भिवानी में गौग्रास के बाद 15 गायों की मौ*त का दावा, विधायक कार्यालय पर गौ रक्षा दल का धरना
भिवानी में गौग्रास के बाद 15 गायों की मौत का दावा, 37 का उपचार जारी। गौ रक्षा दल ने विधायक घनश्याम सर्राफ के कार्यालय के बाहर धरना दिया।
भिवानी में गौ रक्षा दल का विधायक घनश्याम सर्राफ के कार्यालय के बाहर धरना
➤ गौग्रास के कारण 15 गायों की मौत का दावा, 37 गायों का चल रहा उपचार
➤ प्रधान संजय परमार के नेतृत्व में प्रदर्शन, सरकार और प्रशासन के खिलाफ जताया रोष
भिवानी में गौग्रास खिलाने के बाद 15 गायों की मौत होने और 37 अन्य गायों के बीमार होने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। घटना से नाराज गौ रक्षा दल के सदस्यों ने रविवार को विधायक घनश्याम सर्राफ के कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ रोष जताते हुए गौवंश की मौतों के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग उठाई।
गौ रक्षा दल का आरोप है कि श्राद्ध पक्ष की अमावस्या पर गौसेवा और गौग्रास के नाम पर गायों को जरूरत से ज्यादा भोजन खिलाया गया। बार-बार अपील करने के बावजूद सीमित मात्रा से अधिक गौग्रास दिया गया, जिसके कारण गायों की हालत बिगड़ गई। दल के अनुसार, अब तक 15 गायों की मौत हो चुकी है, जबकि 37 अन्य गायों का उपचार चल रहा है।
जरूरत से ज्यादा रोटी, खीर और हलवा खिलाने का आरोप
गौ रक्षा दल के प्रधान संजय परमार ने कहा कि पितृ पक्ष की अमावस्या पर गौसेवा और गौग्रास के नाम पर अत्यधिक भोजन देना गौवंश के लिए जानलेवा साबित हुआ है। उनके अनुसार, गायों को जरूरत से ज्यादा रोटी, खीर, पुरी, हलवा और अन्य तला हुआ भोजन खिलाया गया। इसके बाद गायों की तबीयत बिगड़ी और अब तक 15 गायों की मौत हो गई।
उन्होंने कहा कि गौग्रास खिलाने के दौरान निर्धारित मात्रा का ध्यान रखना जरूरी है। धार्मिक आस्था और गौसेवा की भावना से भोजन देने वाले लोगों को यह समझना चाहिए कि जरूरत से ज्यादा खाना गायों के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
महम गेट स्थित गौशाला में 37 गायों का उपचार
गौ रक्षा दल के मुताबिक, इस घटना में बीमार हुई 37 अन्य गायों का भिवानी के महम गेट स्थित गौशाला में उपचार चल रहा है। गायों की मौत की खबर सामने आने के बाद शहर के गौसेवकों और गौरक्षकों में भारी नाराजगी है।
मृत गायों को लेकर गौ रक्षा दल के सदस्य प्रधान संजय परमार के नेतृत्व में रविवार को विधायक घनश्याम सर्राफ के आवास पर पहुंचे और धरना दिया। प्रदर्शन के दौरान सदस्यों ने सरकार और प्रशासन के प्रति नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि हर साल पितृ पक्ष की अमावस्या पर गौग्रास के नाम पर जरूरत से ज्यादा भोजन खिलाने की घटनाओं पर गंभीरता से ध्यान दिया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति पैदा न हो।
गौग्रास के नाम पर गायों की मौत कब रुकेगी?
गौ रक्षा दल ने सवाल उठाया कि जब हर साल पितृ पक्ष की अमावस्या पर गायों को गौग्रास खिलाया जाता है, तो भोजन की मात्रा और उसके प्रभाव को लेकर जागरूकता क्यों नहीं बढ़ाई जाती। दल का कहना है कि गौसेवा का उद्देश्य गौवंश की देखभाल करना है, न कि अनजाने में उन्हें नुकसान पहुंचाना।
प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से मामले पर जवाब देने और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने की मांग की। उनका सवाल है कि गौग्रास के नाम पर गायों की मौत का सिलसिला आखिर कब रुकेगा? इस मामले में प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर लोगों की नजर है।
Akhil Mahajan