कांग्रेस में फिर बढ़ी खींचतान, शहरी जिलाध्यक्ष बजरंग गर्ग का इस्तीफा,चौटाला से मुलाकात के बाद चर्चाएं तेज

हिसार कांग्रेस के शहरी जिलाध्यक्ष बजरंग दास गर्ग ने निजी कारण बताते हुए इस्तीफा दे दिया। एक दिन पहले दुष्यंत चौटाला से मुलाकात के बाद सियासी चर्चाएं तेज हैं।

कांग्रेस में फिर बढ़ी खींचतान, शहरी जिलाध्यक्ष बजरंग गर्ग का इस्तीफा,चौटाला से मुलाकात के बाद चर्चाएं तेज

हिसार कांग्रेस के शहरी जिलाध्यक्ष बजरंग दास गर्ग ने पद से इस्तीफा दिया

■ ग्रामीण जिलाध्यक्ष से लंबे समय से चल रही अनबन के बीच बढ़ी सियासी हलचल

■ दुष्यंत चौटाला से मुलाकात के बाद इस्तीफे ने राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दी

हिसार कांग्रेस में संगठनात्मक खींचतान के बीच बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। पार्टी के शहरी जिलाध्यक्ष बजरंग दास गर्ग ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा प्रदेश कांग्रेस प्रभारी संजय दत्त को भेजा है।

गर्ग ने इस्तीफे में निजी कारणों का हवाला दिया है। उन्होंने लिखा है कि वह सामाजिक कार्यों में अधिक व्यस्त रहते हैं और पार्टी के काम में सक्रिय रूप से समय नहीं दे पाएंगे।

हालांकि, पार्टी से जुड़े सूत्र इस्तीफे की वजह को संगठन के भीतर चल रही नाराजगी से जोड़ रहे हैं। बताया जा रहा है कि बजरंग दास गर्ग जब से शहरी जिलाध्यक्ष बनाए गए थे, तभी से इस जिम्मेदारी को लेकर असंतुष्ट थे। वह पहले भी इस्तीफा देने की इच्छा जता चुके थे, लेकिन बार-बार कहने के बावजूद उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया था।

फिलहाल गर्ग की ओर से इस्तीफे के पीछे किसी विवाद को वजह बताए जाने को लेकर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

ग्रामीण जिलाध्यक्ष से टकराव की चर्चा.

हिसार कांग्रेस में शहरी और ग्रामीण जिलाध्यक्ष के बीच मतभेद पहले भी सामने आते रहे हैं। दोनों के बीच संगठनात्मक कार्यक्रमों और मंच संचालन को लेकर सार्वजनिक रूप से विवाद हो चुका है।

वोट चोरी कार्यक्रम के दौरान मंच संचालन को लेकर दोनों जिलाध्यक्ष आमने-सामने आ गए थे। उस समय प्रदेशाध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह और सांसद दीपेंद्र हुड्डा की मौजूदगी में दोनों के बीच तीखी बहस हुई थी। बाद में दोनों जिलाध्यक्षों ने पार्टी की अनुशासन समिति के सामने माफी मांगी थी।

कांग्रेस भवन के पोस्टर को लेकर भी हुआ था विवाद.

हिसार कांग्रेस भवन में लगे कुमारी सैलजा के पोस्टर को हटाए जाने को लेकर भी विवाद सामने आया था। ग्रामीण जिलाध्यक्ष बृजलाल बहबलपुरिया ने पुराने पोस्टर की जगह नया पोस्टर लगवाया था।

नए पोस्टर में कुमारी सैलजा की तस्वीर का आकार छोटा कर उसे किनारे किया गया था। वहीं, सुरजेवाला को प्रदेशाध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह के बराबर स्थान दिए जाने की बात सामने आई थी। विवाद बढ़ने के बाद पोस्टर को बदलना पड़ा था।

ग्रामीण जिलाध्यक्ष का पद चाहते थे गर्ग.

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, बजरंग दास गर्ग ग्रामीण जिलाध्यक्ष बनना चाहते थे। वह हुड्डा गुट से जुड़े माने जाते हैं और भूपेंद्र सिंह हुड्डा की पैरवी के बाद उन्हें जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली थी।

हालांकि, हिसार में ग्रामीण जिलाध्यक्ष का क्षेत्र संगठनात्मक रूप से बड़ा है। ग्रामीण जिलाध्यक्ष के पास हिसार शहर को छोड़कर छह विधानसभा क्षेत्रों का जिम्मा है, जबकि शहरी जिलाध्यक्ष का क्षेत्र मुख्य रूप से शहर तक सीमित है।

इसी वजह से गर्ग को ग्रामीण जिलाध्यक्ष का पद नहीं मिलने से नाराजगी होने की चर्चा लंबे समय से थी।

ग्रामीण जिलाध्यक्ष बृजलाल बहबलपुरिया ने कांग्रेस भवन हिसार में अपनी नेम प्लेट भी लगाई थी। इसे लेकर भी संगठन के भीतर चर्चा हुई थी।

जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान भी दिखी थी गुटबाजी.

हिसार कांग्रेस में दोनों गुटों के बीच दूरी एक अन्य प्रदर्शन के दौरान भी सामने आई थी। दिल्ली में छात्रों पर लाठीचार्ज और कांग्रेस नेताओं के साथ कथित बदसलूकी के विरोध में जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया गया था।

इस दौरान ग्रामीण जिलाध्यक्ष बहबलपुरिया और शहरी जिलाध्यक्ष गर्ग करीब एक घंटे के अंतर पर अलग-अलग ज्ञापन देने पहुंचे थे। इससे पार्टी के भीतर अलग-अलग गुटों की सक्रियता की चर्चा तेज हो गई थी।

हालांकि, उस समय ग्रामीण जिलाध्यक्ष बहबलपुरिया ने कांग्रेस में किसी तरह की फूट से इनकार किया था। उनका कहना था कि शहरी और ग्रामीण जिलाध्यक्ष अलग-अलग क्षेत्रों के लिए जिम्मेदार हैं, इसलिए अलग-अलग ज्ञापन दिए गए।

दुष्यंत चौटाला से मुलाकात के बाद बढ़ी चर्चाएं.

बजरंग दास गर्ग के इस्तीफे से एक दिन पहले उनकी पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला से मुलाकात भी हुई थी। इस मुलाकात के बाद हिसार के राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं और तेज हो गई हैं।

हालांकि, गर्ग और दुष्यंत चौटाला की मुलाकात का इस्तीफे से कोई सीधा संबंध है या नहीं, इसकी पुष्टि नहीं हुई है। दोनों के बीच हुई मुलाकात को लेकर भी गर्ग की तरफ से कोई सार्वजनिक राजनीतिक संकेत सामने नहीं आया है।

गौरतलब है कि हरियाणा में करीब 11 साल बाद राहुल गांधी के हस्तक्षेप के बाद जिला स्तर पर कांग्रेस संगठन का गठन हो पाया था। अगस्त 2025 में जिलाध्यक्षों की सूची जारी की गई थी।

भाजपा ने कांग्रेस पर साधा निशाना.

गर्ग के इस्तीफे पर भाजपा ने कांग्रेस पर निशाना साधा है। हिसार भाजपा जिलाध्यक्ष आशा खेदड़ ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस को पहले अपना घर संभालना चाहिए।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस के ग्रामीण जिलाध्यक्ष भाजपा के मंडल अध्यक्षों के पार्टी छोड़ने की बात कर रहे थे, लेकिन अब उनके सामने अपने संगठन को संभालने की चुनौती है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस को पहले अपने घर में लगी आग बुझानी चाहिए।

भाजपा जिला संयोजक मुकेश बंसल ने भी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस को पहले अपना घर संभालना चाहिए।

कौन हैं बजरंग दास गर्ग.

बजरंग दास गर्ग हरियाणा की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। वह भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के दौरान नौ साल से अधिक समय तक कॉनफेड के चेयरमैन रहे थे।

हालांकि, 2014 के विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया था। उन्होंने दिल्ली में तत्कालीन भाजपा हरियाणा प्रभारी अनिल जैन के सामने भाजपा की सदस्यता ली थी।

भाजपा से टिकट मिलने की संभावना कमजोर होने के बाद वह डॉ. सुभाष चंद्रा के सहयोगी के रूप में भी सक्रिय रहे। वह भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य भी रहे।

भजनलाल के साथ काम किया, फिर हुड्डा के करीबी बने.

गर्ग का राजनीतिक सफर इससे भी पुराना है। वर्ष 1991 में उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी भजनलाल के साथ काम किया था। लंबे समय तक वह भजनलाल परिवार के साथ जुड़े रहे।

जब भजनलाल कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष थे, तब गर्ग ने कैथल से विधानसभा टिकट की मांग की थी, लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिला।

इसके बाद भूपेंद्र सिंह हुड्डा के मुख्यमंत्री बनने पर गर्ग उनके करीबी हो गए। कुछ समय बाद उन्हें कॉनफेड के चेयरमैन की जिम्मेदारी मिली। अब कांग्रेस के शहरी जिलाध्यक्ष पद से उनके इस्तीफे के बाद हिसार की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।