पितृपक्ष का पहला दिन आज, पूर्वजों को तर्पण और पिंडदान का महत्व
आज से पितृपक्ष की शुरुआत हुई। प्रतिपदा तिथि पर उन पितरों का श्राद्ध होता है जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं। पंचक का प्रभाव होने से शुभ कार्य वर्जित, पूर्वजों के आशीर्वाद हेतु श्राद्ध, तर्पण और दान का महत्व।
✔️ आज से पितृपक्ष की शुरुआत, पूर्वजों के लिए श्राद्ध और तर्पण का विशेष महत्व
✔️ प्रतिपदा तिथि पर उन पितरों का श्राद्ध जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं
✔️ पंचक का प्रभाव पूरे दिन, शुभ कार्यों को करने से परहेज
आज आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि है और इसी के साथ पितृपक्ष का आरंभ हो गया है। यह कालखंड हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान पितर पृथ्वी पर आते हैं और अपने वंशजों से श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान के माध्यम से संतुष्ट होकर आशीर्वाद देते हैं।
पितृपक्ष का पहला दिन इस बात का संकेत है कि अगले 15 दिनों तक हम अपने पूर्वजों को स्मरण कर उनके आशीर्वाद की कामना करें। आज की प्रतिपदा तिथि रात 9 बजकर 11 मिनट तक प्रभावी रहेगी, जिसके बाद द्वितीया तिथि शुरू होगी। इस दिन पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र रात 8 बजकर 2 मिनट तक और उसके बाद उत्तर भाद्रपद नक्षत्र प्रभावी रहेगा। दिन में धृति योग, उसके बाद शूल योग और अंत में गण्ड योग बन रहा है।
पंचक का प्रभाव पूरे दिन रहेगा, इसलिए गृह निर्माण, विवाह और यात्रा जैसे कार्यों को टालना शुभ माना गया है। साथ ही, दिशाशूल पूर्व दिशा में होने से इस दिशा की यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है।
पारंपरिक मान्यता के अनुसार, पितृपक्ष के पहले दिन उन पितरों का श्राद्ध किया जाता है जिनकी मृत्यु की तिथि ज्ञात नहीं होती या जिनका विधिवत श्राद्ध नहीं किया जा सका हो। विशेष रूप से मातृ पक्ष यानी नाना-नानी के पितरों का श्राद्ध इसी दिन किया जाता है।
श्राद्ध की प्रक्रिया में घर की शुद्धि कर गंगाजल का छिड़काव किया जाता है। शुद्ध वस्त्र धारण कर दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके कुशा, जल, तिल, जौ आदि से तर्पण किया जाता है। इस दिन ब्राह्मण भोज और दान का विशेष महत्व बताया गया है। दूध से बनी खीर, सफेद पुष्प, गंगाजल, सफेद वस्त्र, और शहद का उपयोग पितरों को प्रसन्न करने के लिए शुभ माना गया है। साथ ही पंचबलि, गोदान और अन्न दान करने से परिवार में सुख-समृद्धि आती है।
Akhil Mahajan