वन विभाग कार्यालय के गेट पर किसानों का धरना, 70 गायों को बंधक बनाने का आरोप

साढौरा वन विभाग कार्यालय में करीब 70 गायों को बंधक बनाने के आरोप पर किसानों ने धरना दिया। रात साढ़े 10 बजे गायें छोड़ी गईं।

वन विभाग कार्यालय के गेट पर किसानों का धरना, 70 गायों को बंधक बनाने का आरोप

70 गायों को वन विभाग कार्यालय में बंधक बनाने का आरोप

किसानों ने गेट पर दरी बिछाकर शुरू किया धरना, रात साढ़े 10 बजे गायें छोड़ी गईं

वन विभाग बोला- पौधे चरने के कारण गायों को परिसर में बंद किया था


साढौरा। साढौरा वन विभाग कार्यालय के गेट पर रविवार देर शाम भाकियू चढ़ूनी ग्रुप के प्रदेश उपाध्यक्ष संजीव सैनी के नेतृत्व में किसानों ने दरी बिछाकर धरना शुरू कर दिया। किसानों का आरोप था कि वन विभाग कर्मचारियों ने चरवाहों की करीब 70 गायों को दोपहर दो बजे से भूखे-प्यासे वन विभाग कार्यालय परिसर में बंधक बना रखा था।

करीब साढ़े तीन घंटे तक चले धरने के बाद रात करीब साढ़े 10 बजे गायों को बाहर निकाल दिया गया। मामले की जानकारी मिलने पर मौके पर गौरक्षा दल और साढौरा पुलिस भी पहुंच गई। गायों को बाहर निकाले जाने के बाद किसानों ने अपना धरना समाप्त कर दिया।

सूचना मिलते ही वन विभाग कार्यालय पहुंचे संजीव सैनी

भाकियू चढ़ूनी ग्रुप के प्रदेश उपाध्यक्ष संजीव सैनी ने बताया कि उन्हें सूचना मिली थी कि वन विभाग कर्मचारियों ने चरवाहों की करीब 70 गायों को दोपहर दो बजे से बंधक बना रखा है। सूचना मिलने के बाद वह मौके पर पहुंचे।

संजीव सैनी के अनुसार, जब वह वन विभाग कार्यालय पहुंचे तो कर्मचारियों ने गेट पर ताला लगा रखा था और मिलने के लिए कोई बाहर नहीं आया। उन्होंने आरोप लगाया कि गायें भूखी-प्यासी थीं। शाम के समय गायों का दूध निकालने का समय होता है, लेकिन गायों के परिसर में बंद होने के कारण दूध भी नहीं निकाला जा सका।

गाय मालिकों का आरोप- चरवाहों को लट्ठ मारकर भगाया

गाय मालिक इसरान, गफूर और अकरम ने बताया कि वे साढौरा तहसील परिसर के पास यासीन माजरी नदी पार खाली पड़ी जमीन में डेरे लगाकर गायों को रखते हैं। रविवार को वे अपने बीमार रिश्तेदार को देखने के लिए चंडीगढ़ पीजीआइ गए थे।

गाय मालिकों के मुताबिक, उन्होंने गायों को चराने के लिए दिहाड़ी पर दो युवकों को छोड़ रखा था। उनका आरोप है कि वन विभाग कर्मचारियों ने वन भूमि में लगाए गए पौधों को गायों द्वारा चरने के आरोप में दोनों युवकों को लट्ठ मारकर वहां से भगा दिया और गायों को वन विभाग कार्यालय परिसर में बंधक बना लिया।

गाय मालिकों ने एक गाय की टांग तोड़ने का भी आरोप लगाया। उनका कहना था कि उन्होंने गायों को छोड़ने के लिए काफी गुहार लगाई, लेकिन इसके बावजूद उन्हें अंदर बंद कर गेट पर ताला लगा दिया गया।

किसानों ने कहा- गायों को पानी भी नहीं पीने दिया

गाय मालिकों ने आरोप लगाया कि नदी में गायों को पानी भी नहीं पिलाने दिया जाता। उनका कहना था कि गायों को लंबे समय तक बंद रखने से उनकी परेशानी बढ़ गई थी।

इसी को लेकर किसानों ने वन विभाग कार्यालय के गेट पर धरना शुरू किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए मौके पर गौरक्षा दल और साढौरा पुलिस भी पहुंच गई।

वन विभाग ने कहा- पौधे चरने के कारण गायों को किया बंद

वहीं वन विभाग के दारोगा बलबीर ने गायों को परिसर में बंद किए जाने को लेकर अलग पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि वन भूमि में लगाए गए पौधे गायों ने चर लिए थे, जिसके चलते उन्हें परिसर में बंद किया गया था।

दारोगा बलबीर के अनुसार, चरवाहों से आधार कार्ड मांगे गए थे और आधार कार्ड देने पर गायों को छोड़ने की बात कही गई थी। हालांकि, चरवाहों ने आधार कार्ड नहीं दिए।

रात साढ़े 10 बजे गायों को बाहर निकाला गया

मामले को लेकर वन विभाग कार्यालय के बाहर किसानों का धरना करीब साढ़े तीन घंटे तक चला। इस दौरान गायों को लेकर किसानों और वन विभाग के बीच विवाद की स्थिति बनी रही।

आखिरकार रात करीब साढ़े 10 बजे गायों को वन विभाग कार्यालय परिसर से बाहर निकाल दिया गया। गायों के बाहर निकलने के बाद किसानों ने अपना धरना समाप्त कर दिया।