सरकारी बैंक आज खुले, कल से हड़ताल की शुरुआत; निपटा लें जरूरी काम
रविवार को सरकारी बैंक खुले हैं, जबकि सोमवार से बुधवार तक बैंक कर्मचारी हड़ताल पर रहेंगे। 5-डे वर्किंग और PLI को लेकर यूनियनों का विरोध जारी है।
➤ रविवार को खुले सरकारी बैंक, आज ही निपटा लें जरूरी काम
➤ सोमवार से बुधवार तक 3 दिन बैंक हड़ताल, 12 बैंकों के 7.5 लाख कर्मचारी होंगे प्रभावित
➤ हड़ताल के दौरान सरकारी बैंकों के ATM से कैश निकासी पर अतिरिक्त चार्ज नहीं लगेगा
अगर बैंक से जुड़ा आपका कोई जरूरी काम पेंडिंग है तो उसे आज ही निपटा लें, क्योंकि रविवार की छुट्टी होने के बावजूद आज सरकारी बैंक खुले हैं, जबकि सोमवार से बुधवार तक बैंक कर्मचारियों की हड़ताल के चलते सरकारी बैंकों की सेवाएं प्रभावित रहेंगी। बैंक कर्मचारी सप्ताह में 5-डे वर्किंग लागू करने की मांग को लेकर अगले तीन दिन हड़ताल पर रहेंगे। इस हड़ताल में देश की 7 बड़ी बैंक यूनियनें शामिल होंगी और इनके साथ करीब 90 प्रतिशत से ज्यादा बैंक कर्मचारी जुड़े होने का दावा किया गया है।
रविवार को सरकारी बैंकों के खुले रहने का मौका करीब 10 साल बाद आया है। इससे पहले 2016 में नोटबंदी के बाद 14 नवंबर को रविवार के दिन बैंक खोले गए थे। उस समय पुराने 500 और 1000 रुपये के नोट बदलने, जमा करने और नकदी निकालने के लिए बैंकों में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे। भीड़ को संभालने और लोगों को बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने रविवार को भी बैंक खोलने का फैसला लिया था।
इस बार रविवार को बैंक खुले रहने के बाद अगले तीन दिनों तक हड़ताल की स्थिति है। ऐसे में बैंक से जुड़े जरूरी काम करने वाले ग्राहकों के लिए आज का दिन अहम है। हालांकि, बैंक हड़ताल के दौरान ATM से कैश निकालने को लेकर ग्राहकों को अतिरिक्त चार्ज से राहत मिलने की बात कही गई है।
ATM से कैश निकालने पर कोई चार्ज नहीं लगेगा। बैंक हड़ताल के दौरान SBI और PNB सहित सभी सरकारी बैंकों के ATM से मंथली फ्री लिमिट खत्म होने के बाद भी कैश निकालने पर कोई चार्ज नहीं लगेगा। यानी हड़ताल के दौरान ग्राहक अपने बैंक के ATM से तय मुफ्त निकासी सीमा से अधिक बार भी नकदी निकाल सकेंगे और इसके लिए अतिरिक्त चार्ज नहीं लगेगा।
RBI के मौजूदा नियमों के मुताबिक, ग्राहक अपने बैंक के ATM से हर महीने 5 बार मुफ्त में कैश निकाल सकते हैं। दूसरे बैंक के ATM से दिल्ली और मुंबई जैसे मेट्रो शहरों में महीने में 3 मुफ्त ट्रांजेक्शन और छोटे शहरों में 5 मुफ्त ट्रांजेक्शन की सीमा है।
अगर कोई ग्राहक एक महीने में इस सीमा से ज्यादा बार ATM से कैश निकालता है तो हर अतिरिक्त ट्रांजेक्शन पर 23 रुपये + GST चार्ज लिया जाता है। इसके अलावा ATM के इस्तेमाल पर बैंक एक-दूसरे को भी शुल्क देते हैं। कैश निकालने पर यह शुल्क 19 रुपये और बैलेंस चेक करने पर 7 रुपये है।
बैंक कर्मचारियों की प्रस्तावित हड़ताल को टालने के लिए वित्तीय सेवा विभाग, इंडियन बैंक्स एसोसिएशन और बैंक प्रबंधन की ओर से अपील की गई थी। हालांकि, बैंक यूनियनों ने इस अपील को ठुकरा दिया है। यूनियनों की ओर से कहा गया है कि जब तक सरकार सप्ताह में 5-डे वर्किंग लागू करने की पक्की तारीख तय नहीं करती, तब तक उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।
हड़ताल में AIBEA, AIBOC, NCBE, AIBOA, BEFI, INBEF और INBOC समेत 7 बड़ी बैंक यूनियनें शामिल होंगी। इन यूनियनों से करीब 90 प्रतिशत से अधिक बैंक कर्मचारियों के जुड़े होने का दावा किया गया है। इसी वजह से हड़ताल का असर सरकारी बैंकों की सामान्य बैंकिंग सेवाओं पर पड़ने की संभावना बताई गई है।
5-डे वर्किंग को लेकर सरकार और यूनियनों के बीच मतभेद भी सामने आया है। हड़ताल से ठीक पहले सामने आई मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि सरकार ने बैंकों में 5-डे वर्किंग लागू करने का कोई वादा नहीं किया था। रिपोर्ट के मुताबिक, सैलरी रिवीजन को लेकर हुई बातचीत के दौरान भी इस मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं हुई थी।
वित्त मंत्रालय के सूत्र के हवाले से कहा गया है कि सप्ताह में पांच दिन काम करने की मांग कर्मचारी यूनियनों की ओर से एकतरफा उठाई गई थी और दोनों पक्षों के बीच इस पर कोई सहमति नहीं बनी थी। ऐसे में बैंक यूनियनों और सरकार के बीच इस मुद्दे को लेकर मतभेद बना हुआ है।
PLI स्कीम को लेकर भी विवाद चल रहा है। सप्ताह में पांच दिन काम करने की मांग के अलावा बैंक कर्मचारी यूनियनें बोनस यानी PLI के नियमों का भी विरोध कर रही हैं। सरकार ने बड़े अधिकारियों, जैसे स्केल-4 और उससे ऊपर के अधिकारियों के लिए बोनस का नया नियम लागू किया है।
इस नियम के तहत अच्छा प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों को 365 दिन की बेसिक सैलरी के बराबर इंसेंटिव या बोनस मिल सकता है। बैंक यूनियनें इस व्यवस्था का भी विरोध कर रही हैं। ऐसे में 5-डे वर्किंग के साथ PLI का मुद्दा भी बैंक कर्मचारियों और सरकार के बीच विवाद का हिस्सा बना हुआ है।
Akhil Mahajan