IAS डागर को CBI रिमांड में सीने में दर्द, ECG के बाद 14 दिन की न्यायिक हिरासत

169 करोड़ रुपये बैंक स्कैम मामले में गिरफ्तार रिटायर्ड IAS प्रदीप डागर ने CBI रिमांड के दौरान सीने में दर्द की शिकायत की। मेडिकल जांच के बाद अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

IAS डागर को CBI रिमांड में सीने में दर्द, ECG के बाद 14 दिन की न्यायिक हिरासत

CBI रिमांड के दौरान IAS प्रदीप डागर ने सीने में दर्द और घबराहट की शिकायत की

ECG व मेडिकल जांच के बाद बेटे और वकील से कराई गई मुलाकात

कोर्ट ने CBI की मांग पर 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा


हरियाणा के चर्चित 169 करोड़ रुपये बैंक स्कैम मामले में गिरफ्तार रिटायर्ड IAS अधिकारी प्रदीप कुमार डागर ने CBI रिमांड के दौरान सीने में दर्द और घबराहट की शिकायत की। इसके बाद जांच एजेंसी उन्हें सरकारी अस्पताल ले गई, जहां उनका ECG, ब्लड टेस्ट समेत अन्य मेडिकल परीक्षण कराए गए। जांच के बाद उन्हें उपचार दिया गया और उनके बेटे व वकील से भी मुलाकात करवाई गई।

रिमांड समाप्त होने के बाद वीरवार को प्रदीप डागर को पंचकूला स्थित अदालत में पेश किया गया। इस दौरान वह मास्क लगाए हुए हाथ में चश्मा लेकर सामान्य रूप से चलते हुए कोर्ट पहुंचे। CBI ने अदालत से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने की मांग की, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।

गौरतलब है कि हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) के पूर्व सदस्य सचिव प्रदीप कुमार डागर को 169 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताओं के मामले में गिरफ्तार किया गया था। उनकी गिरफ्तारी 30 जून, यानी उनके रिटायरमेंट वाले दिन हुई थी। इसके बाद अदालत ने उन्हें दो दिन की CBI रिमांड पर भेजा था।

2 जुलाई को कोर्ट में पेशी के दौरान प्रदीप डागर मास्क पहने नजर आए। एक दिन पहले सीने में दर्द की शिकायत करने वाले डागर आराम से चलकर कोर्ट पहुंचे।

CBI ने कोर्ट में क्या बताया

CBI ने अदालत को बताया कि रिमांड के दौरान आरोपी को सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवाइयां लेने की अनुमति दी गई और घर का बना भोजन भी उपलब्ध कराया गया। अनुरोध पर उनके बेटे और वकील से मुलाकात भी करवाई गई।

जांच एजेंसी के अनुसार 1 जुलाई को नियमित मेडिकल जांच के दौरान डागर की तबीयत बिगड़ गई। डॉक्टरों ने उनका ECG, ब्लड टेस्ट और अन्य जरूरी मेडिकल जांच की। उपचार के दौरान उनके हाथ में कैनुला लगाकर सलाइन भी चढ़ाई गई।

CBI ने मेडिकल जांच की रिपोर्ट भी अदालत में पेश की। हालांकि रिपोर्ट की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। एजेंसी का कहना है कि हिरासत के दौरान आरोपी के स्वास्थ्य और कानूनी अधिकारों का पूरा ध्यान रखा गया।

जांच में सहयोग नहीं करने का दावा

CBI ने अदालत में दावा किया कि रिमांड के दौरान उपलब्ध कराए गए दस्तावेजी और डिजिटल साक्ष्यों के बावजूद प्रदीप डागर ने जांच में अपेक्षित सहयोग नहीं किया। एजेंसी के अनुसार उन्होंने कई महत्वपूर्ण जानकारियां छिपाईं और उपलब्ध साक्ष्यों पर संतोषजनक जवाब नहीं दिया।

जांच एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया कि मामले से जुड़े महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य मोबाइल उपकरणों से कथित रूप से डिलीट या नष्ट किए गए। CBI का कहना है कि यदि आरोपी को राहत दी जाती है तो जांच प्रभावित होने और साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की आशंका बनी रह सकती है।

बैंक स्कैम को लेकर पूछे गए कई सवाल

रिमांड के दौरान CBI ने डागर से बैंक खाते खोलने, सरकारी धन के निवेश, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में खाता खोलने की प्रक्रिया, फर्जी वित्तीय लेनदेन और नोटिंग में किए गए बदलावों को लेकर विस्तृत पूछताछ की।

इसके अलावा सह-आरोपियों से संबंध, बैठकों, अधीनस्थ अधिकारियों को दिए गए निर्देशों और कथित रिश्वत से जुड़े आरोपों पर भी सवाल पूछे गए। एजेंसी के अनुसार निजी सहायक और अन्य व्यक्तियों के माध्यम से कथित आर्थिक लाभ प्राप्त करने के आरोपों की भी जांच की जा रही है।

खुद को बताया निर्दोष

CBI सूत्रों के अनुसार पूछताछ के दौरान प्रदीप डागर ने खुद को निर्दोष बताया। उन्होंने कहा कि उन्होंने तत्कालीन चेयरमैन के निर्देशों के अनुसार ही कार्य किया था। सूत्रों के मुताबिक उनके इस बयान के बाद जांच का दायरा अन्य अधिकारियों तक भी बढ़ सकता है। हालांकि इस संबंध में CBI की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।