हाईकोर्ट से हरियाणा HPGC कर्मचारियों को बड़ा झटका, प्रमोशन किए रद्द
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा विद्युत उत्पादन निगम (HPGC) के IME सर्टिफिकेट के आधार पर दिए गए प्रमोशन को रद्द कर दिया। कोर्ट ने डिप्लोमा धारकों की वरिष्ठता बहाल की और 2019 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले की गलत व्याख्या पर HPGC की आलोचना की। मान्यता केवल केंद्र सरकार के रोजगार तक सीमित थी।
➤ पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने HPGC कर्मचारियों के IME सर्टिफिकेट आधारित प्रमोशन को रद्द किया
➤ कोर्ट ने डिप्लोमा धारक याचिकाकर्ताओं की वरिष्ठता बहाल की
➤ 2019 के सुप्रीम कोर्ट फैसले की गलत व्याख्या पर HPGC की आलोचना
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा विद्युत उत्पादन निगम (HPGC) के कर्मचारियों को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने एक मामले में मैकेनिकल इंजीनियर्स संस्थान (IME) से प्राप्त योग्यता के आधार पर प्रमोशन पाने वाले कर्मचारियों के प्रमोशन को रद्द कर दिया। जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने 40 पन्नों के विस्तृत फैसले में स्पष्ट किया कि IME का सर्टिफिकेट तीन वर्षों के नियमित इंजीनियरिंग डिप्लोमा की कानूनी शर्तों को पूरा नहीं करता।
यह फैसला सतपाल और अन्य बनाम हरियाणा राज्य से जुड़ी पांच याचिकाओं को एक साथ सुनने के बाद सुनाया गया। हाईकोर्ट ने डिप्लोमा धारक याचिकाकर्ताओं की वरिष्ठता बहाल कर दी है और साथ ही 2019 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले की गलत व्याख्या और देरी से लागू करने के लिए HPGC की आलोचना की।
मामला HPGC की 29 दिसंबर, 2004 की पदोन्नति नीति से जुड़ा था, जिसके तहत ऑपरेटर और फोरमैन के पदों का 15 प्रतिशत हिस्सा बीई/ए.एम.आई.ई या तीन वर्षीय इंजीनियरिंग डिप्लोमा धारकों के लिए आरक्षित था, बशर्ते उनके पास तीन वर्ष का अनुभव हो। याचिकाकर्ताओं ने प्लांट अटेंडेंट या टेक्नीशियन के तौर पर कार्य शुरू किया और बाद में डिप्लोमा हासिल करने के लिए बिना वेतन के अवकाश लिया।
जस्टिस बराड़ ने बताया कि कई याचिकाकर्ताओं ने डिप्लोमा हासिल करने के लिए तीन साल नौकरी से बाहर बिताए, जबकि निजी प्रतिवादियों ने दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रम के तहत प्रमाणपत्र प्राप्त किए, जिसमें उपस्थिति की कोई शर्त नहीं थी। यह प्रमाणपत्र केवल द्विवार्षिक परीक्षा में उत्तीर्ण होने पर जारी होता था। इसके बावजूद, 2016 में इसकी मान्यता सीमित कर दी गई थी।
अदालत ने स्पष्ट किया कि IME प्रमाणपत्र नियमित कक्षाएं संचालित करके तकनीकी शिक्षा प्रदान करने का दावा नहीं करता। 2012 में मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने इसे केवल केंद्र सरकार के रोजगार तक सीमित मान्यता दी थी। इस आधार पर कोर्ट ने कहा कि IME प्रमाणपत्र धारकों को प्रमोशन देना सुप्रीम कोर्ट के 2019 के फैसले की भावना और उद्देश्य का उल्लंघन है। अतः अदालत ने आदेश दिया कि IME सर्टिफिकेट धारकों के प्रमोशन रद्द किए जाएं और याचिकाकर्ताओं के पद बहाल किए जाएं।