हांसी पुलिस की बड़ी उपलब्धि: 48 घंटे में प्रॉपर्टी डीलर के ब्लाइंड मर्डर का खुलासा, डीजीपी ने घोषित किया इनाम
हांसी पुलिस ने प्रॉपर्टी डीलर के ब्लाइंड मर्डर केस को 48 घंटे में सुलझाकर मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया, डीजीपी ने टीम को इनाम देने की घोषणा की।
➤ बिना किसी प्रत्यक्ष सुराग के 48 घंटे में हत्याकांड का खुलासा
➤ वैज्ञानिक जांच से टूटी साजिश की परतें, मुख्य आरोपी गिरफ्तार
➤ 15 टीमों की कार्रवाई पर पुलिस को ₹50 हजार इनाम व प्रशंसा पत्र
जब एक हत्या के बाद कोई प्रत्यक्ष सुराग न मिले, न सीसीटीवी फुटेज हाथ लगे और न ही चश्मदीद सामने आएं, तो ऐसे मामलों को पुलिस की भाषा में ब्लाइंड मर्डर कहा जाता है। लेकिन हांसी पुलिस ने इस चुनौती को महज 48 घंटे में मात देकर यह साबित कर दिया कि अपराध कितना भी सुनियोजित क्यों न हो, कानून की पकड़ से बच नहीं सकता।
सेक्टर-6 हांसी स्थित कार्यालय में प्रॉपर्टी डीलर सुभाष चन्द्र की हत्या ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी थी। मामला बेहद संवेदनशील था और शुरुआती जांच में कोई ठोस सुराग सामने नहीं आया। बावजूद इसके, हांसी पुलिस ने धैर्य, तकनीक और सटीक रणनीति के बल पर इस हत्याकांड की परत-दर-परत सच्चाई उजागर कर दी।
इस उल्लेखनीय सफलता पर हरियाणा के पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने हांसी पुलिस टीम की खुलकर सराहना की और वैज्ञानिक तरीके से अपराध का खुलासा करने पर ₹50,000 नकद इनाम व प्रशंसा पत्र देने की घोषणा की।
डीजीपी बोले— यह सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, पुलिसिंग की मिसाल है
पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने कहा कि बिना किसी स्पष्ट सुराग के 48 घंटे में ब्लाइंड मर्डर सुलझाना हरियाणा पुलिस की पेशेवर दक्षता, अनुशासन और परिणामोन्मुखी सोच का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि पुलिस अधीक्षक हांसी के नेतृत्व में गठित टीमों ने सीमित संसाधनों के बावजूद जिस समन्वय और साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण से काम किया, वह काबिल-ए-तारीफ है। डीजीपी ने दो टूक कहा कि हरियाणा पुलिस अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति पर पूरी मजबूती से आगे बढ़ रही है।
हत्या की खबर मिलते ही हरकत में आई पुलिस
पुलिस अधीक्षक हांसी अमित यशवर्धन के अनुसार, 03 फरवरी 2026 को थाना शहर हांसी क्षेत्र में प्रॉपर्टी डीलर सुभाष चन्द्र की हत्या की सूचना मिली। मामला मिलते ही इसे सर्वोच्च प्राथमिकता पर लिया गया और जांच में एक पल की भी देरी नहीं की गई।
जहां खत्म हुईं उम्मीदें, वहीं से शुरू हुई वैज्ञानिक जांच
घटनास्थल पर पहुंची थाना शहर हांसी पुलिस, अपराध शाखा और सीन ऑफ क्राइम टीम ने हर छोटे-बड़े साक्ष्य को बारीकी से खंगाला। फॉरेंसिक तकनीक, तकनीकी विश्लेषण और डिजिटल साक्ष्यों के सहारे उस कहानी को जोड़ा गया, जो पहली नजर में अधूरी लग रही थी। पुलिस अधीक्षक स्वयं मौके पर पहुंचे और जांच टीमों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए।
15 टीमों ने एक साथ दबिश दी, टूटी साजिश की कड़ी
मृतक के परिजनों के बयान के आधार पर मामला दर्ज किया गया और आरोपियों की तलाश के लिए 15 विशेष पुलिस टीमें गठित की गईं। अलग-अलग दिशाओं में काम कर रही इन टीमों ने तकनीकी और मानवीय इनपुट को जोड़ते हुए जांच को निर्णायक मोड़ तक पहुंचाया।
भागने की कोशिश में घायल हुआ मुख्य आरोपी
05 फरवरी 2026 की रात पुलिस ने मुख्य आरोपी गुरमीत को चिन्हित कर घेराबंदी की। पुलिस को देखते ही आरोपी ने भागने का प्रयास किया, लेकिन कार्रवाई के दौरान वह घायल हो गया और फिलहाल उपचाराधीन है। पूछताछ में यह भी साफ हुआ कि इस वारदात में अन्य लोग भी शामिल हैं, जिनकी तलाश जारी है।
लूट की योजना से हत्या तक पहुंची साजिश
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी गुरमीत की कुछ माह पहले मध्य प्रदेश के छतरपुर में अन्य आरोपियों से दोस्ती हुई थी। घूमने-फिरने और पैसों की जरूरत ने उन्हें अपराध की ओर धकेला। मृतक सुभाष चन्द्र के नियमित आना-जाना और उनके आभूषणों की जानकारी के आधार पर लूट की योजना बनाई गई, जो अंततः हत्या में बदल गई।
साफ संदेश— अपराध की कोई जगह नहीं
हांसी पुलिस ने साफ किया है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और साक्ष्य-आधारित है। इस त्वरित कार्रवाई ने यह संदेश दिया है कि हरियाणा में अपराध कितना भी योजनाबद्ध क्यों न हो, कानून से बच पाना नामुमकिन है।
Akhil Mahajan