ट्रेन लेट, परीक्षा छूटी, रेलवे को ₹9.10 लाख मुआवजा ; 7 साल बाद छात्रा को मिला न्याय, रेलवे दोषी
उपभोक्ता आयोग ने ट्रेन लेट होने से परीक्षा छूटने के मामले में रेलवे को ₹9.10 लाख मुआवजा देने का आदेश दिया। 45 दिन में भुगतान नहीं होने पर ब्याज लगेगा।
- ट्रेन लेट होने से परीक्षा छूटी, रेलवे को ₹9.10 लाख मुआवजा देने का आदेश
- 7 साल बाद उपभोक्ता आयोग का फैसला, रेलवे की लापरवाही साबित
- 45 दिन में भुगतान नहीं हुआ तो 12 प्रतिशत ब्याज लगेगा
उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले की जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक अहम फैसले में भारतीय रेलवे को ₹9.10 लाख मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह मामला एक छात्रा की पढ़ाई से जुड़ा है, जिसकी अकादमिक योजना ट्रेन लेट होने के कारण प्रभावित हुई थी।
यह घटना 7 मई 2018 की है, जब 17 वर्षीय छात्रा बस्ती से लखनऊ इंटरसिटी सुपरफास्ट ट्रेन से यात्रा कर रही थी। उसे लखनऊ विश्वविद्यालय में बीएससी बायोटेक्नोलॉजी की प्रवेश परीक्षा देनी थी।
रिकॉर्ड के अनुसार, ट्रेन रास्ते में बिना तय कारणों के कई जगह रुकी और लखनऊ करीब ढाई घंटे देरी से पहुंची। इसके कारण छात्रा परीक्षा केंद्र समय पर नहीं पहुंच सकी और उसका परीक्षा देना संभव नहीं हो पाया।
छात्रा के पिता ने रेलवे को कई बार कानूनी नोटिस भेजे, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई।
करीब सात साल तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद आयोग ने रेलवे को लापरवाही का दोषी ठहराया। आयोग ने स्पष्ट किया कि ट्रेन में देरी का कोई संतोषजनक कारण नहीं बताया गया, जिससे छात्रा का भविष्य प्रभावित हुआ।
आयोग ने आदेश दिया कि रेलवे को 45 दिनों के भीतर ₹9.10 लाख का भुगतान करना होगा। तय समय में भुगतान न होने की स्थिति में 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
Akhil Mahajan