कंगना रणौत पर बठिंडा कोर्ट में आरोप तय, मानहानि केस में सुनवाई

बठिंडा कोर्ट ने सांसद कंगना रनोट के खिलाफ मानहानि मामले में आरोप तय किए। बुजुर्ग महिला से माफी के बावजूद केस जारी है। अब 4 दिसंबर को शिकायतकर्ता पक्ष जवाब दाखिल करेगा।

कंगना  रणौत पर बठिंडा कोर्ट में आरोप तय, मानहानि केस में सुनवाई

  • बठिंडा कोर्ट ने सांसद कंगना रनोट के खिलाफ मानहानि मामले में आरोप तय किए

  • बुजुर्ग महिला से निजी पेशी में माफी मांगने के बावजूद केस की सुनवाई जारी

  • 4 दिसंबर को शिकायतकर्ता पक्ष के वकील अदालत में जवाब दाखिल करेंगे



हिमाचल प्रदेश के मंडी से सांसद और फिल्म अभिनेत्री कंगना रनोट को बठिंडा कोर्ट से झटका लगा है। कोर्ट ने उनके खिलाफ मानहानि मामले में आरोप तय कर दिए हैं। इसके बाद अब इस मामले में बहस शुरू होगी। कंगना ने पिछली निजी पेशी के दौरान बुजुर्ग महिला से माफी मांगी थी, लेकिन अदालत ने केस की सुनवाई जारी रखी।

कंगना ने अपने खिलाफ चल रहे मामले में व्यक्तिगत पेशी से छूट मांगी थी, लेकिन इस पर अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया। अब 4 दिसंबर को शिकायतकर्ता के वकील अदालत में अपना जवाब पेश करेंगे।

कंगना के वकीलों ने 27 अक्टूबर को उनकी पेशी के दौरान आगे की सुनवाइयों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल होने की अनुमति मांगी थी। इस आवेदन की प्रति अदालत ने शिकायतकर्ता पक्ष को दी थी, जिसने जवाब दाखिल करने के लिए समय लिया था।

भाजपा सांसद कंगना रनोट 27 अक्टूबर को बठिंडा कोर्ट में पेश होते हुए।

मामला साल 2021 का है, जब किसान आंदोलन के दौरान कंगना ने बठिंडा की 87 वर्षीय किसान महिंदर कौर को 100 रुपए लेकर धरने में आने वाली महिला बताते हुए ट्वीट किया था। इस ट्वीट के बाद भारी विवाद हुआ और महिला ने कंगना के खिलाफ मानहानि का केस दर्ज कराया।

कंगना ने पिछली सुनवाई पर कोर्ट में माफी मांगते हुए कहा था कि "मिस अंडरस्टैंडिंग हुई है। मेरी ऐसी मंशा नहीं थी।" लेकिन महिला किसान ने उनकी माफी ठुकराते हुए कहा कि माफी का समय बहुत पहले निकल चुका है।

महिंदर कौर ने कहा कि कंगना ने उन्हें बदनाम किया और अब अदालत के आदेश पर उन्हें बठिंडा तक आना पड़ा। उन्होंने कहा कि "कानून सबके लिए बराबर है। चाहे अमीर हो या गरीब, सबको अदालत में पेश होना पड़ता है।"

4 जनवरी 2021 को मानहानि का केस दायर होने के बाद कंगना पहले हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक गईं, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली। अब उन्हें बठिंडा कोर्ट में नियमित पेश होना पड़ रहा है।