खैर कांड में बड़ा एक्शन: DFO समेत 3 अधिकारी सस्पेंड, 11 आरोपी गिरफ्तार

पंचकूला में खैर पेड़ों की अवैध कटाई मामले में DFO समेत 3 अधिकारियों को सस्पेंड किया गया, जबकि SIT अब तक 11 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है।

खैर कांड में बड़ा एक्शन: DFO समेत 3 अधिकारी सस्पेंड, 11 आरोपी गिरफ्तार

खैर पेड़ों की अवैध कटाई मामले में DFO सहित 3 अधिकारी निलंबित
अब तक 4 अफसरों पर कार्रवाई, 11 आरोपी गिरफ्तार
SIT जांच में सामने आया साइलेंट कटिंग का बड़ा खेल



पंचकूला। हरियाणा के पंचकूला में खैर पेड़ों की अवैध कटाई से जुड़े बड़े घोटाले में सरकार ने सख्त कार्रवाई करते हुए तीन वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह फैसला वन मंत्री राव नरबीर सिंह की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद लिया गया।

निलंबित किए गए अधिकारियों में वाइल्ड लाइफ DFO राजेंद्र प्रसाद डांगी, टेरिटोरियल DFO विशाल कौशिक और वाइल्ड लाइफ इंस्पेक्टर सुरजीत सिंह शामिल हैं। इससे पहले वन दरोगा रघुविंद्र सिंह को भी सस्पेंड किया जा चुका है, जिसे SIT ने गिरफ्तार कर लिया है। इस तरह अब तक इस मामले में कुल चार अधिकारियों पर कार्रवाई हो चुकी है।

सूत्रों के अनुसार, समीक्षा बैठक में मामले की गंभीरता को देखते हुए चरणबद्ध तरीके से निलंबन की कार्रवाई की गई। पहले इंस्पेक्टर सुरजीत सिंह को सस्पेंड किया गया, इसके बाद DFO राजेंद्र प्रसाद डांगी और अंत में DFO विशाल कौशिक को निलंबन आदेश जारी किए गए। सभी अधिकारियों को जांच पूरी होने तक मुख्यालय क्षेत्र में ही रहने के निर्देश दिए गए हैं।

यह पूरा मामला आसरेवाली संरक्षित वन क्षेत्र (वाइल्ड लाइफ सैंक्चुरी) से जुड़ा है, जहां खैर (कटच) के कीमती पेड़ों की बड़े पैमाने पर अवैध कटाई की गई। जांच में सामने आया है कि तस्करों ने साइलेंट कटर मशीनों का इस्तेमाल कर रातों-रात सैकड़ों से हजारों पेड़ों को काट दिया और लकड़ी को ऊंटों व अन्य माध्यमों से जंगल से बाहर निकाल लिया।

खैर की लकड़ी बाजार में बेहद महंगी मानी जाती है, जिसके कारण इस अवैध कारोबार में माफिया लंबे समय से सक्रिय बताया जा रहा है। इस पूरे मामले की जांच अब विशेष जांच दल (SIT) कर रहा है। SIT अब तक 11 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिनमें वन विभाग के कुछ कर्मचारी और तस्कर शामिल हैं।

जांच में यह भी सामने आया है कि वाइल्ड लाइफ विंग में स्टाफ की भारी कमी है। एक DFO के पास कई जिलों का जिम्मा होता है, जबकि सीमित संख्या में इंस्पेक्टर और गार्ड इतने बड़े क्षेत्र की निगरानी कर रहे हैं। ऐसे में संसाधनों की कमी भी इस तरह की घटनाओं को बढ़ावा देने का एक बड़ा कारण मानी जा रही है।

सरकार अब इस पूरे मामले में जिम्मेदारी तय करने और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने के मूड में है। आने वाले दिनों में इस केस में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।