धान उठान पर किसानों का हंगामा, मार्केट कमेटी कार्यालय पर जड़ा ताला,60 गाड़ियों की मांग

यमुनानगर की जगाधरी मंडी में धान उठान में देरी पर किसानों ने मार्केट कमेटी कार्यालय पर ताला जड़ दिया। किसान 60 गाड़ियां लगाने की मांग पर अड़े हैं।

धान उठान पर किसानों का हंगामा, मार्केट कमेटी कार्यालय पर जड़ा ताला,60 गाड़ियों की मांग

धान उठान में देरी पर किसानों ने जगाधरी मार्केट कमेटी कार्यालय पर जड़ा ताला
➤ कार्यालय के अंदर फंसे मार्केट कमेटी अध्यक्ष और अधिकारी, मौके पर पहुंचे एसडीएम विश्वनाथ
➤ किसानों ने 60 गाड़ियां लगाने की मांग की, खुले में पड़े धान के खराब होने का खतरा

यमुनानगर में धान के उठान में देरी को लेकर किसानों का गुस्सा गुरुवार को फूट पड़ा। किसानों ने जगाधरी मार्केट कमेटी कार्यालय पर ताला जड़ दिया। इस दौरान मार्केट कमेटी अध्यक्ष समेत अधिकारी कार्यालय के अंदर ही फंस गए। सूचना मिलने के बाद एसडीएम विश्वनाथ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचे और किसानों से बातचीत कर ताला खुलवाने का प्रयास किया। हालांकि किसान धान के उठान में तेजी लाने की मांग पर अड़े रहे।

किसानों का कहना है कि मंडी में हजारों कट्टे धान खुले में पड़े हुए हैं और आने वाली फसल के लिए मंडी में जगह कम पड़ रही है। किसानों को आशंका है कि यदि समय रहते धान का उठान नहीं हुआ तो नई फसल लेकर आने वाले किसानों को मंडी में अपनी फसल रखने में परेशानी होगी। वहीं बारिश का मौसम शुरू हो चुका है, जिससे खुले में पड़ा धान भीगने और खराब होने का खतरा बना हुआ है।

मंडी में हजारों कट्टे धान उठान के इंतजार में

भारतीय किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष संजू ने बताया कि मंडी में कई हजार कट्टे धान उठान के इंतजार में पड़े हैं। किसानों का कहना है कि मौजूदा रफ्तार से धान का उठान किया गया तो मंडी में जमा फसल को हटाने में काफी समय लगेगा।

इसी बीच किसानों की नई फसल मंडी में पहुंचने लगेगी। इससे मंडी में जगह की समस्या और बढ़ सकती है। किसानों का कहना है कि समय रहते उठान की व्यवस्था तेज नहीं की गई तो उन्हें अपनी फसल मंडी में रखने के लिए परेशानी का सामना करना पड़ेगा।

आज 30 गाड़ियां लगाने का आश्वासन, अगले दिन संख्या 40 करने की बात

मौके पर पहुंचे एसडीएम विश्वनाथ ने किसानों को बताया कि उन्होंने संबंधित एजेंसी से बात की है। प्रशासन की ओर से गुरुवार को धान के उठान के लिए 30 गाड़ियां लगाई गई हैं। एसडीएम ने किसानों को यह भी बताया कि अगले दिन गाड़ियों की संख्या बढ़ाकर 40 कर दी जाएगी, ताकि धान का उठान तेजी से हो सके।

हालांकि किसान प्रशासन के इस आश्वासन से संतुष्ट नहीं हुए। किसानों ने कहा कि 30 से 40 गाड़ियां करने से समस्या का समाधान तेजी से नहीं होगा। उन्होंने धान के उठान के लिए सीधे 60 गाड़ियां लगाने की मांग रखी। किसानों का कहना है कि मंडी में पहले से बड़ी मात्रा में धान जमा है और नई फसल भी पहुंच रही है, इसलिए उठान की रफ्तार काफी अधिक बढ़ाने की जरूरत है।

बारिश के बीच खुले में पड़ा धान, किसानों को खराब होने का डर

किसानों ने मंडी में खुले में पड़े धान को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि बारिश का मौसम शुरू हो चुका है। ऐसे में यदि धान का समय पर उठान नहीं हुआ और बारिश हो गई तो खुले में रखा धान भीग सकता है और खराब होने का खतरा बढ़ जाएगा।

किसानों का कहना है कि उन्होंने मेहनत से फसल तैयार की है। अब मंडी में फसल पहुंचने के बाद उठान में देरी के कारण उन्हें परेशानी उठानी पड़ रही है। इसी वजह से किसानों ने प्रशासन से उठान की व्यवस्था तत्काल तेज करने की मांग की।

नमी जांचने वाली मशीनों की अलग-अलग रीडिंग पर भी उठे सवाल

किसानों ने धान के उठान के साथ-साथ मंडी में नमी जांचने वाली मशीनों को लेकर भी सवाल उठाए। किसानों का आरोप है कि आढ़तियों और मार्केट कमेटी की नमी जांचने वाली मशीनों में अंतर आ रहा है।

किसानों के मुताबिक दोनों मशीनों पर एक ही धान की नमी की अलग-अलग रीडिंग मिल रही है। इससे किसानों को परेशानी हो रही है। उन्होंने प्रशासन से नमी जांच की इस समस्या का भी समाधान कराने की मांग की, ताकि धान की जांच को लेकर किसानों के सामने असमंजस की स्थिति न रहे।

कई मंडियों में उठान की समस्या होने का किसानों का दावा

किसानों का कहना है कि धान के उठान की समस्या केवल जगाधरी मंडी तक सीमित नहीं है। जिले की कई मंडियों में भी धान के उठान को लेकर ऐसी ही स्थिति बनी हुई है। किसानों के अनुसार जब तक उठान की रफ्तार नहीं बढ़ाई जाती, तब तक उनकी परेशानी दूर नहीं होगी।

इसी मांग को लेकर किसानों ने स्पष्ट किया कि उठान की गति बढ़ने तक उनका धरना जारी रहेगा। मौके पर पुलिस प्रशासन के साथ अन्य विभागों के अधिकारी भी पहुंचे और किसानों को समझाने का प्रयास किया।

फिलहाल किसानों की मुख्य मांग धान के उठान में तेजी लाने की है। प्रशासन की ओर से गुरुवार को 30 गाड़ियां लगाने और अगले दिन इनकी संख्या बढ़ाकर 40 करने का आश्वासन दिया गया है, जबकि किसान 60 गाड़ियां लगाने की मांग पर अड़े हुए हैं।