पानीपत में ताऊ के परिवार के हमले में घायल छात्र की मौत, 2 महीने बाद टूटी जिंदगी की डोर
पानीपत के बड़ौली गांव में ताऊ के परिवार के हमले में घायल 16 वर्षीय शेखर की दो महीने बाद रोहतक PGI में मौत हो गई। परिवार में मातम पसरा है।
पानीपत में ताऊ के परिवार के हमले में घायल 16 वर्षीय शेखर की 2 महीने बाद मौत
• दो बहनों का इकलौता भाई था शेखर, रोहतक PGI में चल रहा था इलाज
• लोडिंग टेंपो हटाने को लेकर हुआ विवाद खूनी संघर्ष में बदला
पानीपत जिले के गांव बड़ौली में करीब दो महीने पहले हुए जानलेवा हमले में गंभीर रूप से घायल 16 वर्षीय छात्र की मौत हो गई। छात्र पिछले दो महीने से जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा था और वेंटिलेटर पर भर्ती था। सोमवार शाम उसने रोहतक PGI में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। बेटे की मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
मृतक की पहचान गांव बड़ौली निवासी शेखर (16) पुत्र रामेश्वर दास के रूप में हुई है। वह 9वीं कक्षा का छात्र था और अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। परिवार में उसकी दो बड़ी बहनें हैं। शेखर की मौत से पूरे गांव में शोक का माहौल है।
जानकारी के अनुसार घटना 22 अप्रैल की शाम करीब 7:30 बजे की है। शेखर अपने पिता रामेश्वर दास के साथ गांव की गली से होकर घर लौट रहा था। इसी दौरान उनके ताऊ कृष्ण लाल और उसके परिवार के सदस्यों अजय, विजय, बिमला और लोकेशा ने उनका रास्ता रोक लिया।
बताया गया कि विवाद की शुरुआत गली में खड़े लोडिंग टेंपो को हटाने की बात को लेकर हुई थी। मामूली कहासुनी कुछ ही देर में गाली-गलौज और फिर हिंसक झगड़े में बदल गई। आरोप है कि ताऊ के परिवार ने लाठी-डंडों और ईंटों से पिता-पुत्र पर हमला कर दिया।
हमले में रामेश्वर दास के दोनों हाथों और कंधों पर गंभीर चोटें आई थीं। वहीं शेखर के सिर पर इंटरलॉकिंग सीमेंटेड ईंट से जोरदार वार किया गया। सिर पर गहरी चोट लगने के बाद वह लहूलुहान होकर मौके पर ही गिर पड़ा और बेहोश हो गया।
आरोप है कि हमलावरों ने रामेश्वर के लोडिंग टेंपो को भी क्षतिग्रस्त कर दिया था। घटना के बाद घायल शेखर को पहले स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, जहां से उसकी गंभीर हालत को देखते हुए रोहतक PGI रेफर कर दिया गया।
डॉक्टरों की निगरानी में शेखर का लगातार इलाज चलता रहा, लेकिन सिर में गंभीर चोट के कारण वह पिछले दो महीने से वेंटिलेटर पर था। चिकित्सकों के तमाम प्रयासों के बावजूद उसकी हालत में सुधार नहीं हो सका और 23 जून की शाम उसने अंतिम सांस ली।
दो बहनों के इकलौते भाई और माता-पिता के एकमात्र बेटे की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। गांव में भी घटना को लेकर गहरा शोक और आक्रोश देखा जा रहा है।
pooja