अब हिंदी के विद्यार्थी भी सीखेंगे Artificial Intelligence और Machine Learning; हिसार और हांसी क्षेत्र के 33 कॉलेज होंगे शामिल

गुजवि के हिंदी विभाग में इस सत्र से हिंदी और एआई विषय को नए पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। विद्यार्थियों को मशीन लर्निंग, एनएलपी और इंटर्नशिप का प्रशिक्षण मिलेगा।

अब हिंदी के विद्यार्थी भी सीखेंगे Artificial Intelligence और Machine Learning; हिसार और हांसी क्षेत्र के 33 कॉलेज होंगे शामिल
  • गुजवि में हिंदी और एआई का नया पाठ्यक्रम शुरू होगा
  • एमए हिंदी के चौथे सेमेस्टर में पढ़ाया जाएगा विषय
  • विद्यार्थियों को एआई तकनीकों के साथ इंटर्नशिप भी करवाई जाएगी

गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (गुजवि) ने बदलते डिजिटल दौर को देखते हुए बड़ा शैक्षणिक कदम उठाया है। विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में इस सत्र से विद्यार्थियों के लिए हिंदी व कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) विषय को नए पाठ्यक्रम के रूप में शामिल किया जाएगा। इस फैसले को विश्वविद्यालय के बोर्ड ऑफ स्टडीज से मंजूरी मिल चुकी है।

यह पाठ्यक्रम विश्वविद्यालय से संबद्ध हिसार और हांसी क्षेत्र के 33 कॉलेजों में लागू होगा, जहां एमए हिंदी की पढ़ाई करवाई जाती है। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार यह विषय एमए हिंदी के चौथे सेमेस्टर में पढ़ाया जाएगा। साथ ही विद्यार्थियों को इंडस्ट्री से जोड़ने के लिए इंटर्नशिप भी करवाई जाएगी।

विश्वविद्यालय की ओर से इसके लिए विभिन्न इंडस्ट्रीज का डाटा तैयार किया जा रहा है, ताकि विद्यार्थियों को तकनीकी और व्यावहारिक अनुभव मिल सके। इस कोर्स को दो क्रेडिट के ऐच्छिक पाठ्यक्रम के रूप में शामिल किया गया है।

हिंदी विभाग की इंचार्ज डा. गीतू धवन ने बताया कि इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को हिंदी भाषा और आधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता तकनीकों के अंतर्संबंध से परिचित कराना है। पाठ्यक्रम में विद्यार्थियों को एआई, मशीन लर्निंग, नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग, डीप लर्निंग जैसी आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी जाएगी।

इसके अलावा विद्यार्थियों को हिंदी कम्प्यूटिंग, यूनिकोड, वॉयस टाइपिंग, स्पीच रिकग्निशन और टेक्स्ट-टू-स्पीच तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा। पाठ्यक्रम को पूरी तरह डिजिटल युग की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

कोर्स में हिंदी साहित्य के डिजिटलीकरण, एआई आधारित लेखन उपकरण, चैटबॉट तकनीक, डिजिटल पुस्तकालय, इंटरनेट मीडिया और डिजिटल हिंदी जैसे विषयों को भी शामिल किया गया है। इसके साथ मशीन अनुवाद, एआई आधारित संपादन, मीडिया और शोध कार्यों में एआई की उपयोगिता पर विशेष अध्ययन कराया जाएगा।

विभागाध्यक्ष के अनुसार यह पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करेगा और हिंदी भाषा को तकनीकी रूप से और अधिक सशक्त बनाने में मदद करेगा। पाठ्यक्रम में एआई के नैतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभावों पर भी चर्चा की जाएगी, ताकि विद्यार्थी तकनीक के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलुओं को समझ सकें।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि एमए हिंदी में प्रवेश के लिए ऑनलाइन दाखिला प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। वहीं प्रो. राकेश कुमार बहमनी ने कहा कि यह कोर्स विद्यार्थियों में नई स्किल्स विकसित करेगा और उन्हें भविष्य में रोजगार तथा स्वरोजगार के अवसरों के लिए तैयार करेगा।