कैमरे पर सिंडिकेट का खुलासा, 15 करोड़ की डील में ‘कट’ तय

खोजी रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल में कथित सिंडिकेट सिस्टम का खुलासा हुआ है, जिसमें जमीन सौदों में नेता और माफिया की हिस्सेदारी और कैश लेन-देन के आरोप सामने आए हैं।

कैमरे पर सिंडिकेट का खुलासा, 15 करोड़ की डील में ‘कट’ तय

15 करोड़ की जमीन डील में ‘कट’ का खुलासा, कैमरे पर माफिया का दावा
नेता, पुलिस और सिंडिकेट की हिस्सेदारी का आरोप, कैश में लेन-देन
पश्चिम बंगाल में संगठित नेटवर्क का दावा, बड़े प्रोजेक्ट्स पर कंट्रोल


नई दिल्ली से सामने आई एक खोजी रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल में कथित ‘सिंडिकेट सिस्टम’ का चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। हिडन कैमरे पर रिकॉर्ड बातचीत में जमीन के सौदे के बदले नेताओं, माफिया और स्थानीय तंत्र की हिस्सेदारी की बात सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, करीब 15 करोड़ 60 लाख रुपए की जमीन डील में अलग-अलग स्तर पर रकम तय होती है, जिसमें प्रति कट्ठा के हिसाब से नेता और सिंडिकेट को भुगतान करने की बात कही गई।

जांच के दौरान रिपोर्टर ने खुद को एक कंसल्टेंसी कंपनी का सदस्य बताकर सिंडिकेट से जुड़े लोगों से मुलाकात की। बातचीत में सामने आया कि जमीन खरीदने के बाद निर्माण कार्य शुरू करने से पहले स्थानीय ‘सिंडिकेट’ से अनुमति लेना जरूरी होता है। दावा किया गया कि यदि तय रकम नहीं दी गई तो प्रोजेक्ट में बाधा डाली जाती है, मजदूरों को रोका जाता है और काम रुकवा दिया जाता है।

एक बातचीत में आरोप लगाया गया कि साढ़े छह बीघा जमीन पर करीब 1 करोड़ रुपए नेता को और लगभग 40 लाख रुपए सिंडिकेट/माफिया को देने होंगे। इसके बदले निर्माण से जुड़े सभी ‘झमेले’ संभालने का आश्वासन दिया जाता है। बातचीत में यह भी कहा गया कि निर्माण सामग्री जैसे बालू, गिट्टी और सीमेंट भी सिंडिकेट से ही खरीदनी होगी, अन्यथा काम नहीं चल पाएगा।

रिपोर्ट में सामने आया कि कई लोग खुद को स्थानीय प्रभावशाली नेटवर्क का हिस्सा बताते हुए यह दावा कर रहे हैं कि उनके जरिए ही जमीन खरीद, निर्माण और सुरक्षा से जुड़े सभी काम संभव हैं। कुछ बातचीत में यह भी आरोप लगाया गया कि इस सिस्टम में स्थानीय स्तर से लेकर बड़े पदों तक हिस्सेदारी जाती है, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।

एक अन्य बातचीत में यह भी कहा गया कि किसी भी बड़े प्रोजेक्ट को शुरू करने से पहले ‘सिंडिकेट’ की अनुमति जरूरी है। अनुमति मिलने के बाद किसी तरह की प्रशासनिक या राजनीतिक बाधा नहीं आती। भुगतान का अधिकांश हिस्सा कैश में करने की बात कही गई, जिससे इस पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठते हैं।

इस रिपोर्ट ने राज्य में जमीन कारोबार और निर्माण क्षेत्र में कथित तौर पर चल रहे समानांतर नेटवर्क पर बहस तेज कर दी है। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना अभी बाकी है।