SE गीतू राम की अग्रिम जमानत याचिका खारिज, जाट-झोटा टिप्पणी विवाद पर हाईकोर्ट सख्त

“जाट और झोटा” टिप्पणी विवाद में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने बिजली विभाग के SE गीतू राम तंवर की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति से संवैधानिक मर्यादा की अपेक्षा होती है।

SE गीतू राम की अग्रिम जमानत याचिका खारिज, जाट-झोटा टिप्पणी विवाद पर हाईकोर्ट सख्त

➤ “जाट और झोटा” टिप्पणी मामले में SE गीतू राम तंवर को हाईकोर्ट से बड़ा झटका
➤ पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका की खारिज
➤ कोर्ट बोला- सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति से संवैधानिक मर्यादा की अपेक्षा


सोनीपत में “जाट और झोटा” टिप्पणी विवाद में बिजली विभाग के सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर (SE) गीतू राम तंवर को बड़ा झटका लगा है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने बुधवार को उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।

हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए कहा कि किसी भी सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति से संवैधानिक मर्यादा, सामाजिक संवेदनशीलता और संयम की अपेक्षा की जाती है। अदालत ने साफ कहा कि शब्द केवल संवाद नहीं होते, बल्कि उनका समाज और लोगों की मानसिकता पर गहरा प्रभाव पड़ता है।

न्यायमूर्ति सुमीत गोयल की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान “स्पीच एक्ट थ्योरी” का उल्लेख भी किया गया। कोर्ट ने कहा कि किसी समुदाय विशेष के खिलाफ बोले गए शब्द समाज में तनाव और वैमनस्य पैदा कर सकते हैं।

 दूसरी बार लगाई थी अग्रिम जमानत याचिका

गीतू राम तंवर की ओर से यह दूसरी अग्रिम जमानत याचिका दायर की गई थी। इससे पहले अप्रैल 2026 में दाखिल पहली याचिका वापस ले ली गई थी। बाद में निचली अदालत से राहत न मिलने के बाद फिर हाईकोर्ट में याचिका लगाई गई।

हालांकि हाईकोर्ट ने इस बार भी राहत देने से इनकार कर दिया।

क्या है पूरा विवाद?

पूरा मामला उस वायरल वीडियो से जुड़ा है, जिसमें बिजली विभाग के SE गीतू राम तंवर कथित तौर पर “जाट और झोटा” जैसी टिप्पणी करते दिखाई दिए थे। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया था।

सोनीपत के एडवोकेट प्रणय दीप सिंह की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया। शिकायत में आरोप लगाया गया कि वीडियो में जाति विशेष के खिलाफ अपमानजनक और भड़काऊ भाषा का इस्तेमाल किया गया, जिससे सामाजिक वैमनस्य फैलने का खतरा पैदा हुआ।

पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196(1) के तहत केस दर्ज किया था।

 बचाव पक्ष ने क्या कहा?

गीतू राम तंवर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट में दलील दी कि उन्हें विभागीय रंजिश और निजी दुश्मनी के चलते फंसाया गया है।

बचाव पक्ष ने कहा कि वीडियो दिसंबर 2025 का है और उसे कई महीनों बाद जानबूझकर वायरल किया गया। यह भी दावा किया गया कि वीडियो में AI और डिजिटल एडिटिंग के जरिए छेड़छाड़ की गई हो सकती है।

इसके अलावा यह दलील भी दी गई कि कथित बातचीत “बंद कमरे” में सीमित लोगों के बीच हुई थी, इसलिए इसे सांप्रदायिक तनाव फैलाने का मामला नहीं माना जा सकता।

सरकार ने कोर्ट में क्या कहा?

हरियाणा सरकार की ओर से पेश एएजी ने कोर्ट में कहा कि मामला बेहद गंभीर है। वीडियो वायरल होने के बाद इलाके में रोष और तनाव का माहौल पैदा हुआ।

सरकार ने अदालत को बताया कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, रिकॉर्डिंग के स्रोत तथा अन्य लोगों की भूमिका की जांच के लिए हिरासत में पूछताछ जरूरी है।

 हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

हाईकोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री से स्पष्ट है कि बातचीत में एक विशेष समुदाय के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया गया।कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि सिर्फ यह तर्क कि “कस्टोडियल इंटरोगेशन जरूरी नहीं” है, अग्रिम जमानत देने का आधार नहीं बन सकता। अदालत को आरोपों की गंभीरता और उनके सामाजिक प्रभाव को भी देखना होता है। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने गीतू राम तंवर की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।