एनवेश-2026 का निफ्टेम में भव्य आगाज: विकसित भारत के संकल्प में खाद्य प्रसंस्करण बनेगा गेमचेंजर- चिराग पासवान
सोनीपत के निफ्टेम कुंडली में एनवेश-2026 अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने विकसित भारत-2047 में खाद्य प्रसंस्करण की निर्णायक भूमिका पर जोर दिया।
■ विकसित भारत-2047 के लक्ष्य में खाद्य प्रसंस्करण की अहम भूमिका
■ कुंडली स्थित निफ्टेम में एनवेश-2026 का अंतरराष्ट्रीय शुभारंभ
■ 25 देशों के विशेषज्ञ, 1000 से अधिक प्रतिनिधियों की भागीदारी
सोनीपत के कुंडली स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फूड टेक्नोलॉजी एंटरप्रेन्योरशिप एंड मैनेजमेंट (NIFTEM) में “इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन एडवांस्ड नेक्स्ट जेनरेशन विजन फॉर इमर्जिंग एंड सस्टेनेबल हेल्दी फूड्स (एनवेश-2026)” का गुरुवार को भव्य शुभारंभ हुआ। तीन दिवसीय यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 26 से 28 फरवरी तक आयोजित किया जा रहा है, जिसमें 25 से अधिक देशों के विशेषज्ञ, शोधकर्ता, उद्योग प्रतिनिधि, निर्यातक, उद्यमी और नीति-निर्माता भाग ले रहे हैं।
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करते हुए कहा कि माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा परिकल्पित विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र निर्णायक भूमिका निभाएगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि 1.4 बिलियन की आबादी वाले देश में तकनीक आधारित विकास अनिवार्य है और नवाचार, अनुसंधान व आधुनिक तकनीकों को गांवों और किसानों तक पहुंचाना समय की मांग है, ताकि ग्रामीण और शहरी भारत के बीच की दूरी कम हो सके।
केंद्रीय मंत्री ने बदलती जीवनशैली का उल्लेख करते हुए कहा कि रेडी-टू-ईट और रेडी-टू-कुक उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है। भारत के पास कृषि उत्पादन की पर्याप्त मात्रा है, लेकिन अब मूल्य संवर्धन और गुणवत्ता मानकों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
उन्होंने याद दिलाया कि 11 वर्ष पूर्व भारत में निर्मित खाद्य उत्पादों की ट्रेडिंग, जिसमें ई-कॉमर्स भी शामिल है, में 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति दी गई थी, ताकि किसानों की आय बढ़े और भारत वैश्विक ‘फूड बास्केट’ के रूप में स्थापित हो सके।
उन्होंने यह भी कहा कि लक्ष्य यह होना चाहिए कि विश्व की हर डाइनिंग टेबल पर भारतीय खाद्य उत्पाद उपलब्ध हों। गुणवत्ता और नियामकीय मानकों से समझौता किए बिना भारतीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाना समय की आवश्यकता है। किसानों के हितों की रक्षा करते हुए 23 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते किए गए हैं और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र से जुड़े भ्रामक तथ्यों को दूर करने की जरूरत है।
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय में सचिव अविनाश जोशी ने कहा कि एनवेश का अर्थ है खोज और अर्जन। उन्होंने बताया कि उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के तहत खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को विशेष बल दिया गया है। ₹10,900 करोड़ के परिव्यय में से अब तक ₹2,625.04 करोड़ जारी किए जा चुके हैं। 2.5 लाख रोजगार सृजन के लक्ष्य के मुकाबले 3.29 लाख रोजगार सृजित हो चुके हैं, जो योजना की सफलता को दर्शाता है।
वर्ल्ड फूड प्राइज विजेता शकुंतला हरकसिंह ने सतत और समाधान आधारित दृष्टिकोण अपनाने पर बल दिया, वहीं एआईसीटीई के पूर्व अध्यक्ष टी जी सीताराम ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका पर प्रकाश डाला। निफ्टेम के निदेशक हरिंदर सिंह ओबरॉय ने कहा कि एनवेश-2026 ज्ञान और तकनीकी सहयोग का वैश्विक मंच है, जो भारत को खाद्य प्रसंस्करण में नेतृत्व स्थापित करने में मदद करेगा।
सम्मेलन में 1000 से अधिक प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। आगामी दिनों में प्लेनरी सत्र, कीनोट व्याख्यान, पैनल चर्चा, प्रदर्शनी और उद्योग संवाद आयोजित किए जाएंगे। सम्मेलन का उद्देश्य खाद्य प्रसंस्करण में उभरती तकनीकों, मूल्य संवर्धन, डिजिटल अनुपालन प्रणाली, सतत आपूर्ति श्रृंखला, निर्यात उन्मुख नवाचार, खाद्य सुरक्षा और भविष्य उन्मुख कृषि-उद्यमिता पारिस्थितिकी तंत्र पर विचार-विमर्श को बढ़ावा देना है।
Akhil Mahajan