही है। चौधरी बीरेंद्र सिंह परिवार की तीसरी पीढ़ी के रूप में कुदरत सिंह का नाम इस सूची में जुड़ना अब महज समय की बात लगती है।
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