उचाना विधानसभा चुनाव 2024 में रिजेक्ट वोटों की रिकाउंटिंग पर हाईकोर्ट में आज सुनवाई

उचाना विधानसभा चुनाव 2024 में 32 वोट से हारने वाले कांग्रेस प्रत्याशी बृजेंद्र सिंह की रिजेक्ट वोटों की दोबारा गिनती की याचिका पर आज पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। भाजपा विधायक देवेंद्र अत्री ने याचिका की वैधता पर आपत्ति जताई है।

उचाना विधानसभा चुनाव 2024 में रिजेक्ट वोटों की रिकाउंटिंग पर हाईकोर्ट में आज सुनवाई


➤ 32 वोटों से हारे कांग्रेस प्रत्याशी बृजेंद्र सिंह ने याचिका में की दोबारा गिनती की मांग
➤ भाजपा विधायक देवेंद्र अत्री की ओर से याचिका की वैधता पर आपत्ति दर्ज


हरियाणा की उचाना विधानसभा सीट से जुड़े चुनाव विवाद पर आज पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में अहम सुनवाई होनी है। यह मामला बेहद संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि 2024 विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी देवेंद्र अत्री ने कांग्रेस उम्मीदवार बृजेंद्र सिंह को मात्र 32 वोटों से हराया था।

बृजेंद्र सिंह ने मार्च 2025 में हाईकोर्ट में इलेक्शन पिटिशन दायर करते हुए कहा था कि उचाना सीट पर जीत-हार का अंतर 32 वोटों का था, जबकि इस चुनाव में 215 वोट रिजेक्ट या कैंसिल हुए थे। उनका तर्क है कि जब रिजेक्ट वोटों की संख्या जीत-हार के अंतर से अधिक होती है, तो रिटर्निंग ऑफिसर को उनकी दोबारा जांच करनी चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।

कांग्रेस प्रत्याशी के आरोप: बृजेंद्र सिंह का आरोप है कि इनमें से करीब 150 वोट केवल स्कैनिंग न होने की वजह से रिजेक्ट कर दिए गए। उनका कहना है कि यदि पोस्टल बैलेट का स्कैनर काम न करे तो उस लिफाफे को खोलकर निर्धारित प्रक्रिया से वोट गिने जाते हैं, लेकिन गिनती के दौरान यह प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। उनका दावा है कि यदि इन वोटों की गिनती होती, तो नतीजा बदल सकता था।

भाजपा विधायक का पक्ष: दूसरी ओर, भाजपा विधायक देवेंद्र अत्री के वकील और सीनियर एडवोकेट ने अदालत में दलील दी कि बृजेंद्र सिंह की संशोधित याचिका CPC के आदेश 7 नियम-11 के तहत सुनने योग्य नहीं है। उन्होंने कोर्ट से कहा कि यह याचिका तकनीकी आधार पर खारिज की जानी चाहिए।

सुनवाई का सिलसिला: इस मामले पर 18-19 अगस्त को भी हाईकोर्ट में सुनवाई हुई थी। तब देवेंद्र अत्री की ओर से तारीख बढ़ाने की मांग की गई थी, लेकिन कोर्ट ने इसे ठुकरा दिया। हाईकोर्ट ने साफ कहा था कि इस केस को प्राथमिकता दी जाएगी और बेवजह की देरी बर्दाश्त नहीं होगी। इसके बाद 26 अगस्त को सुनवाई हुई और बहस के लिए आज 1 सितंबर की तारीख तय की गई थी।

अब देखना यह है कि हाईकोर्ट रिजेक्ट वोटों की रिकाउंटिंग का आदेश देता है या भाजपा विधायक की दलील को मानते हुए याचिका को खारिज करता है। फैसले का असर न केवल उचाना बल्कि हरियाणा की राजनीति पर भी गहरा पड़ सकता है।