धर्मगुरु आनंद गिरी महाराज पर विधवा से ₹10.50 लाख और जेवर ठगने का केस दर्ज

अंबाला में धर्मगुरु आनंद गिरी महाराज पर विधवा से बेटे की सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ₹10.50 लाख और सोने के जेवर ठगने का केस दर्ज हुआ।

धर्मगुरु आनंद गिरी महाराज पर विधवा से ₹10.50 लाख और जेवर ठगने का केस दर्ज

■ अंबाला में धर्मगुरु आनंद गिरी महाराज पर विधवा से ₹10.50 लाख और जेवर ठगने का केस दर्ज

■ बेटे को केंद्र सरकार में ASO की नौकरी दिलाने का झांसा देकर थमाया फर्जी जॉइनिंग लेटर

■ पैसे वापस मांगने पर धमकी दी—“तुम मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकती”

हरियाणा के अंबाला जिले में उत्तर प्रदेश के लखनऊ निवासी कथित धर्मगुरु महामंडलेश्वर योगी आनंद गिरी महाराज और उसके सहयोगी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि दोनों ने एक विधवा महिला को उसके बेटे की केंद्र सरकार में नौकरी लगवाने का झांसा देकर ₹10 लाख 50 हजार और सोने के जेवर हड़प लिए।

मामला अंबाला के नारायणगढ़ थाना क्षेत्र का है। कालाअंब निवासी पीड़िता सुनीता रानी ने शिकायत में बताया कि आरोपियों ने उनके बेटे ऋषभ बंसल को Ministry of Personnel, Public Grievances and Pensions में ASO (Assistant Section Officer) के पद पर बिना परीक्षा सीधे नौकरी दिलाने का वादा किया था।

आनंद गिरी महाराज दिसंबर 2025 में नारायणगढ़ में रक्तदान शिविर में भाग लेने आए थे। महिला का दावा है कि वे उनके ही घर पर ठहरे थे। फाइल फोटो।

पीड़िता के अनुसार, सितंबर 2024 में उनकी बातचीत आनंद गिरी से हुई थी। उसने खुद को मानवाधिकार सुरक्षा संघ का संस्थापक बताया और महिला को हरियाणा में संघ की महिला विंग का अध्यक्ष बना दिया। इससे महिला का विश्वास जीत लिया गया।

सुनीता रानी ने बताया कि 21 दिसंबर 2025 को कालाअंब में आयोजित एक रक्तदान शिविर में आनंद गिरी अपने सहयोगी मनीष मिश्रा के साथ मुख्य अतिथि बनकर आया था। दोनों 20 दिसंबर को ही पहुंच गए थे और महिला के घर पर ही रुके थे।

इसी दौरान आनंद गिरी ने कहा कि उसका एक शिष्य दिल्ली में बहुत बड़ी सरकारी पोस्ट पर है और वह उनके छोटे बेटे ऋषभ को बिना परीक्षा सीधे सरकारी नौकरी दिलवा सकता है। इसके बदले उसने ₹10 लाख की मांग की।

महिला ने झांसे में आकर तुरंत ₹50 हजार नगद शगुन के तौर पर दे दिए। इसके बाद 29 दिसंबर 2025 को ₹5 लाख अपने परिचित धर्मबीर शेरगिल से उधार लेकर आरोपी के बैंक खाते में ट्रांसफर किए।

इसके बाद फरवरी 2026 में महिला ने ₹5 लाख और दिए। इसमें ₹2.5 लाख बड़े बेटे की कंपनी के मालिक से उधार लिए गए, जबकि ₹2.5 लाख पुत्रवधू के खाते से ट्रांसफर किए गए।

पीड़िता ने बताया कि 16 जनवरी 2026 को आनंद गिरी ने उन्हें और उनके बेटे को गाजियाबाद स्थित अपने फ्लैट पर बुलाया। वहां एक बंद लिफाफे में जॉइनिंग लेटर दिया गया, जो पूरी तरह सरकारी दस्तावेज जैसा लग रहा था।

सहयोगी मनीष मिश्रा ने ऋषभ से कुछ खाली फॉर्म पर हस्ताक्षर करवाए और कहा कि किसी IAS या IPS अधिकारी से इसे अटेस्ट करवाकर 19 जनवरी तक जॉइनिंग करवा दी जाएगी।

जब तय तारीख तक जॉइनिंग नहीं हुई तो आरोपियों ने टालमटोल शुरू कर दी। मार्च में दोनों ने महिला को फिर दिल्ली बुलाया। वहां आनंद गिरी ने कहा कि अधिकारी अब ₹5 लाख और मांग रहे हैं।

महिला ने असमर्थता जताई तो आरोपी ने उसकी मजबूरी का फायदा उठाया और उसकी स्वर्गीय मां के दिए हुए सोने के गहने—अंगूठी, गले की चेन और दो बालियां यह कहकर रख लीं कि अगले दिन जॉइनिंग हो जाएगी।

पत्रकारों से बातचीत करते हुए आनंद गिरी का एक फाइल फोटो।

कुछ समय बाद जब महिला को शक हुआ और वह दोबारा गाजियाबाद फ्लैट पहुंची, तो पता चला कि दोनों आरोपी 16 मार्च से ही फरार हैं। वहां मौजूद लोगों से आनंद गिरी का एक फर्जी आधार कार्ड भी मिला।

जब महिला ने अपने पैसे वापस मांगे, तो आरोपी ने फोन पर धमकी दी। उसने कहा—“तुम्हारे पास गिने-चुने लोग हैं, मेरे पास लाखों लोगों का सहारा है, तुम मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकती।”

इतना ही नहीं, आरोप है कि उसने मानवाधिकार संघ के व्हाट्सएप ग्रुप में महिला के खिलाफ अभद्र और अश्लील संदेश भी भेजे।

महिला की शिकायत को जांच के लिए आर्थिक अपराध शाखा (EOW) अंबाला भेजा गया। जांच में शिकायत सही पाई गई। इसके बाद पुलिस ने आरोपी आनंद गिरी उर्फ आनंद पंडित और मनीष मिश्रा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं में केस दर्ज कर लिया।

पुलिस ने धारा 316(2), 318(4), 338, 336(3), 340(2) और 61(2) के तहत थाना नारायणगढ़ में मुकदमा नंबर 155 दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।