लिंग जांच का खुलासा,BAMS डॉक्टर समेत 3 गिरफ्तार, स्वास्थ्य विभाग की रेड

चरखी दादरी में कथित भ्रूण लिंग जांच के मामले में BAMS डॉक्टर समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया। सोनीपत स्वास्थ्य विभाग की रेड के बाद FIR दर्ज हुई और पुलिस ने जांच शुरू की।

लिंग जांच का खुलासा,BAMS डॉक्टर समेत 3 गिरफ्तार, स्वास्थ्य विभाग की रेड

चरखी दादरी में भ्रूण लिंग जांच के आरोप में BAMS डॉक्टर समेत 3 गिरफ्तार
➤ 1.20 लाख की मांग, एक लाख में सौदा तय होने का आरोप
➤ सोनीपत स्वास्थ्य विभाग की रेड के बाद पुलिस ने FIR दर्ज की

चरखी दादरी: हरियाणा के चरखी दादरी में कथित भ्रूण लिंग जांच के मामले में सोनीपत स्वास्थ्य विभाग ने अंतर-जिला कार्रवाई करते हुए तीन लोगों को पकड़ा है। इनमें BAMS महिला डॉक्टर, एक एक्स-रे टेक्नीशियन और एक रिसेप्शनिस्ट शामिल हैं।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, कथित तौर पर गर्भवती महिला के भ्रूण का लिंग बताने के लिए 1.20 लाख रुपये की मांग की गई थी। बातचीत के बाद सौदा एक लाख रुपये में तय होने का आरोप है। कार्रवाई के बाद सिटी चरखी दादरी थाना में आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई है।

सिविल सर्जन के नेतृत्व में हुई रेड

यह कार्रवाई सोनीपत सिविल सर्जन डॉ. अनुराधा जैन के नेतृत्व में की गई। सोनीपत स्वास्थ्य विभाग की टीम ने चरखी दादरी स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से कथित लिंग जांच के मामले में कार्रवाई की।

रेड में डॉ. दीपक कौशिक, नोडल अधिकारी पीसी-पीएनडीटी सोनीपत, डॉ. योगेश दहिया, नोडल अधिकारी पीसी-पीएनडीटी सोनीपत और डॉ. दीपक शर्मा, एमओ सोनीपत शामिल रहे।

कार्रवाई के दौरान डॉ. विभूति वत्स, एक्स-रे टेक्नीशियन रविंद्र और रिसेप्शनिस्ट प्रियादीप को पकड़ा गया।

BAMS डॉक्टर पर लिंग जांच कराने का आरोप

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, BAMS डॉक्टर डॉ. विभूति वत्स की भूमिका कथित तौर पर सामने आई है। आरोप है कि वह प्रधान अस्पताल में काम कर रही थीं और एक्स-रे टेक्नीशियन रविंद्र की मदद से कथित रूप से भ्रूण का लिंग बताने की प्रक्रिया में शामिल थीं।

विभाग की जांच के अनुसार, गर्भवती महिला का अल्ट्रासाउंड एक पंजीकृत केंद्र पर कराया गया था।

रजिस्टर्ड सेंटर पर कराया गया अल्ट्रासाउंड

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, कथित जांच के लिए गर्भवती महिला का अल्ट्रासाउंड सुविधा मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल स्थित पंजीकृत केंद्र पर कराया गया।

इसके लिए रेफरल स्लिप और फॉर्म-एफ की प्रक्रिया पूरी किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग ने जांच के दौरान एएनसी रजिस्टर के उचित रखरखाव को लेकर भी सवाल उठाए हैं।

1.20 लाख की मांग, एक लाख में सौदा तय होने का आरोप

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, कथित तौर पर भ्रूण का लिंग बताने के लिए 1.20 लाख रुपये की मांग की गई थी। बाद में बातचीत के बाद यह रकम एक लाख रुपये में तय होने का आरोप है।

जांच में सामने आया कि कथित सौदे के तहत पहले 40 हजार रुपये एडवांस लिए गए थे।

ऑनलाइन ट्रांसफर हुए 40 हजार रुपये

विभाग के अनुसार, कथित तौर पर 40 हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर किए गए। यह रकम डॉ. विभूति के किसी परिचित के PhonePe अकाउंट में भेजे जाने की बात सामने आई है।

बाकी 60 हजार रुपये अल्ट्रासाउंड के बाद दिए जाने का आरोप है।

स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई के दौरान कथित लेन-देन से संबंधित रकम भी बरामद किए जाने की जानकारी दी है।

फोन पर लिंग बताने का आरोप

स्वास्थ्य विभाग का आरोप है कि अल्ट्रासाउंड के बाद डॉ. विभूति वत्स ने फोन पर गर्भवती महिला से कथित तौर पर भ्रूण का लिंग बताया।

विभाग के अनुसार, फोन पर कथित तौर पर "वेरी गुड न्यूज, बॉय" कहा गया। इसके बाद टीम ने कार्रवाई करते हुए आरोपियों को पकड़ लिया।

तीनों के खिलाफ FIR दर्ज

स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई के बाद चरखी दादरी पुलिस को शिकायत दी गई। इसके आधार पर सिटी चरखी दादरी थाना में तीनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

अब पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि कथित गतिविधि में इनके अलावा और कितने लोग शामिल थे।

PC-PNDT एक्ट के तहत हुई कार्रवाई

स्वास्थ्य विभाग ने यह कार्रवाई PC-PNDT Act यानी Pre-Conception and Pre-Natal Diagnostic Techniques Act के तहत की है।

भारत में भ्रूण के लिंग की जांच करना और उसकी जानकारी देना कानूनन प्रतिबंधित है। स्वास्थ्य विभाग अब मामले से जुड़े दस्तावेज, कथित पैसों के लेन-देन और आरोपियों की भूमिका की जांच कर रहा है।

पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही मामले में आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।