बेटा अरुण हरिद्वार जाने के लिए निकला और पुलिस ने मार दिया,हरियाणावी शूटर का परिवार बोला 'एनकाउंटर फर्जी'

दिशा पाटनी के घर फायरिंग के आरोपित हरियाणा के दो शूटरों को यूपी गाजियाबाद में एनकाउंटर में मार गिराया गया। परिवार ने इसे फर्जी बताते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की। रविंद्र का आपराधिक रिकॉर्ड है, अरुण की जांच जारी।

बेटा अरुण हरिद्वार जाने के लिए निकला और पुलिस ने मार दिया,हरियाणावी शूटर का परिवार बोला 'एनकाउंटर फर्जी'

➤ भिवानी की शिक्षिका मनीषा की मौत मामले की जांच सीबीआई कर रही है
➤ सीबीआई ने घटनास्थल, प्ले स्कूल, नर्सिंग कॉलेज और कई लोगों से साक्ष्य व पूछताछ की
➤ 3 सितंबर से टीम भिवानी में डेरा डाले, जांच जारी, अभी तक कोई खुलासा नहीं

गाजियाबाद/सोनीपत/बरेली, 17 सितंबर। बॉलीवुड अभिनेत्री दिशा पाटनी के घर बरेली में हुई फायरिंग की वारदात में शामिल बताए जा रहे हरियाणा के दो आरोपितों — रविंद्र (गांव काहनी, रोहतक) और अरुण (मयूर विहार, सोनीपत) — को यूपी के गाजियाबाद में संयुक्त पुलिस-एसटीएफ की कार्रवाई में मारा गया। हरियाणा STF, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और यूपी STF ने बुधवार शाम इस एनकाउंटर की जानकारी दी, लेकिन मृतक अरुण के परिजनों ने हत्या कर देने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई को फर्जी बताया है और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।


पुलिस का कहना है कि दोनों ही आरोपित बरेली के सिविल लाइंस इलाके में दिशा पाटनी के घर हुई फायरिंग में शामिल थे और उनकी गिरफ्तारी पर प्रत्यक्ष इनाम घोषित था — प्रत्येक के लिए 1,00,000 रुपये का इनाम जारी था। पुलिस ने घटनास्थल के CCTV फुटेज के आधार पर आरोपितों की पहचान की और गिरफ्तार करने के लिए तलाशी अभियान चला। वहीं, परिवार का कहना है कि अरुण कोई अपराधी नहीं था और वह उस दिन हरिद्वार जाने के इरादे से निकला था; परिजन दावा करते हैं कि किसी ने उसे बहला-फुसला कर साथ ले जाया और बाद में उसकी हत्या कर दी गई।


सोनीपत के मयूर विहार निवासी अरुण के बड़े भाई अंकुर और माता सविता ने पुलिस की कार्रवाई पर कई सवाल उठाए हैं। अंकुर ने कहा कि पुलिस द्वारा जारी की गई तस्वीरें उनके भाई की नहीं हैं और हेलमेट पहनने वाले युवक के चेहरे का जो फुटेज दिखाया गया है, वह उनके भाई जैसा नहीं है। उसने कहा कि अरुण शुगर का मरीज था और उसकी हालत अक्सर पीली-कमजोर रहती थी, जबकि एनकाउंटर के बाद के फोटो में युवक का रंग-सूरत सामान्य दिखाई दे रहा है। अंकुर ने यह भी कहा कि उनके भाई पर किसी मारपीट या अन्य आपराधिक मामले का रिकॉर्ड नहीं है, इसलिए इस तरह का बदनाम कर दिया जाना फर्जी है।

अरुण की मां सविता रोते हुए बताती हैं कि उनका बेटा पिछले पांच साल से मधुमेह का रोगी था और परिवार उसे बाहर काम पर नहीं भेजता था। करीब एक साल से अरुण डेयरी का काम कर रहा था और कुछ पशु रखकर दूध का व्यापार कर रहा था। सविता ने कहा कि बुधवार दोपहर को अरुण ने कहा था कि वह हरिद्वार जा रहा है और सुबह तक लौट आएगा। परिजनों के अनुसार, अरुण ने कभी किसी से झगड़ा नहीं किया और वह घर का छोटा बेटा था। पिता राजेंद्र सिंह ने कहा कि बुधवार रात दो पुलिसकर्मियों ने घर आकर नौकरी वेरिफिकेशन का बहाना बनाया और उसी रात उन्हें बेटे की मौत की खबर दी गई; वे ऐसे व्यवहार को अन्याय कहते हैं और उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं। परिवार ने आरोप लगाया कि उनके बेटे को किसी दोस्त ने बहलाकर ले गया था।


पुलिस ने बताया कि रविंद्र के खिलाफ हरियाणा के विभिन्न थानों में गंभीर धाराओं के तहत कम से कम पांच मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस सूत्रों के हवाले से बताया गया कि 20 दिसंबर 2024 को रविंद्र ने फतेहाबाद में पुलिस एस्कॉर्ट पर हमला कर अपराधी को छुड़ाने की कोशिश की थी, जिस पर उसे गंभीर धाराओं और आर्म्स एक्ट के तहत आरोपों के साथ दर्ज किया गया था। अरुण के खिलाफ पुलिस की ओर से जारी की गई जानकारी के मुताबिक उसकी जुड़े होने की शिनाख्त पर प्रारम्भिक जांच में संदिग्ध व कुख्यात अपराधियों के संपर्क की बात सामने आई है, लेकिन परिवार इसकी नकारताजी रही है और अरुण के सीधे आपराधिक रिकॉर्ड को लेकर विवाद बना हुआ है।


दिशा पाटनी के घर फायरिंग की घटना के बाद रोहित गोदारा व गोल्डी बराड़ नामक गैंग ने इससे संबंधित बयान और ऑडियो जारी कर घटना की जिम्मेदारी ली थी। खबरों में यह भी प्रकाशित हुआ कि ये गैंग पहले लॉरेंस बिश्नोई जैसे कुख्यातों के लिए काम कर चुके थे, हालांकि रोहित ने एक ऑडियो में कहा कि उसका नाम लॉरेंस के साथ न जोड़ा जाए। इसके अलावा फेसबुक पोस्ट में गोदारा गैंग ने कुछ बयान दिए, जिनमें उन्होंने कहा कि किसी ने सनातन धर्म का अपमान किया तो सख्त कार्रवाई होगी — इस तरह के संदेशों ने सार्वजनिक तौर पर मामले को और संवेदनशील बना दिया। घटना के कुछ दिन पहले दिशा पाटनी की बहन खुशबू पाटनी द्वारा कथावाचक अनिरुद्धाचार्य के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया भी आयी थी; यह संदर्भ भी घटनाक्रम के राजनीतिक-सांस्कृतिक पृष्ठभूमि को जोड़कर देखा जा रहा है।


प्रारम्भिक जांच में पुलिस ने घटनास्थल समेत कई जगहों के CCTV फुटेज का हवाला दिया है। कुछ फुटेज में दावा किया गया कि बाइक पर पीछे बैठा रविंद्र है और हेलमेट वाले पीछे बैठा युवक अरुण है। पुलिस ने इन फुटेजों को एक अहम सुराग बताया और उसी आधार पर दोनों आरोपितों को घटना से जोड़कर गाजियाबाद में ट्रैक कर रोकने का दावा किया। परिवार इन फुटेजों और पुलिस की तस्वीरों को भी खारिज कर रहा है।


परिवार ने केस की उच्चस्तरीय, पारदर्शी व निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा है कि स्थानीय स्तर पर हुई कार्रवाई संदिग्ध है और राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा फोरेंसिक जांच, मोबाइल कॉल डिटेल, मेडिकल/फोरेंसिक रिपोर्ट एवं CCTV फुटेज की स्वतंत्र समीक्षा होनी चाहिए। परिजन यह भी मांग कर रहे हैं कि अगर वास्तविकता में उनके बेटे के साथ अन्याय हुआ है तो दोषी अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाए।


पुलिस का कहना है कि दोनों के खिलाफ साक्ष्य व मामलों के आधार पर कार्रवाई की गई और एनकाउंटर सफलता के बाद दोनों के फोटो जारी कर स्थिति सार्वजनिक की गई। साथ ही पुलिस ने बताया है कि अरुण के आपराधिक संबंधों की जांच अभी जारी है और घटना से जुड़े अन्य साथियों की तलाश चल रही है। सरकार और पुलिस इस तरह के गंभीर अपराधों को लेकर कड़ा रुख़ दिखाने की बात कह रही हैं, पर एनकाउंटर पर उठ रहे सवालों के मद्देनजर पारदर्शिता और तेज़ जांच की मांग बढ़ गयी है।


यहाँ यह ध्यान देने योग्य है कि उच्च प्रोफ़ाइल कबीलाई कत्ल-आदत व बलात्कार/आतंकजन्य घटनाओं के बाद जब पुलिस सख्त कार्रवाई करती है, तब भी परिवारों की आशंकाएँ व न्याय की माँगें उठती रहती हैं। इस मामले में भी निहित संवेदनशीलता — एक तरफ फिल्म जगत से जुड़े सुरक्षा मुद्दे और दूसरी तरफ छोटे परिवारों की बदहाली व शिकायतें — सभी को न्यायिक रूप से संतुष्ट कराना चुनौती बनता जा रहा है।


दिशा पाटनी के घर पर फायरिंग का मामला पहले से ही तनावपूर्ण और संवेदनशील था; अब आरोपितों के एनकाउंटर के बाद बढ़े विवाद और परिवार के आरोपों के चलते मामले की सत्यनिष्ठ व उच्चस्तरीय जांच की माँग और ज़ोर पकड़ चुकी है। पुलिस ने कार्रवाई को न्यायोचित बताकर सफलता का दावा किया है, जबकि परिजन व कुछ सामाजिक जगत के लोग इसे लेकर संशय जता रहे हैं। आगे यह तय करेगा कि क्या जांच में सभी पहलुओं—CCTV, मोबाइल लोकेशन, फोरेंसिक साक्ष्य व गवाहों की जांच—को पारदर्शी तरीके से सामने रखा जाएगा और दोषियों व यदि कोई अनियमितता है तो जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई होगी या नहीं।