हिमाचल के दिग्गज नेता मेजर विजय सिंह मनकोटिया का निधन, 87 साल की उम्र में ली अंतिम सांस
हिमाचल के पूर्व मंत्री मेजर विजय सिंह मनकोटिया का 87 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। शाहपुर से पांच बार विधायक और पर्यटन मंत्री रहे मनकोटिया को हार्ट अटैक आया था।
➤ हिमाचल प्रदेश के पूर्व मंत्री और दिग्गज नेता मेजर विजय सिंह मनकोटिया का 87 वर्ष की आयु में निधन
➤ शाहपुर विधानसभा क्षेत्र से पांच बार विधायक और राज्य सरकार में पर्यटन मंत्री रहे
➤ हार्ट अटैक के बाद तियारा में ली अंतिम सांस, राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर
हिमाचल प्रदेश की राजनीति से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। प्रदेश के दिग्गज नेता, पूर्व मंत्री और शाहपुर विधानसभा क्षेत्र से पांच बार विधायक रहे मेजर विजय सिंह मनकोटिया का निधन हो गया है। वह 87 वर्ष के थे। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने अपने तियारा स्थित निवास पर अंतिम सांस ली। उन्हें हार्ट अटैक आने की बात सामने आई है। उनके निधन की खबर के बाद कांगड़ा और हिमाचल प्रदेश के राजनीतिक हलकों में शोक की लहर दौड़ गई है।
मेजर विजय सिंह मनकोटिया का राजनीतिक सफर चार दशक से भी अधिक समय तक चला। वह शाहपुर विधानसभा सीट से कई बार विधानसभा पहुंचे और क्षेत्र की राजनीति में उनका खास प्रभाव रहा। उपलब्ध चुनावी रिकॉर्ड के मुताबिक उन्होंने 1982, 1985, 1990, 1993 और 2003 में शाहपुर से जीत दर्ज की। इस तरह वह कुल पांच बार विधायक चुने गए।
उनका राजनीतिक सफर भी काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा। वर्ष 1982 में उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर शाहपुर से पहला विधानसभा चुनाव जीता। इसके बाद 1985 में वह कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते। वर्ष 1990 में उन्होंने जनता दल के टिकट पर शाहपुर से जीत दर्ज की और 1993 में एक बार फिर कांग्रेस में लौटकर विधानसभा पहुंचे। 2003 में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर शाहपुर सीट दोबारा जीती।
मेजर विजय सिंह मनकोटिया ने विधानसभा राजनीति के साथ-साथ हिमाचल सरकार में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। वर्ष 1993 में वह तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की सरकार में पर्यटन और नागरिक उड्डयन मंत्री बने। भारतीय राजनीति पर प्रकाशित एक प्रोफाइल के मुताबिक, 1997 में उन्हें मंत्रिमंडल से हटा दिया गया था।
राजनीति में आने से पहले उनका संबंध भारतीय सेना से रहा था। उनके व्यक्तित्व में सैन्य पृष्ठभूमि की छाप साफ दिखाई देती थी। सार्वजनिक जीवन में वह अपने बेबाक अंदाज, स्पष्ट वक्तव्य और मुखर राजनीतिक शैली के लिए पहचाने जाते रहे। दशकों तक सक्रिय राजनीति में रहने के कारण हिमाचल की सियासत में उनकी एक अलग पहचान बनी रही।
मनकोटिया का नाम हिमाचल की राजनीति में कई बड़े राजनीतिक घटनाक्रमों से भी जुड़ा रहा। उन्होंने समय-समय पर अपनी ही पार्टी और सरकार के फैसलों पर सवाल उठाए। उनके राजनीतिक जीवन में दल बदल और अलग-अलग राजनीतिक मंचों से जुड़ने के दौर भी आए। वर्ष 2022 में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा था।
शाहपुर विधानसभा क्षेत्र के साथ उनका राजनीतिक रिश्ता कई दशकों तक बना रहा। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने शाहपुर से चुनाव लड़ा था, हालांकि उस चुनाव में वह जीत दर्ज नहीं कर सके। चुनावी रिकॉर्ड के अनुसार 2017 में वह निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में थे।
उनके निधन की खबर ऐसे समय सामने आई है, जब हाल के दिनों में भी उनका नाम पूर्व सैनिकों से जुड़े संगठनात्मक मामलों को लेकर सार्वजनिक चर्चाओं में आया था। 26 सितंबर 2026 की एक रिपोर्ट में पूर्व सैनिक लीग से जुड़े विवाद के बीच उनके हस्तक्षेप की मांग किए जाने का उल्लेख किया गया था।
मेजर विजय सिंह मनकोटिया के निधन से हिमाचल की राजनीति में एक लंबे दौर का अंत हुआ है। पांच बार विधायक और प्रदेश सरकार में मंत्री के रूप में उनकी राजनीतिक यात्रा कई दशकों तक चली। सेना से सार्वजनिक जीवन और फिर सक्रिय राजनीति तक का उनका सफर हिमाचल की राजनीतिक कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। उनके निधन की खबर से समर्थकों, राजनीतिक सहयोगियों और क्षेत्र के लोगों में शोक का माहौल है।
Akhil Mahajan