हिमाचल में सरकारी कर्मचारियों के नियमितीकरण पर बड़ा फैसला, मार्च-सितंबर के अंतिम दिनों में नियुक्ति पाने वालों को राहत

हिमाचल प्रदेश सरकार ने मार्च और सितंबर में नियुक्त कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर नए निर्देश जारी किए हैं। जॉइनिंग के बीच की अवधि माफ मानी जाएगी।

हिमाचल में सरकारी कर्मचारियों के नियमितीकरण पर बड़ा फैसला, मार्च-सितंबर के अंतिम दिनों में नियुक्ति पाने वालों को राहत

मार्च-सितंबर के अंतिम दिनों में नियुक्त कर्मचारियों को नियमितीकरण में राहत
➤ 1 अप्रैल या 1 अक्टूबर को जॉइनिंग करने पर बीच की अवधि माफ मानी जाएगी
➤ वित्तीय लाभ वास्तविक जॉइनिंग या नियमितीकरण आदेश की प्रभावी तारीख से मिलेंगे

हिमाचल प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर सरकार ने महत्वपूर्ण फैसला लिया है। मार्च और सितंबर महीने के अंतिम दिनों में नियुक्ति पत्र पाने वाले कर्मचारियों को अब नियुक्ति और जॉइनिंग के बीच की अवधि को लेकर पहले जैसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

प्रदेश के कार्मिक विभाग ने 28 सितंबर 2026 को इस संबंध में नए निर्देश जारी किए हैं। नए निर्देशों के अनुसार, यदि किसी कर्मचारी को मार्च या सितंबर के अंतिम दिनों में नियुक्ति पत्र जारी होता है और वह अगले महीने की पहली तारीख यानी 1 अप्रैल या 1 अक्टूबर को अथवा नियुक्ति पत्र में निर्धारित अवधि के भीतर सेवा में शामिल हो जाता है, तो नियुक्ति पत्र जारी होने और कार्यभार संभालने के बीच की अवधि को नियमितीकरण की पात्रता के लिए माफ माना जाएगा।

क्या था पूरा मामला?

इससे पहले 6 अप्रैल 2022 को जारी निर्देशों में ऐसी परिस्थितियों को लेकर प्रावधान किया गया था, जब मार्च या सितंबर के अंतिम कार्य दिवस पर नियुक्ति पत्र जारी होने के बाद छुट्टियों के कारण कर्मचारी उसी महीने कार्यभार नहीं संभाल पाता था।

हालांकि, महीने के अंतिम दिनों में नियुक्ति पत्र जारी होने और उसके बाद अगले महीने की पहली तारीख को कर्मचारी के कार्यभार संभालने की स्थिति को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं थी। इसी वजह से नियमितीकरण की पात्रता की गणना को लेकर कर्मचारियों के सामने स्थिति बनी हुई थी।

इसी मामले में उच्च न्यायालय के ‘सपना कुमारी व अन्य बनाम हिमाचल प्रदेश सरकार’ मामले में 22 जुलाई 2025 को दिए गए फैसले के बाद स्थिति स्पष्ट हुई। सरकार ने इसी फैसले के अनुपालन में अब संशोधित निर्देश जारी किए हैं।

जॉइनिंग के बीच की अवधि माफ मानी जाएगी

नए निर्देशों के तहत मार्च या सितंबर के अंतिम दिनों में नियुक्ति पत्र पाने वाला कर्मचारी यदि 1 अप्रैल या 1 अक्टूबर को अथवा नियुक्ति पत्र में निर्धारित कार्यभार ग्रहण करने की समय सीमा के भीतर सेवा में शामिल होता है, तो नियुक्ति पत्र जारी होने और जॉइनिंग के बीच का समय नियमितीकरण के उद्देश्य से माफ माना जाएगा।

इस व्यवस्था में खास बात यह है कि नियुक्ति और जॉइनिंग के बीच की अवधि में सरकारी अवकाश रहा हो या नहीं, इससे कर्मचारी की नियमितीकरण पात्रता पर असर नहीं पड़ेगा।

इससे उन कर्मचारियों को राहत मिलेगी, जिन्हें महीने के अंतिम दिनों में नियुक्ति पत्र जारी होने के कारण अगले महीने की पहली तारीख या निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्यभार ग्रहण करना पड़ा था।

नियमितीकरण की गणना के लिए कट-ऑफ तारीख भी स्पष्ट

सरकार ने नियमितीकरण की पात्रता तय करने वाली कट-ऑफ तारीख को लेकर भी स्थिति स्पष्ट कर दी है। इसके लिए नियुक्ति आदेश जारी होने की तारीख अथवा मार्च या सितंबर का अंतिम दिन, जो भी बाद में हो, उसे आधार माना जाएगा।

इस व्यवस्था से उन कर्मचारियों के नियमितीकरण की पात्रता की गणना में राहत मिलने का रास्ता साफ हुआ है, जिन्हें महीने के अंतिम दिनों में नियुक्ति मिली थी और अगले महीने की शुरुआत में कार्यभार संभालना पड़ा था।

वित्तीय लाभ कब से मिलेंगे?

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जॉइनिंग और नियमितीकरण की पात्रता में दी गई राहत का मतलब यह नहीं है कि कर्मचारी को पिछली तारीख से सभी वित्तीय लाभ मिलेंगे।

वास्तविक वित्तीय लाभ वास्तविक जॉइनिंग की तारीख या विभाग की ओर से जारी नियमितीकरण आदेश की प्रभावी तारीख से ही देय होंगे। यानी नियमितीकरण की पात्रता की गणना में बीच की अवधि को माफ किए जाने और वित्तीय लाभ मिलने की तारीख को अलग-अलग माना जाएगा।

पुराने मामलों को दोबारा नहीं खोला जाएगा

नए निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जिन मामलों का पहले ही अंतिम रूप से निपटारा हो चुका है, उन्हें नए आदेश के आधार पर दोबारा नहीं खोला जाएगा।

वहीं, कार्मिक विभाग की ओर से 6 अप्रैल 2022 को जारी पिछला आदेश अब प्रभावी नहीं रहेगा। नए निर्देश उसी विषय में संशोधित व्यवस्था के तौर पर लागू होंगे।

इस फैसले से मार्च और सितंबर के अंतिम दिनों में नियुक्ति पत्र पाने वाले उन कर्मचारियों के लिए नियमितीकरण की पात्रता को लेकर स्थिति स्पष्ट हो गई है, जिन्हें नियुक्ति पत्र मिलने और सेवा में शामिल होने के बीच कुछ दिनों का अंतर रहा था।