करनाल में धान घोटाले के आरोपी सुपरवाइजर की मौत:ब्रेन हेमरेज के चलते पीजीआई में तोड़ा दम, पुलिस ने किया था गिरफ्तार
करनाल के धान घोटाले और फर्जी गेटपास केस में बड़ा मोड़ आया है। मुख्य आरोपी पंकज तुली की ब्रेन हेमरेज से मौत हो गई, जबकि सचिव आशा रानी को जमानत मिल गई है। कई कर्मचारी अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं।
-
करनाल धान घोटाले के आरोपी सुपरवाइजर पंकज तुली की ब्रेन हेमरेज से मौत
-
फर्जी गेटपास घोटाले में सचिव आशा रानी को जमानत, कई कर्मचारी अब भी फरार
-
दोनों घोटालों ने मंडी सिस्टम और निगरानी पर बड़े सवाल खड़े किए
करनाल के धान घोटाले और फर्जी गेटपास फर्जीवाड़े से जुड़ी सबसे बड़ी खबर सामने आई है। मामले के मुख्य आरोपी और निलंबित मंडी सुपरवाइजर पंकज तुली की इलाज के दौरान मौत हो गई है। बुधवार शाम उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और उन्हें ब्रेन हेमरेज हुआ। हालत गंभीर होने पर पहले उन्हें करनाल के अस्पताल लाया गया और बाद में पीजीआई चंडीगढ़ में रेफर किया गया, जहां गुरुवार शाम उनका निधन हो गया।
पंकज तुली को 12 नवंबर को गिरफ्तार किया गया था। सीआईए-2 ने उन्हें दो दिन के रिमांड पर लेकर पूछताछ की थी। 14 नवंबर को रिमांड पूरा होने पर उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। इसके बाद वह जेल में थे, जहां उनकी तबीयत अचानक खराब हुई और उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया।
इसी मामले में सस्पेंड चल रही मार्किट कमेटी सचिव आशा रानी भी लंबे समय से फरार बताई जा रही थीं। उन्होंने अग्रिम जमानत याचिका लगाई थी जो पहले खारिज हुई, लेकिन अब उन्हें जमानत मिल गई है। गौरतलब है कि आशा रानी पर 4 नवंबर को एफआईआर दर्ज हुई थी और उसके बाद से वे अपने कार्यालय से नदारद थीं।
घोटाले की शुरुआत तब हुई जब डीएमईओ ईश्वर सिंह की शिकायत पर सचिव आशा रानी, मंडी कर्मचारी राजेंद्र, अजय और अमित के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। इनके साथ मिलकर पंकज तुली और दो कंप्यूटर ऑपरेटरों पर भी आरोप लगा कि उन्होंने फर्जी गेटपास बनवाए और सरकारी धान की अनियमित ढुलाई की। पुलिस ने दो कंप्यूटर ऑपरेटर अंकुश और अंकित को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
फर्जी गेटपास घोटाले में नया बड़ा एक्शन तब हुआ जब पुलिस जांच में नाम आने के बाद ऑक्शन रिकॉर्डर यशपाल को मुख्यालय ने निलंबित कर दिया। आदेशों के अनुसार यशपाल को अब रोहतक जेडएमईओ कार्यालय में हाजिरी लगानी होगी और बिना अनुमति के कहीं आने-जाने पर रोक रहेगी।
सीआईए-2 लगातार इस मामले की जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि एफआईआर में नामित मंडी कर्मचारी राजेंद्र, अजय कुमार और अमित कुमार अब तक पकड़ में नहीं आए हैं। पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है और उम्मीद है कि जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा।
इन दोनों घोटालों—धान के स्टॉक में कमी और गेटपास फर्जीवाड़े—ने मिलकर करनाल के प्रशासनिक ढांचे और मंडी सिस्टम में भारी खामियों को उजागर कर दिया है। विभागीय निगरानी, कर्मचारियों की मिलीभगत और मिलों के साथ संभावित सांठगांठ को लेकर जांच एजेंसियां अब दोनों नेटवर्क के बीच कनेक्शन तलाशने में जुटी हैं।
Author1