पंचकूला में तहसीलदार समेत 4 अधिकारियों पर FIR, पर्ल ग्रुप की 17.55 एकड़ अटैच जमीन बेचने का मामला

पंचकूला में PACL की अटैच जमीन बेचने के मामले में विजिलेंस ने तत्कालीन तहसीलदार समेत 4 लोगों पर भ्रष्टाचार और आपराधिक षड्यंत्र का केस दर्ज किया है।

पंचकूला में तहसीलदार समेत 4 अधिकारियों पर FIR, पर्ल ग्रुप की 17.55 एकड़ अटैच जमीन बेचने का मामला
  • पंचकूला में PACL की अटैच जमीन बेचने के मामले में बड़ा खुलासा
  • तत्कालीन तहसीलदार समेत 4 लोगों पर भ्रष्टाचार और साजिश का केस दर्ज
  • सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद 17.55 एकड़ जमीन की करोड़ों में रजिस्ट्री हुई

हरियाणा के पंचकूला जिले में PACL (पर्ल ग्रुप) की अटैच जमीन बेचने के मामले में राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेशों और जांच एजेंसियों की रोक के बावजूद करोड़ों रुपये की जमीन की रजिस्ट्री और इंतकाल कर दिए गए।

मामले में ब्यूरो ने तत्कालीन तहसीलदार विक्रम सिंगला, कानूनगो दीपक कुमार, पटवारी नरेंद्र कुमार डबास और जमीन मालिक सुरमुख सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार और आपराधिक षड्यंत्र के तहत केस दर्ज किया है।

जानकारी के अनुसार, PACL और उसकी सहयोगी कंपनियों की संपत्तियां निवेशकों का पैसा लौटाने के लिए जांच एजेंसियों द्वारा अटैच की गई थीं। इन संपत्तियों की बिक्री, म्यूटेशन और रजिस्ट्रेशन पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक लगाई गई थी।

इसके बावजूद आरोप है कि रायपुररानी तहसील में अधिकारियों ने कथित मिलीभगत से अटैच जमीन की रजिस्ट्री और इंतकाल मंजूर कर दिए।

जांच रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब के फतेहगढ़ साहिब निवासी सुरमुख सिंह की जमीन के मामले में हरदीप सिंह ने 22 दिसंबर 2025 को एसडीएम पंचकूला को आवेदन देकर राजस्व रिकॉर्ड से बंदी आदेश हटाने की मांग की थी।

इसके बाद पटवारी नरेंद्र कुमार ने तत्कालीन तहसीलदार विक्रम सिंगला के साथ मिलकर रिपोर्ट नंबर 232 दर्ज कर जमीन को बंदी आदेश से मुक्त दिखा दिया। वहीं कानूनगो दीपक कुमार ने भी संबंधित प्रक्रिया को तस्दीक कर दिया।

ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार 2 जनवरी 2026 को रजिस्ट्री नंबर 1491 और 1492 दर्ज हुईं, जिनके तहत सुरमुख सिंह ने कुनाल छिलाना और सौरभ के नाम कुल 17.55 एकड़ जमीन करीब 4.20 करोड़ रुपये में बेच दी।

इसके बाद 9 जनवरी को इंतकाल दर्ज किया गया और 17 जनवरी को कानूनगो और तहसीलदार ने इसे मंजूरी भी दे दी।

जांच में यह भी सामने आया कि इससे पहले संबंधित जमीन को लेकर कई शिकायतें और पत्राचार हुए थे। एसडीएम पंचकूला ने तहसीलदार रायपुररानी से स्पष्टीकरण भी मांगा था। वहीं हिसार निवासी एक शिकायतकर्ता ने भी ऐसी जमीनों की बिक्री रोकने का अनुरोध किया था, लेकिन आरोप है कि अधिकारियों ने इसे नजरअंदाज कर दिया।

विजिलेंस जांच में मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 संशोधित 2018 की धारा 7 और भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 61(2) के तहत पाया गया। इसके बाद सरकार से अभियोजन की अनुमति मांगी गई, जिस पर मुख्य सचिव और डीजीपी विजिलेंस से मंजूरी मिलने के बाद केस दर्ज किया गया।

तत्कालीन तहसीलदार विक्रम सिंगला का नाम इससे पहले भी जमीन सौदों और रिश्वत मामलों में सामने आ चुका है। बताया जा रहा है कि वह पहले भी इसी तरह के मामले में जेल जा चुका है।

30 जनवरी 2026 को विजिलेंस और एंटी करप्शन ब्यूरो पंचकूला में दर्ज मामले के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद रायपुररानी के गांव शाहपुर में PACL की अटैच जमीन का अवैध रजिस्ट्रेशन कराया गया था।