लाल किला धमाका: डॉक्टरों और प्रोफेसरों से जुड़ा जैश-ए-मोहम्मद का नया वाइट कॉलर मॉड्यूल बेनकाब, हरियाणा में रची थी साजिश

लाल किला धमाके के पीछे जैश-ए-मोहम्मद का वाइट कॉलर मॉड्यूल उजागर हुआ। डॉक्टर, प्रोफेसर और महिला सदस्य शामिल, फरीदाबाद से पुलवामा तक फैला नेटवर्क।

लाल किला धमाका: डॉक्टरों और प्रोफेसरों से जुड़ा जैश-ए-मोहम्मद का नया वाइट कॉलर मॉड्यूल बेनकाब, हरियाणा में रची थी साजिश
  • लाल किला धमाके के पीछे निकला जैश-ए-मोहम्मद का वाइट कॉलर मॉड्यूल

  • मॉड्यूल में शामिल थे डॉक्टर, प्रोफेसर और महिला सदस्य, पाक हैंडलर्स से सीधा संपर्क

  • फरीदाबाद, पुलवामा और सहारनपुर से जुड़ा नेटवर्क, कई गिरफ्तारियाँ हुईं


नई दिल्ली। 10 नवंबर को लाल किला के पास हुए धमाके की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। सुरक्षा एजेंसियों ने बताया कि इसके पीछे जैश-ए-मोहम्मद का नया वाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल काम कर रहा था। यह मॉड्यूल मेडिकल प्रोफेशन और शैक्षणिक संस्थानों की आड़ में आतंक फैलाने का नेटवर्क बना रहा था। इसमें डॉक्टर, प्रोफेसर और महिला सदस्य शामिल थीं, जो पाकिस्तानी हैंडलर्स के सीधे संपर्क में थीं।

जांच से पता चला है कि यह नेटवर्क हरियाणा के फरीदाबाद, जम्मू-कश्मीर के पुलवामा और यूपी के सहारनपुर से जुड़ा हुआ था। इसकी शुरुआत धमाके से 37 दिन पहले 4 अक्टूबर को सहारनपुर में एक शादी से हुई थी।

एजेंसियों की जांच में सामने आया कि मॉड्यूल डॉ. आदिल की शादी डॉ. रुकैया से होने के बाद सक्रिय हुआ। शादी में कुछ “खास मेहमान” शामिल थे, जिनकी पहचान की जा रही है। शादी के अगले दिन ही इस नेटवर्क ने फौजियों को धमकाने वाले पोस्टर लगाने, हथियारों और फंडिंग की व्यवस्था शुरू कर दी।

डॉ. आदिल नेटवर्क का लॉजिस्टिक और फाइनेंशियल चैनल संभाल रहा था। इस मॉड्यूल की योजना मेडिकल सेक्टर की आड़ में फंडिंग और ट्रांसपोर्टेशन चैनल तैयार करने की थी।

पहला सुराग तब मिला जब 19 अक्टूबर को कश्मीर के नौगाम इलाके में जैश के पोस्टर दिखे। इसके बाद 27 अक्टूबर को 25 से अधिक पोस्टर लगे। पुलिस ने 50 अधिकारियों की टीम गठित कर 60 CCTV फुटेज खंगाले। 31 अक्टूबर को डॉ. आदिल पोस्टर वाले इलाकों में घूमता दिखाई दिया।

फोन सर्विलांस में पता चला कि वह पाकिस्तानी हैंडलर्स से संपर्क में था। उसकी लोकेशन सहारनपुर मिली और 6 नवंबर को उसे गिरफ्तार कर लिया गया। उसके पास से AK-47, ग्रेनेड और विस्फोटक बरामद हुए।

पूछताछ में उसने बताया कि फरीदाबाद में प्रोफेसर डॉ. मुजम्मिल के पास भारी मात्रा में विस्फोटक है। इसके बाद 9 नवंबर को जम्मू-कश्मीर पुलिस ने फरीदाबाद से मुजम्मिल को गिरफ्तार कर लिया।

कश्मीर के पुलवामा जिले के कोइल गांव के दो डॉक्टर—डॉ. मुजम्मिल और डॉ. उमर नबी—साथ पढ़े, साथ डॉक्टर बने और फिर आतंक के रास्ते पर चल पड़े। अब मुजम्मिल गिरफ्तार है जबकि उमर धमाके में मारा गया।

गांव के लोग सदमे में हैं। उमर के बहनोई ने बताया कि उसने आखिरी बार शुक्रवार दोपहर फोन किया था और कहा था कि वह चार दिन में लौटेगा। ग्रामीणों का कहना है कि “जिन पर कभी गर्व था, आज उन्हीं की वजह से शर्मिंदगी है।”

इस नेटवर्क की सबसे प्रमुख सदस्य डॉ. शाहीन सईद बताई जा रही है। वह जैश सरगना मसूद अजहर की बहन सादिया अजहर से सीधा संपर्क रखती थी और महिला आतंकी विंग ‘जमात-उल-मोमिनात’ से जुड़ी थी।

शाहीन को फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी से गिरफ्तार कर श्रीनगर ले जाया गया। उसने इलाहाबाद मेडिकल कॉलेज से MBBS और कानपुर मेडिकल कॉलेज में सात साल तक असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में काम किया था। 2021 में वह नौकरी छोड़कर गायब हो गई थी।

बाद में वह डॉ. मुजम्मिल के संपर्क में आई और पाक हैंडलर्स के निर्देश पर महिलाओं को कट्टरपंथ की राह पर लाने लगी। अब यूपी ATS ने उसके भाई डॉ. परवेज को लखनऊ से गिरफ्तार किया है, जो इंटीग्रल मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर था।