सिरसा महिला थाने पर हमले में NIA की चार्जशीट, पाकिस्तानी डॉन मास्टरमाइंड

सिरसा महिला थाने पर हुए ग्रेनेड हमले मामले में NIA ने 9 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। पाकिस्तानी डॉन शहजाद भट्टी को मुख्य साजिशकर्ता बताया गया है।

सिरसा महिला थाने पर हमले में NIA की चार्जशीट, पाकिस्तानी डॉन मास्टरमाइंड
  • सिरसा महिला थाने पर ग्रेनेड हमले में NIA की चार्जशीट दाखिल
  • पाकिस्तानी डॉन शहजाद भट्टी को बताया मुख्य साजिशकर्ता
  • हमले का वीडियो बनाकर प्रचारित करने की भी साजिश

हरियाणा के सिरसा महिला पुलिस थाने पर हुए ग्रेनेड हमले मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने बड़ा खुलासा किया है। एनआईए ने पंचकूला स्थित विशेष अदालत में 9 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर कर दी है। जांच एजेंसी ने इस हमले के पीछे पाकिस्तानी डॉन शहजाद भट्टी को मुख्य साजिशकर्ता बताया है।

चार्जशीट में कुल 9 आरोपियों के नाम शामिल हैं, जिनमें 2 पाकिस्तानी नागरिक बताए गए हैं। वहीं 5 आरोपी सिरसा और 2 पंजाब के रहने वाले हैं। एनआईए के अनुसार, यह हमला केवल धमाका नहीं था, बल्कि भारत में दहशत फैलाने और पुलिस प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की सुनियोजित साजिश थी।

यह घटना 25 नवंबर 2025 की रात सिरसा महिला थाने में हुई थी। शुरुआत में इसे सामान्य विस्फोट माना गया था, लेकिन बाद में घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो सामने आने के बाद जांच एजेंसियों को पता चला कि हमला पूरी तरह प्री-प्लान्ड था और इसकी साजिश पाकिस्तान में रची गई थी। इसके बाद इस मामले में एनआईए की एंट्री हुई।

एनआईए की जांच में सामने आया कि पाकिस्तानी डॉन शहजाद भट्टी और उसका सहयोगी सोहेल अहमद उर्फ सोहेल बलूच सोशल मीडिया और गुप्त संचार चैनलों के जरिए युवकों को जोड़ रहे थे। उन्हें कट्टरपंथी बनाकर भारत में ऑपरेशनल मॉड्यूल तैयार किए गए।

जांच एजेंसी के अनुसार, सिरसा का धीरज उर्फ धीरू भारत में इस मॉड्यूल का प्रमुख गुर्गा था, जो स्थानीय युवकों के साथ हमले का समन्वय कर रहा था। चार्जशीट में विकास उर्फ विक्की, संदीप उर्फ दैमर, विकास, सुशील उर्फ सिल्लू, मोहम्मद सिजान उर्फ गाजी और गुरजंत सिंह समेत कई नाम शामिल हैं।

एनआईए ने खुलासा किया कि हमले से पहले संभावित ठिकानों की रेकी की गई थी। इसके बाद सिरसा महिला थाने को टारगेट के रूप में चुना गया। हमले में इस्तेमाल देसी ग्रेनेड पंजाब के अमृतसर से लाए गए थे, जिनका इंतजाम गुरजंत सिंह ने किया था।

जांच के अनुसार, 25 नवंबर 2025 की रात महिला थाने के बाहर विस्फोट किया गया और पूरी घटना की वीडियो रिकॉर्डिंग भी करवाई गई, ताकि बाद में इसे सोशल मीडिया पर प्रचारित किया जा सके और लोगों में दहशत फैलाई जा सके।

एनआईए ने यह भी बताया कि हमले के बाद आरोपी लगातार पाकिस्तान स्थित हैंडलर के संपर्क में बने रहे। जांच में भर्ती, फंडिंग, विस्फोटक खरीद, परिचालन समन्वय और हमले की पूरी साजिश के सबूत मिले हैं।

जांच एजेंसी ने मामले में UAPA, भारतीय न्याय संहिता (BNS) और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए हैं। फिलहाल मामले में विदेशी कनेक्शन और फंडिंग नेटवर्क की जांच जारी है।