पानीपत में 7 लाख की साइबर ठगी,फर्जी वॉट्सऐप नंबर से अकाउंटेंट को बनाया निशाना

पानीपत में कपड़ा व्यापारी से 7 लाख रुपये की साइबर ठगी हुई। जिप फाइल से अकाउंटेंट के कंप्यूटर में सेंध के बाद फर्जी वॉट्सऐप नंबर से रकम ट्रांसफर कराई।

पानीपत में 7 लाख की साइबर ठगी,फर्जी वॉट्सऐप नंबर से अकाउंटेंट को बनाया निशाना

पानीपत के कपड़ा व्यापारी से साइबर ठगों ने 7 लाख रुपये हड़पे
जिप फाइल से अकाउंटेंट के कंप्यूटर में सेंध, मालिक के नाम से बनाया फर्जी वॉट्सऐप नंबर
बैंक स्टेटमेंट चेक करने पर खुला राज, 1930 पर शिकायत के बाद साइबर थाना पुलिस ने केस दर्ज किया

पानीपत के अंसल सुशांत सिटी निवासी कपड़ा व्यापारी अभिनंदन जैन के साथ 7 लाख रुपये की साइबर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। साइबर ठगों ने पहले व्यापारी की फर्म के अकाउंटेंट के कंप्यूटर में जिप फाइल के जरिए संदिग्ध वायरस भेजकर डेटा तक पहुंच बनाई। इसके बाद व्यापारी के नाम से फर्जी वॉट्सऐप नंबर तैयार किया और अकाउंटेंट को विश्वास में लेकर फर्म के बैंक खातों की जानकारी हासिल कर ली।

ठगों ने फर्जी वॉट्सऐप नंबर के जरिए अकाउंटेंट से बैंक खातों का बैलेंस पूछा और फिर 7 लाख रुपये अज्ञात बैंक खाते में ट्रांसफर करवा लिए। जब व्यापारी ने बाद में फर्म के बैंक खातों की स्टेटमेंट चेक की, तब पूरे मामले का खुलासा हुआ। पीड़ित ने तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद 20 सितंबर को साइबर थाना पुलिस पानीपत को लिखित शिकायत दी गई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

जिप फाइल के जरिए अकाउंटेंट के कंप्यूटर में पहुंचा संदिग्ध वायरस

अंसल सुशांत सिटी निवासी शिकायतकर्ता अभिनंदन जैन ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वह कपड़े का व्यापार करते हैं। उनकी फर्म में हासिम अंसारी अकाउंटेंट के तौर पर काम करते हैं।

शिकायत के मुताबिक, 11 अगस्त को अकाउंटेंट के वॉट्सऐप पर ग्वालियर (मध्य प्रदेश) की एक व्यावसायिक पार्टी के नाम से मैसेज आया। मैसेज के साथ एक जिप फाइल भेजी गई थी। इसमें कहा गया था कि फाइल को कंपनी के फाइनेंस मैनेजर के पास वेरिफिकेशन के लिए फॉरवर्ड करें और इसे कंप्यूटर पर खोलें।

मैसेज के अनुसार अकाउंटेंट ने जिप फाइल को फर्म का लेखा-जोखा रखने वाले मुख्य कंप्यूटर पर खोल दिया। इसके बाद साइबर ठगों को कंप्यूटर के डेटा तक पहुंच बनाने का मौका मिल गया और उन्होंने आगे की ठगी की तैयारी शुरू कर दी।

व्यापारी के नाम से बनाया फर्जी वॉट्सऐप नंबर

इसके बाद साइबर ठगों ने सोची-समझी साजिश के तहत 24 अगस्त को अकाउंटेंट के दूसरे मोबाइल नंबर की कांटेक्ट लिस्ट में व्यापारी अभिनंदन जैन के नाम से एक अज्ञात नंबर जोड़ दिया।

इसके बाद उसी फर्जी नंबर से वॉट्सऐप पर अकाउंटेंट को मैसेज भेजा गया। ठगों ने व्यापारी के नाम का इस्तेमाल करते हुए फर्म के बैंक खातों का बैलेंस पूछ लिया। अकाउंटेंट को इस बात का अंदाजा नहीं हुआ कि जिस नंबर से बातचीत हो रही है, वह असली व्यापारी का नंबर नहीं है।

फर्जी नंबर पर भरोसा करते हुए अकाउंटेंट ने फर्म के तीनों बैंक खातों के बैलेंस का स्क्रीनशॉट भेज दिया। इस तरह ठगों को खातों में मौजूद रकम की जानकारी मिल गई।

20 लाख रुपये जमा करने को कहा, खाते में 7.97 लाख देखकर बदली मांग

बैंक खातों की जानकारी मिलने के तुरंत बाद फर्जी नंबर से अकाउंटेंट को मैसेज भेजा गया। इसमें बैंक खाते में 20 लाख रुपये डालने को कहा गया।

हालांकि, अकाउंटेंट के पास जिस बैंक खाते का एक्सेस था, उसमें केवल 7,97,000 रुपये ही उपलब्ध थे। खाते में 20 लाख रुपये नहीं होने की जानकारी सामने आने पर ठग ने रकम घटाकर 7 लाख रुपये ट्रांसफर करने को कहा।

इसके बाद अकाउंटेंट ने ठग के कहने पर 7 लाख रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिए। रकम अज्ञात बैंक खाते में पहुंच गई।

18 सितंबर को बैंक स्टेटमेंट चेक करने पर खुला पूरा मामला

ठगी का पता तुरंत नहीं चल पाया। 18 सितंबर को जब व्यापारी अभिनंदन जैन ने अपनी फर्म के बैंक खातों की स्टेटमेंट चेक की, तब उन्हें 7 लाख रुपये के इस ट्रांजेक्शन की जानकारी मिली।

बैंक स्टेटमेंट देखने के बाद व्यापारी को समझ आया कि फर्म के खाते से रकम ट्रांसफर की गई है और उनके नाम का इस्तेमाल कर अकाउंटेंट से ठगी की गई। इसके बाद उन्होंने बिना देरी किए राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क किया और शिकायत दर्ज कराई।

20 सितंबर को साइबर थाना पुलिस को दी लिखित शिकायत

राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराने के बाद पीड़ित ने 20 सितंबर को साइबर थाना पुलिस पानीपत को लिखित शिकायत सौंपी।

पुलिस ने मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। साइबर ठगों ने किस तरह अकाउंटेंट के कंप्यूटर तक पहुंच बनाई और फर्जी वॉट्सऐप नंबर के जरिए बैंक खाते से रकम ट्रांसफर करवाई, इसकी जांच की जा रही है।

इस मामले में शुरुआत जिप फाइल खोलने से हुई और इसके बाद ठगों ने व्यापारी के नाम का इस्तेमाल करते हुए अकाउंटेंट से बैंक खातों की जानकारी हासिल की। अंत में इसी जानकारी के आधार पर 7 लाख रुपये की ऑनलाइन ठगी कर ली गई।